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कर्णवेदन विधि से अस्थमा का स्थायी उपचार संभव !

NS Desk

आयुर्वेद में "कर्णवेदन" के नाम से एक विशेष तरह की चिकित्सा पद्धति का वर्णन सुश्रुत संहिता में किया गया है, यह चिकित्सा श्वास / दमा में बेहद कारगर व बेहद कम समय में प्रभावी लाभ प्रदान करती है, डॉ. राज तायल अपने हॉस्पिटल में इसी विधि के माध्यम से अब तक हज़ारों रोगियों के इन्हेलर को छुड़वा चुके हैं।

इस विधि में कान में एक विशेष जगह पर सुन्न करके छेद किया जाता है जिसका वर्णन शास्त्रों में "ब्रह्मरंध्र" के नाम से किया गया है। इस छेद में चाँदी की एक विशेष तरह की तार को डालकर उसे बाली (गोल कुण्डल) के रूप में पहना दिया जाता है, इसके 7 दिन बाद रोगी को पुनः बुलाकर छोटी सी मोती लगी हुई चाँदी की लौंग कान में पहना दी जाती है, इस प्रक्रिया के बाद अधिकांश रोगियों को अपने जीवन में अस्थमा की समस्या नहीं होती है। इस प्रक्रिया के पहले डॉ.तायल की ओर से आहार-विहार सम्बन्धी दिशा-निर्देश दिया जाता है व आयुर्वेद की कुछ औषधियों को देकर शरीर को तैयार किया जाता है, डॉ.तायल इस विधि को सहज ढंग से करने में सिद्ध हस्त हैं व देश भर में उन्हें उनकी इस सफल चिकित्सा के लिए कई सम्मानों से सम्मानित किया गया है, यदि आपको या आपके परिवार के किसी भी व्यक्ति को इस तरह की कोई परेशानी है तो डॉ. राज तायल से अवश्य संपर्क करें!

डॉ. तायल इस विधि को सिखाने के लिए आयुर्वेद के चिकित्सकों को ट्रेनिंग भी देते हैं!

दिल्ली के भैरो मंदिर (कालका जी मंदिर के सामने) प्रत्येक मंगलवार को वे रोगियों को निःशुल्क रूप से इस विधि के माध्यम से उपचार करते हैं।

इसी पद्धति से जुड़े कुछ वीडियो आप नीचे देख सकते हैं:

Disclaimer - The aim of the article is just to convey information to you. Use any medicine, therapy, herb or fruit please do it under the guidance of a qualified Ayurveda doctor.

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