Home Blogs Nirogstreet News अपनी संहिताओं पर विश्वास करें, आयुर्वेद जरुर सफल होगा - डॉ. नरेश गर्ग

अपनी संहिताओं पर विश्वास करें, आयुर्वेद जरुर सफल होगा - डॉ. नरेश गर्ग

By NirogStreet Desk| posted on :   01-Jun-2019| Nirogstreet News

डॉ. नरेश कुमार गर्ग, श्रीगंगानगर कॉलेज ऑफ आयुर्वेद, राजस्थान में एसोसिएट प्रोफ़ेसर हैं. निरोग स्ट्रीट के आमंत्रण पर वे निरोग स्ट्रीट आयुर्वेद डायलॉग में शामिल होने के लिए दिल्ली आए हुए थे. वही उनसे आयुर्वेद की दशा और दिशा को लेकर बातचीत हुई. पेश है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश -

आप आयुर्वेद शिक्षण में हैं. वर्तमान में आयुर्वेद की पढ़ाई कर रहे छात्रों के बारे में आपकी क्या राय है?

अभी जो बच्चे आ रहे हैं वे बहुत मेहनत कर रहे हैं. वे आयुर्वेद के क्षेत्र में बहुत कुछ करना चाहते हैं. आयुर्वेद के दृष्टिकोण से यह बहुत अच्छी बात है. मेरी उन्हें सलाह है कि वे आयुर्वेद को अच्छे से समझे और उसके वैज्ञानिक महत्व को समझते हुए उसको उपयोग में लायें व जनसाधारण को समझाएं.

एलोपैथ की तुलना में आयुर्वेद में रिसर्च की बहुत कमी है. इस बारे में आपकी क्या राय है?

इसमें कोई शक नहीं है कि एलोपैथ की तुलना में आयुर्वेद में रिसर्च पेपर थोड़े कम हैं. लेकिन अब इसपर बहुत काम हो रहा है. हमारी कई संस्थाएं जैसे सीसीआरएस (CCRS) आदि इसपर बहुत अच्छा काम कर रही है. यहाँ से आपको बहुत अच्छी जानकारियां मिल सकती है.

पिछले कुछ वर्षों में आयुर्वेद का बाज़ार तेजी से बढ़ा है और इसे लेकर लोगों में काफी अधिक जागरूकता बढ़ी है. आयुर्वेद को लेकर कई संस्थान भी काफी काम कर रहे हैं? पूरे परिदृश्य (scenario) को देखकर आपको क्या लगता है?

आयुर्वेद का सिनेरियो उज्जवल है. अभी आयुर्वेद में बहुत काम हुआ है, लेकिन बहुत काम होना अभी बाकी है. निरोग स्ट्रीट जैसे संस्थान आयुर्वेदिक डॉक्टरों के हिसाब से बेहतरीन काम कर रहे हैं.

आयुर्वेद में झोला छाप डॉक्टरों की कोई कमी नहीं है. ऐसे लोगों की वजह से आयुर्वेद की छवि धूमिल होती है? आयुर्वेद जगत को इसे लेकर क्या कदम उठाना चाहिए ? आपकी क्या राय है?

सरकार ने अपनी तरफ से इसके लिए मशीनरी तैयार की है. लोगों को शिक्षित भी किया. लेकिन यह आयुर्वेद के लोगों की कमी है कि वे आयुर्वेद को लोगों तक सही तथ्य नहीं पहुंचा पा रहे हैं. बाज़ार में ऐसे बहुत सारे प्रोडक्ट हैं जो आयुर्वेद के नाम पर बिक रहे हैं जबकि आयुर्वेद से उसका कोई लेना-देना नहीं. इसके लिए जरुरी है कि आयुर्वेद के लोग आयें और ठोस कदम उठाये.

आयुर्वेद शिक्षा में सुधार की क्या गुंजाइश है?

आयुर्वेद शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए अभी और अधिक मेहनत करने की जरुरत है. नए चिकित्सकों की राह आसान हो, उसके लिए आयुर्वेद कॉलेज और आयुर्वेद के बड़े ब्रांड्स को काम करना होगा.

आयुर्वेद की पहचान अब भी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति की ही है. यह लोगों की पहली पसंद अब भी नहीं बन पाया है. बतौर आयुर्वेद शिक्षक आपकी क्या राय है?

इसके लिए कुछ हद तक सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार है. सरकार आयुर्वेद को ज्यादा बजट भी नहीं देती. यदि सरकार बजट बढ़ाती है तो आयुर्वेद बहुत अच्छा कर सकता है. लेकिन आयुर्वेद वैकल्पिक चिकित्सा समझा जाता है, इससे मैं इत्तेफाक नहीं रखता. ढेरों ऐसे लोग हैं जो आयुर्वेद पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं.

आयुर्वेद के बहुत सारे डॉक्टर एलोपैथ की दवाएं देते हैं. इस बारे में आप क्या कहते हैं?

हँसते हुए ..... यह एक बहुत बड़ा इश्यू है. अर्थोपार्जन के लिए वे ये सारे कार्य करते हैं. अगर सरकार उन्हें अच्छा मौका मुहैया करवाए तो वे अकेले आयुर्वेद के दम पर भी बहुत अच्छा कर सकते हैं. आयुर्वेद से जुड़े लोगों की सबसे बड़ी समस्या है कि वे बाजार में अपने आप को ठीक से प्रेजेंट नहीं कर पाते. हम लोगों को नहीं बता पाते कि हम क्या हैं? इसके लिए निरोग स्ट्रीट जैसे प्लेटफॉर्म बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं.

आयुर्वेद के छात्रों और नये चिकित्सकों को बतौर शिक्षक आप क्या राय देना चाहेंगे?

मेरा उनको सुझाव है कि आयुर्वेद का सम्मान करे. आयुर्वेद के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अच्छी तरह से समझे. अपनी संहिताओं पर विश्वास करे. अपनी योग्यता पर भरोसा करे. आयुर्वेद जरुर सफल होगा.

आम लोगों के लिए एक आम सवाल. आयुर्वेद की मदद से कैसे स्वस्थ्य रहा जा सकता हैं?

आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ दैनिक जीवन पद्धति का भी वर्णन करता है. इसमें हर मौसम के हिसाब से आहार और विहार का वर्णन मिलता है. कहने का अर्थ है कि आयुर्वेद में ऋतुचर्या और दिनचर्या का जैसे वर्णन किया गया है, उसका यदि पालन किया जाए तो आप हमेशा स्वस्थ्य रहेंगे.

निरोग स्ट्रीट से बातचीत के लिए आपका बहुत धन्यवाद. उम्मीद करते हैं कि आयुर्वेद का कीर्ति पताका पूरे संसार में फहराए.

डॉ. नरेश कुमार गर्ग से हुई बातचीत का वीडियो -

NirogStreet Desk

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