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आयुर्वेद के सिद्धांतों के आधार पर ही चिकित्सा करनी चाहिए - प्रोफेसर राकेश कुमार तिवारी

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By NS Desk | 12-Feb-2019

nirogstreet sambhasha in Pilibhit

पीलीभीत. 11 फरवरी, 2019 : निरोगस्ट्रीट आयुर्वेद के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं के साथ मिलकर पूरे देशभर में निरोग स्ट्रीट सम्भाषा का आयोजन कर रही है. इसमें आयुर्वेद के विविध विषयों को लेकर परिचर्चा होती है. इसी कड़ी में आयुर्वेद सम्भाषा का यह कारवां उत्तरप्रदेश के 'पीलीभीत' में पहुंचा. रोग निदान विभाग ललित हरि राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय पीलीभीत और आरोग्य भारती के सौजन्य से एडवांसमेंट इन आयुर्वेद डायग्नोसिस एंड मैनेजमेंट विषय पर सोमवार 11 फरवरी को एक संगोष्ठी का आयोजन यहाँ किया गया.

मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर विराजमान ललित हरि राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर राकेश कुमार तिवारी ने अपने उद्बोधन में आयुर्वेद चिकित्सा की आवश्यकता और उसकी विशेषता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि आज के आयुर्वेद चिकित्सक उस मूलभूत नियम को नहीं समझ पाते जो चरक ने बताया, बल्कि हैरिसन ने उसे डाइट एवं न्यूट्रिशन थेरेपी के नाम से बता दिया। उन्होंने बताया कि भले ही हम व्याधि का नामकरण न कर पाएं लेकिन हमें आयुर्वेद के सिद्धांतों पर ही उस व्याधि के दोष ,दूषयों की चिकित्सा करनी चाहिए। मधुमेह के रोगी की किस प्रकार से चिकित्सा करनी चाहिए, इस संबंध में भी उन्होंने अपनी बात रखी. वही निरोग स्ट्रीट के सह संस्थापक डॉ. अभिषेक गुप्ता ने मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखते हुए, आयुर्वेद की अंतरराष्ट्रीय मांग के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि आज शुद्ध आयुर्वेद चिकित्सा करके भी चिकित्सक लाखों रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने इमरजेंसी में आयुर्वेद चिकित्सा के उपयोग को उदाहरण सहित बताया।

डॉ. शिप्रा अग्रवाल ने आयुर्वेद के निदान के आयुर्वेद में वर्णित आधुनिक तरीकों को उदाहरण सहित समझाया। टनकपुर से आये मर्म चिकित्सा के ट्रेनर व प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ मोहम्मद शाहिद ने मर्म चिकित्सा के बारे में विस्तार से बताया। वही कार्यक्रम के आयोजक डॉ अतुल वार्ष्णेय विभागाध्यक्ष रोग निदान विभाग ने बताया कि टेक्नोलॉजी के प्रयोग से हम अपनी चिकित्सीय क्षेत्र को कई गुणा बड़ा सकते हैं. आज बाजार में नाड़ी तरंगणी आदि कई नए उपकरण उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करने पर चिकित्सा से ज्यादा जोर दिया जाता है. यदि हम आयुर्वेद में वर्णित दिनचर्या, व ऋतुचर्या व योग का अभ्यास करें तो हम किसी भी बीमारी से बचे रह सकते हैं।

संगोष्ठी में स्थानीय चिकित्सकों में डॉ नरेंद्र दीक्षित, डॉ वीरेंद्र श्रीवास्तव ,डॉ अलका,डॉ विनीता व बरेली से डॉ रामबाबू प्रमुखता से उपस्थित रहे. बरेली के तीनों आयुर्वेदिक कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ महाविद्यालय के सभी स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ सभी अध्यापक व टेक्नीशियन उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजन में डॉ अरविंद गुप्ता,डॉ शैलेन्द्र कुमार,डॉ हरिशंकर,डॉ सिद्धार्थ,डॉ रमेश ,डॉ साधना,डॉ मनोज ,डॉ महेंद्र प्रताप सिंह का योगदान रहा। कार्यक्रम में आसपास के 150 चिकित्सक व विद्यार्थी उपस्थित रहे। (स्रोत और मूल रिपोर्ट - वैद्य अतुल )

consult with ayurveda doctor.
डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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