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महामृत्युंजय मंत्र से गंभीर बीमारियों का इलाज ! ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।

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By Dr Pushpa | 21-Feb-2020

Mahamrityunjaya Mantra

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥  Mahamrityunjaya Mantra Benefits in Hindi

आयुर्वेद में मंत्र थेरेपी विशेष रूप से वर्णित है. कहा जाता है कि जब चिकित्सा की सभी पद्धतियाँ असफल हो जाती है तब मंत्र थेरेपी से मृत्यु के मुंह में पहुँच चुके रोगी को भी बचाया जा सकता है. महामृत्युंजय मंत्र (Mahamrityunjaya Mantra) भी एक ऐसा ही मंत्र है जिसका धार्मिक दृष्टिकोण से महत्व तो है ही, स्वास्थ्य रक्षण और अकाल मृत्यु से बचने का उपाय भी इसे माना जाता है. मान्यता है कि इससे असाध्य से असाध्य रोगों का इलाज संभव है और काल के गाल से भी शुद्धता से जाप करने वालों को खींच लेता है.  

महामृत्युंजय मंत्र जाप के फायदे  : Benefits Of Mahamrityunjaya Mantra

धर्माचार्यों के मुताबिक़ महामृत्युंजय मंत्र में आलौकिक शक्तियां है जिनसे गंभीर रोग और अकाल मृत्यु को भी टाला जा सकता है. यही वजह है कि मृत्यु को पराजित करने वाला सबसे कारगर मंत्र महामृत्युंजय को माना गया है. इसे संजीवनी मंत्र भी कह सकते हैं. इस मंत्र का रुद्र संहिता के सतीखंड में उल्लेख मिलता है पुराणों के अनुसार, राजा दधिच भी इसी मंत्र के कारण ही पूर्ववत सकुशल जीवित हुए थे. इसी मंत्र से महर्षि मार्कण्डेय ने यमराज को पराजित किया था और बृहस्पति के पुत्र कच भी इस मंत्र द्वारा मरकर जीवित हो उठे थे.  यही वजह है कि शिव भक्त और हिन्दू धर्मं को मानने वाले तमाम लोग संकटग्रस्त होने पर इस मंत्र का जाप जरुर करते हैं और इसका फल भी उन्हें मिलता है. इसकी अनेक कहानियां आपने अखबारों और वेबसाइटों पर जरुर पढी होगी जिसमें महामृत्युंजय मंत्र के प्रभाव से कैंसर आदि असाध्य रोगों से ग्रसित व्यक्ति के ठीक होने की खबर सामने आयी है. इसी कारण भगवान शिव से जुड़े महाशिवरात्री जैसे विशिष्ट पर्व में  पूजा-अर्चना के दौरान शिवलिंग के सामने ध्यान लगाकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है.  ( महामृत्युंजय मंत्र से कैंसर पीड़ित को मिली आवाज , मंत्र थेरेपी से बोल पड़ा ‘बेजुबान’  )

महामृत्युंजय मंत्र पर शोध :  Research On Mahamrityunjaya Mantra

महामृत्युंजय मंत्र को निरोग होने का मंत्र, सर्व रोग नाशक मंत्र, शाबर मंत्र , कैंसर निवारण मंत्र आदि नाम से भी कुछ लोग पुकारते है. यह अपनी - अपनी आस्था पर निर्भर करता है. वैसे देश में महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग हजारों साल से होता रहा है और अब तक इसे लोगों की आस्था से ही जोड़कर देखा जाता रहा है. लेकिन अब वैज्ञानिक दृष्टि से यह मंत्र स्वास्थ्य के लिए कितना असरदार है, इसका पता लगाने के लिए शोध शुरू हो गए हैं. इसी दिशा में केंद्र सरकार के आरएमएल अस्पताल (Ram Manohar Lohia Hospital) में करीब चार साल से शोध चल रहा है. अब शोध अंतिम चरण है और वहां के डॉक्टर नतीजों से बेहद उत्साहित हैं. डॉक्टरों का कहना है कि डाटा का विश्लेषण चल रहा है, रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा.  अमेरिका की फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी ने भी यहां के डॉक्टरों से संपर्क कर इस शोध से जुड़ने की इच्छा जाहिर की है. आरएमएल अस्पताल में यह शोध गंभीर ब्रेन इंजरी वाले मरीजों पर किया गया है. वर्ष 2016 में इस पर शोध शुरू हुआ था. 

अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. अजय चौधरी के नेतृत्व में यह शोध चल रहा है. उन्होंने कहा कि देश में लोग जीवन रक्षक के रूप में इस मंत्र का प्रयोग करते हैं. यह सिर्फ मान्यता है या विज्ञान से इसका संबंध है, यह जानने के लिए शोध हो रहा है. इस तरह के मंत्रों पर देश में शोध कम हुए हैं, लेकिन विदेशों में काफी काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से लोग खास अवसरों पर उपवास करते रहे हैं. इसको लेकर भी देश में कोई शोध नहीं हुआ. जबकि 2016 में मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार जापान के जिस डॉक्टर को मिला उन्होंने उपवास पर ही शोध किया था. शोध में बताया गया था कि उपवास से शरीर के अंदर कैंसर समेत अन्य बीमारियों के लिए जिम्मेदार सेल्स खत्म हो जाती हैं. डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि आरएमएल अस्पताल में चल रहे शोध के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने फंड जारी किया है. ब्रेन इंजरी के 40 मरीजों पर यह अध्ययन किया जा रहा है. इन मरीजों को 20-20 के दो ग्रुप में बांटा गया. एक ग्रुप के मरीजों को प्रोटोकॉल के तहत निर्धारित इलाज किया गया. दूसरे ग्रुप के मरीजों को इलाज के साथ-साथ महामृत्युंजय मंत्र भी सुनाया गया. यह काम आइसीयू के बाहर रिहैबिलिटेशन के दौरान किया गया. पहले यह पूरी प्रक्रिया अस्पताल में हुई. बाद में कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया स्थित संस्कृत विद्यापीठ को इस शोध में शामिल किया गया और मरीजों को महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग कराया गया.

क्या है महामृत्युंजय मंत्र (What Is Mahamrityunjaya Mantra)

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद का एक श्लोक है.शिव को मृत्युंजय के रूप में समर्पित ये महान मंत्र ऋग्वेद में पाया जाता है. शास्त्रों की मान्यता है कि महामृत्युंजय मंत्र चमत्कारी एवं शक्तिशाली मंत्र है. जीवन की अनेक समस्याओं को सुलझाने में यह सहायक है. अगर मन में श्रद्धा हो तो क ठिन समस्याएं भी इससे सुलझ जाती हैं. यह ग्रहों की शांति में भी अहम भूमिका निभाता है. हिन्दू धर्म में इसे सबसे शक्तिशाली मंत्र माना गया है. इस मंत्र की शक्ति से जुड़ी कई कथाएं शास्त्रों और पुराणों में मिलती है जिनमें बताया गया है कि इस मंत्र के जप से गंभीर रुप से बीमार व्यक्ति स्वस्थ हो गए और मृत्यु के मुंह में पहुंच चुके व्यक्ति भी दीर्घायु का आशीर्वाद पा गए.

महामृत्युंजय मंत्र का शब्दार्थ (Meaning Of Mahamrityunjaya Mantra)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥  अर्थात हम तीन नेत्र वाले भगवान शंकर की पूजा करते हैं जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं.  जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं। उनसे हमारी प्रार्थना है कि जिस प्रकार एक ककड़ी अपनी बेल में पक जाने के उपरांत उस बेल-रूपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है. उसी प्रकार हम भी इस संसार-रूपी बेल में पक जाने के उपरांत जन्म-मृत्यु के बंधनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं. आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्यागकर आप ही में लीन हो जाएं और मोक्ष प्राप्त कर लें.

महामृत्युंजय के मंत्रोंच्चारण की विधि (Method Of Chanting Of Mahamrityunjaya)

महामृत्युंजय मंत्र का जाप पूर्व दिशा की ओर मुख करके किसी पवित्र व स्वच्छ स्थान पर किया जाता है. मंत्र का जाप करते समय मांसाहार निषिद्ध है. मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से किया जाता है. मंत्र का जाप करते वक्त शिवलिंग का दूध और जल से अभिषेक किया जाता है. मंत्र के उच्चारण में शुद्धता और संख्या का विशेष ध्यान रखा जाता है. अपनी - अपनी क्षमता के हिसाब से भक्त 108 बार लेकर लाखों बार जाप करते हैं. 

महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति की कथा (Story Of Origin Of Mahamrityunjaya Mantra)

इस मंत्र का उल्लेख ऋग्वेद (मंडल 7, हिम 59) में किया गया है. भगवान शिव के अनन्य भक्त ऋषि मृकण्डु और उनकी पत्नी मरुद्मति की कोई संतान नहीं थी. संतान की कामना के लिए दोनों ने भगवान शिव की तपस्या आरंभ कर दी. लेकिन  ऋषि मृकण्डु के भाग्य में संतान सुख नहीं था. फिर भी भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रभावित होकर उन्हें दो विकल्प दिए. जिसमें पहला विकल्प अल्पायु बुद्धिमान पुत्र का वरदान और दूसरा दीर्घायु मंदबुद्धि पुत्र का वर.तब बहुत सोच विचार के बाद ऋषि मृकण्डु ने पहले विकल्प को चुना और उन्हें मार्कंडेय नाम के पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका जीवन काल मात्र 12 वर्ष का था. पुत्र मार्कंडेय जैसे-जैसे बड़े होने लगे तब उनकी माता को चिंता सताने लगी. तब उनकी मां ने मार्कंडेय उनके अल्पायु होने के बारे में बताया.मार्कंडेय ने भगवान शिव से दीर्घायु का वरदान पाने के लिए कठोर तप करना शुरू कर दिया. कठोर तप  करते ही उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र की रचना की. जैसे ही मार्कंडेय के 12 वर्ष का काल पूरा हुआ उन्हें यमराज लेने के लिए उनके सामने प्रगट हुए. यमराज को देखते ही मार्कंडेय ने शिवलिंग को अपने बाहों में भरकर जोर-जोर से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने लगे. तब यमराज ने उन्हें शिवलिंग से दूरकर उन्हें अपने साथ ले जाने के लिए खींचने लगें. यह सब देख भगवान शिव क्रोधित हो गए.  क्रोध में भगवान शिव ने सजा के तौर पर यमराज दण्ड देते हुए उन्हें मार दिया. बाद में भगवान शिव ने यम को इस शर्त पर पुनर्जीवित किया, कि मार्कंडेय हमेशा के लिए जीवित रहेगा. तब यमराज ने कहा जो भक्त मार्कंडेय द्वारा रचित महामृत्युंजय मंत्र का जाप करेगा उसकी अकाल मृत्यु नहीं होगी. तब से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने व्यक्ति की आयु दीर्घायु होती है. यहीं से इस मंत्र की उत्पत्ति मानी जाती है और कहा जाता है कि इस मंत्र का सवा लाख बार निरंतर जप करने से जीवन की सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं.

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डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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