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राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के डॉ. गोविन्द पारीक का आकस्मिक निधन, आयुर्वेद जगत शोकाकुल

By NirogStreet Desk| posted on :   31-May-2019| NirogStreet News

आयुर्वेद के कई किताबों के लेखक और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर (national institute of ayurveda) में एसोसिएट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत डॉ. गोविन्द पारीक का आकस्मिक निधन हो गया. उनका निधन हृदयगति रूकने की वजह से हुआ. वे महज 42 वर्ष के थे. उनके निधन पर आयुर्वेद जगत में शोक की लहर फैल गयी. डॉ. गोविन्द पारीक का जन्म 23 दिसंबर 1977 को राजस्थान राज्य के निवाई कस्बे में हुआ. प्राथमिक शिक्षा उन्होंने वही से प्राप्त की. उसके बाद आयुर्वेदाचार्य की पढ़ाई राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान , जयपुर से उन्होंने पूरी की. आयुर्वेदाचार्य की पढ़ाई पूरी होते ही उनका चयन राजकीय चिकित्साधिकारी (राजस्थान) के रूप में हो गया था लेकिन उच्च शिक्षा के उद्देश्य से उन्होंने वहां ज्वाइन नहीं किया. उसके बाद गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय की एम.डी. प्रवेश परीक्षा में वे दूसरे स्थान पर रहे. उसी समय उनका चयन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भी हो गया. यहीं से उन्होंने अपनी एम.डी की पढ़ाई प्राप्त की. उसके बाद वे राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान से जुड़ गए और तब से वही कार्यरत थे. आयुर्वेद के छात्रों के बीच 'आयुर्वेद संग्रह' नाम की उनकी किताब बेहद लोकप्रिय है. उसके अलावा उन्होंने आयुर्वेदामृतम, चरक-चक्र चन्द्रिका, सुश्रुत चन्द्रिका जैसी महत्वपूर्ण किताबें भी लिखी.

प्रहलाद दास पारीक उनके निधन की सूचना देते हुए लिखते हैं - dr.govind pareek professor in n.i.a college in medical college jaipur के आकस्मिक वैकुंठ गमन के समाचार से गहन दुखः हुआ. ईश्वर की मर्जी सर्वोपरि है. भगवान से प्रार्थना है वैकुंठवासी आत्मा को श्री चरणसेवा मे स्थान दे व शोकाकुल परिजनों को असीम वज्रपात को सहन करने की क्षमता प्रदान करे.

वही fatemeh moazzami लिखती हैं - dear govind pareek sir you are always alive in your great works, books, sound and your fingerprint on this universe god bless you and be the light of your new journey a huge loss to ayurveda fraternity. sad demise of dr.govind pareek sir,asso.prof.,nia,jaipur. a man with humbleness,excellence and intelligence, a rare combination to find. a man blessed by saraswati left with a huge legacy for students. sir your books and your simplicity will always teach us throughout the life.

सोशल मीडिया पर आयी कुछ और प्रतिक्रियाएं :

-अत्यंत दुखद, हृदय विदारक घटना, सुनकर मन मैं अत्यंत दुख हो रहा है और अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है l मैं bams में आदरणीय गोविंद पारीक जी का जूनियर रहा और उनसे एक छोटे भाई की तरह हमेशा प्यार मिलता रहा l आज वह हमारे बीच में नहीं रहे, हमने आयुर्वेद की एक बड़ी प्रतिष्ठा को हमारे बीच में से खो दिया है, जिसकी पूर्ति होना संभव नहीं है, आप आयुर्वेद के विद्वान थे l मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वह उन्हें अपने चरणों में स्थान दे एवं इस दुख के क्षण में परिवार जनों को दुख भरे सहन करने की क्षमता प्रदान करें l बॉस आप नहीं होकर भी सदैव हमारे बीच में रहेंगे और हमेशा हमें याद आते रहेंगे lll अश्रुपूरित नमन

-आयुर्वेद समाज को अपूरणीय क्षति हुई है।उनकी लिखी पुस्तक आयुर्वेद संग्रह को भारत के प्रत्येक आयुर्वेद स्नातक ने अवश्य ही पढ़ा होगा। हम सदैव उनके ऋणि रहेंगे। उनके बच्चे भी छोटे छोटे ही हैं। वो विश्व आयुर्वेद परिषद के प्रदेश महासचिव भी थे।

-परम श्रद्धेय 'डा.गोविंद पारीक' सर के असमायिक एवं दुःखद निधन से आयुर्वेद जगत में अपूर्णनीय क्षति हुई है। मैं सपरिवार अपनी संवेदनाएं प्रेषित करता हूँ साथ ही ईश्वर से प्रार्थना करुँगा कि उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें...

- डॉ गोविन्द पारीक सर अपने पीछे #आयुर्वेद छात्रों के लिए अपार विरासत छोड़ कर गये हैं ,अपने पुरे जीवन में तपस्यारत रहकर अपने ज्ञान को पुस्तकों के माध्यम से छोड़कर सदा अमर हो गये ,उनके योगदान को आयुर्वेद जगत कभी भूल नहीं पायेगा,ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।

NirogStreet Desk

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