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काढ़ा और इससे जुड़े मिथ

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By Dr Abhishek Gupta | 28-Sep-2020

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काढ़ा पियो इम्युनिटी बढ़ाओ ! आजकल उपरोक्त हैडिंग या इससे मिलती-जुलती हेडिंग्स संभवतः आपको सभी जगह देखने को मिल जाएगी या सुनने को मिल जायेगा की यह कोरोना का अचूक उपचार है या आपकी इम्युनिटी इतनी बढ़ जाएगी की आपको कोई रोग नहीं होगा! इस तरह के किसी भी दावे और किसी भी बात को जानने से पहले आपके लिए यह जानना आवश्यक है कि आयुर्वेद कोई नुस्खा या कोई घरेलु उपचार जैसी पद्धति नहीं है और न ही आयुर्वेद गरम मसाला या किचिन में मिलने वाली चीज़ों तक सीमित है,

आयुर्वेद को इस रूप में प्रस्तुत करने वाले लोग वास्तविकता में आयुर्वेद की 1% भी समझ नहीं रखते हैं! आयुर्वेद एक पूर्ण चिकित्सा विज्ञान है जिसके सिद्धांत प्रकृति पर आधारित हैं व इसमें चिकित्सा के लिए किसी भी दवाई/औषधि का चयन इन्हीं सिद्धांतों के आधार पर रोगी से उसके शरीर व रोग से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करके किया जाता है, अन्यथा बिना सही जाँच के दी जाने वाली औषधि लाभ न करके नुकसान करती है! जैसे इम्युनिटी बढ़ाने वाले काढ़े के रूप में प्रचारित की जा रही दवाओं को आजकल सभी लोग बिना कुछ समझे पीने में लग गए हैं, जबकि पहले तो काढ़ा या कुछ अन्य भी बिना किसी आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श के बिना बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करना चाहिए दूसरा यह काढ़ा दरअसल तासीर में गर्म होता है और इसे तब लेना चाहिए जब बहुत ज्यादा कफ, सर्दी या बुखार बढ़ गया हो!

एक तो काढ़ा गर्म तासीर का होता है दूसरा अभी जो मौसम है वह भी गर्म है और साथ ही साथ ज्यादातर लोगों के शरीर भी गर्म (पित्त) प्रकृति के होते हैं जिससे इसका लाभ तो कोई विशेष मिलता नहीं उल्टा इसकी तासीर गर्म होने के कारण लोगों के नाक से खून आना, पेट में जलन होना, दस्त लग जाना, पेट से जुड़ी कोई अन्य परेशानी का बढ़ जाना, महिलाओं में समय से पहले माहवारी आ जाना या लम्बे समय तक माहवारी आते रहना, लिवर सम्बंधित परेशानी या कई लोगों को बवासीर भी हो सकती है।

काढ़े का सेवन शुरुआती सर्दी, जुकाम या कफ की समस्या में भी नहीं करना चाहिए क्योंकि हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ता है और इस तरह की शुरुआती दिक्कत 2-4 दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है, इस दौरान गुनगुने पानी की भाप, गुनगुने पानी का सेवन व ठंडी चीज़ों व ठंडे मौसम में रहने से बचना चाहिए! इस तरह की परेशानियों में आरम्भिक समय में काढ़ा पीने से कई बार कफ सूख जाता है जिससे सूखी खांसी की समस्या बढ़ सकती है! समझने वाली एक बात और है कि जब हम खाना खाते हैं तो क्या मिर्च या नमक किसी भी मात्रा में लेते हैं?

शायद कोई भी इनका सेवन बहुत थोड़ी ही मात्रा में करता है और यदि ज्यादा मात्रा में इनका सेवन कर ले तो उसे कुछ न कुछ शारीरिक परेशानी होती ही है, इसी तरह जब किसी रोग के उपचार की बात आती है तो उसमें हम क्यों लापरवाह होकर अपने शरीर को प्रयोगशाला समझकर कुछ भी इस्तेमाल कर लेते हैं?

विशेषज्ञ इसलिए ही होते हैं उनसे परामर्श करके ही उपचार करें, और अपने शरीर को स्वयं से प्रयोगशाला न बनायें या सोशल मीडिया पर कुछ भी पढ़कर अति ज्ञानी न बनें और यदि ऐसा कुछ करें तो कम से कम आयुर्वेद को उसके लिए न कोसें क्योंकि आयुर्वेद प्राकृतिक सिद्धांतों पर आधारित एक पूर्ण चिकित्सा विज्ञान है जिसका चिकित्सक बनने के लिए 5.5 वर्ष की BAMS की पढ़ाई और अन्य विशेषज्ञताओं को प्राप्त करने के लिए 3-5 वर्ष (MD/MS/PhD) तक की पढाई और करनी पड़ती है, इसलिए कृपया विषय के विशेषज्ञ के पास ही जाकर अपना उपचार करवायें!

वैसे इम्युनिटी कोई खाने का लड्डू जैसा नहीं है कि कुछ दिन आपने कोई दवा खरीद के सेवन कर ली और आपकी इम्युनिटी जादू की तरह बढ़ गई! इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जब आप नियमित रूप से आसानी से पचने वाले फल, सब्जियों, दालों आदि का सेवन करते हैं व इसके साथ-साथ मन से भी लगातार सकारात्मक चिंतन व प्रसन्न रहना जरुरी है, क्योंकि मानसिक रूप से प्रसन्न रहने पर आपके शरीर में अच्छे हॉर्मोन्स निकलते हैं जो आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने का काम अपने-आप करते हैं, आप सिर्फ 7 दिन एक बेहतर लाइफ स्टाइल व खान-पान को अपनाकर देखें वह आपकी इम्युनिटी को इतना बढ़ा देगा जितना आप महीनों और ट्रक भर-भर के दवाओं को खाने के बाद भी नहीं बढ़ा पायेंगे!

consult with ayurveda doctor.
डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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