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बच्चों को स्वर्णप्राशन देना उतना ही जरुरी है, जितना खाना खिलाना

By NirogStreet Desk| posted on :   03-May-2019| Video

Dr. Reena Sharma Kaushik

वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रीना शर्मा कौशिक स्वर्ण प्राशन को बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं. वे इसके महत्व को रेखांकित करते हुए कहती हैं कि बच्चों को स्वर्ण प्राशन देना उतना ही जरुरी है जितना कि खाना खिलाना. स्वर्ण प्राशन के बारे में बताते हुए वे कहती हैं कि स्वर्ण प्राशन दो शब्दों के मेल स्वर्ण और प्राशन से बना है. स्वर्ण मतलब गोल्ड और प्राशन मतलब खिलाना होता है. शास्त्रों के हिसाब से देखे तो 16 संस्कारों में से एक होता है. ये मुख्यतः रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए होता है. वैसे बच्चों को स्वर्ण प्राशन खिलाने के बहुत सारे फायदे हैं. आचार्य कश्यप के अनुसार यह मेधा (intellect) , बल (strenth), वर्ण (skin), अग्नि (digestion) की वृद्धि करता है. इसे 16 साल तक के बच्चों तक को दिया जा सकता है. अमूमन पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण प्राशन दिया जाता है. वैसे चिकित्सक के परामर्श पर इसे प्रतिदिन भी दिया जा सकता है.

निरोगस्ट्रीट के साथ पूरी बातचीत को आप नीचे दिए गए वीडियो में देख सकते हैं -

डॉ. रीना शर्मा से स्वर्ण प्राशन पर खास बातचीत -

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