logo
Home Blogs NIrog Tips स्वस्थ्य रहना है तो आयुर्वेद के इन पांच नियमों को अपनाएँ

स्वस्थ्य रहना है तो आयुर्वेद के इन पांच नियमों को अपनाएँ

By Dr Abhishek Gupta| posted on :   11-Jan-2020| NIrog Tips

healthy lifestyle ayurvedic tips in hindi (Google Image)

बेहतर क्वालिटी ऑफ़ लाइफ के लिए अपने शरीर की देखभाल स्वयं से करें!

वर्तमान समय में जैसे-जैसे हम सभी विभिन्न भौतिक संसाधनों एवं सुविधाओं जैसे मोबाइल, ए.सी., सोशल मीडिया, घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग आदि चीज़ों के कारण जहाँ एक ओर हमारे जीवन की कई चीज़ें आसान हुई हैं वहीं दूसरी ओर हम धीरे-धीरे प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं व इसके साथ-साथ हमारी शारीरिक गतिविधियां भी लगभग समाप्त होती जा रही हैं। हम सभी बस एक-दूसरे से किसी न किसी चीज़ में आगे निकलने की होड़ में ऐसे व्यस्त हैं कि अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को जैसे भूल ही गए हैं। आजकल एक अलग तरह का चलन जोरों पर है कि जब भी हम थोड़े से बीमार होते हैं तो सीधे बड़े से बड़े स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास पहुंच कर ढ़ेरों ब्लड टेस्ट करवा डालते हैं जिसमें कुछ न कुछ बढ़ा या घटा निकल आता है बस इसके बाद एक और विशेष चीज़ हमारे जीवन का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है, वो है सुन्दर-सुन्दर पैकिंग में उपलब्ध दवाइयां! जबकि हम यह भली-भातिं जानते हैं कि इन दवाओं के विभिन्न तरह के साइड इफेक्ट्स भी होते हैं लेकिन चूँकि हम यह मान के बैठ चुके हैं कि यही हमारा जीवन है व इसके अतरिक्त हम कुछ अन्य न तो सोचना चाहते है और न हमारी व्यस्त और भाग-दौड़ भरी जिंदंगी में कुछ समय अपने लिए निकाल पाते हैं! लेकिन यदि हम सभी चाहें तो यह बेहद कठिन सा दिखने वाला कार्य वास्तविकता में सहजता से नियमित रूप से किया जाना संभव है। आइये समझते हैं कैसे! आयुर्वेद में स्वस्थ शरीर व बेहतर जीवन के तीन मुख्य स्तम्भ बताये गए हैं:  1. आहार 2. निद्रा और 3. ब्रह्मचर्य। इसका अर्थ यह है कि हमारे जीवन में जितना महत्त्वपूर्ण आहार है उतना ही हमारा सही ढ़ंग से नींद लेना और उतना ही महत्त्वपूर्ण है सही ढ़ंग से अपने जीवन के नियमित कार्यों को व्यवस्थित होकर चलाना अर्थात ब्रह्मचर्य।

आहार, निद्रा और ब्रह्मचर्य में छिपा है स्वस्थ्य जीवन का रहस्य 

1- आहार से स्वास्थ्य रक्षण

हम जब कोई आहार लें तो उसके समय का विशेष ध्यान रखें, ज्यादातर बार हम अपने काम में व्यस्त होने के कारण दिन का भोजन हल्का और रात्रि में भर पेट भोजन करते हैं, इसके कई नुकसान होते हैं जैसे रात में भोजन के बाद ज्यादातर हम तुरंत सो जाते हैं जिसके कारण एक तो भोजन सही से नहीं पचता और दूसरा शरीर में गति न होने के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म अनियंत्रित हो जाता है जिसके कारण मोटापा, शुगर, थाइरोइड, अनियंत्रित कोलेस्ट्रॉल आदि जैसे बेहद गंभीर रोग शरीर में होने कि सम्भावना बढ़ जाती है, वही इसके दूसरी ओर यदि हम दिन में भरपेट भोजन करते हैं तो सारे दिन सही से गतिविधि करने से दिन का भोजन अच्छे से पच जाता है जिससे हमारा शरीर बेवजह के गंभीर रोगों से बच जाता है। 

2- शाम की बजाए सुबह में व्यायाम 

आपने पहले के समय के लोगों से सुना भी होगा कि सूर्यास्त से पहले का भोजन शरीर के हितकर होता है। ठीक इसी तरह से एक चलन आजकल और बेहद आम है कि रात्रि में खाना खाने के बाद टहलना या जिम जाना, जो कि शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह होता है क्योंकि सारे दिन काम करके शारीरिक व मानसिक रूप से हम थक जाते हैं, और शाम को टहलकर हम शरीर को और अधिक थका देते हैं! जबकि इसके विपरीत सुबह जब हम सोकर उठते हैं तो शरीर के सभी अंग रिलैक्स होते हैं व खाली पेट जब हम कोई शारीरिक गतिविधि करते हैं तो उसका लाभ भी हमें बेहद अच्छा मिलता है, हाँ एक बार थोड़ा सा हिम्मत करके इस रूटीन को बनाना पड़ता है। इसी तरह हम अपने दिन के बाकि हिस्से को भी सही से नियंत्रित करके बहुत से रोगों से बचाव कर सकते हैं।

3-हाथ-पैरों की मालिश 

शाम को सोने से पहले हाथ-पैरों को धोकर गुनगुने पानी में पैर डालकर 5 मिनट बैठकर व उसके बाद तलवों पर हल्के हाथ से सरसों या तिल के तेल मालिश करके यदि हम सोते हैं तो हमें नींद भी बेहद अच्छी आती है व सुबह सोकर उठने के समय हम तरोताजा महसूस करते हैं।

4-देर रात मोबाईल और टेलीविजन से दूरी 

ऐसे ही मन को हल्का करने के लिए अनावश्यक के विचारों व मोबाइल, सोशल मीडिया या देर रात तक टेलीविजन आदि देखने से हमें बचना चाहिए, इन सभी चीज़ों के अधिक प्रयोग से हम अनजाने में अधिक रेडिएशन में बने रहते है जिसका सबसे बड़ा प्रभाव हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। इससे बचने का अच्छा तरीका है कि रात्रि 9-10 के बाद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग से बचें। सोने से पहले आँखों में ताजे पानी के छीटें या आँखों के लिए आयुर्वेदिक आई ड्राप का प्रयोग करें। 

5-तनाव से बचने के लिए आयुर्वेदिक थेरेपी और यात्रा 

अत्यधिक तनाव होने पर शिरोधारा विधि को करवायें! प्रत्येक 6 माह में किसी प्राकृतिक स्थान की सपरिवार यात्रा करें!

दवाओं से बचे, क्वालिटी ऑफ़ लाइफ जियें

जीवन एक बार मिलता है, इसलिए बेहतर है कि अपने नियमित रूटीन में छोटे से परिवर्तन करके बेहतर क्वालिटी ऑफ़ लाइफ जियें, ऐसा आप नहीं भी करेंगे तब भी जीवित रहेंगे लेकिन कई तरह की दवाओं पर निर्भरता व ख़राब क्वालिटी की लाइफ के साथ, चयन आपका है कि आप कैसा जीवन जीना पसंद करना चाहते हैं! किसी भी तरह की शारीरिक असुविधा लगातार होने पर अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें!