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लीवर को स्वस्थ रखना है तो आयुर्वेद को अपनाएँ : WORLD LIVER DAY

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By Ram N Kumar | 19-Apr-2019

-राम एन. कुमार, फाउंडर और सीईओ, निरोगस्ट्रीट

वर्ल्ड लीवर डे पर विशेष : लीवर (यकृत) शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। इसे शरीर का इंजिन कहे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। हम लोग जो भी खाते-पीते है उसे अच्छी तरह से पचाने में लीवर का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है। लेकिन भागदौड़ की जिंदगी में हम अक्सर इसे नज़रअंदाज कर देते हैं जबकि यह हमारी पाचन, चयापचय और जरुरी एंजाइम्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह रक्त को शुद्ध करता है और विषैले पदार्थों को रक्त में प्रवेश करने से रोकता है। कार्बोहाइड्रेट्स को लिवर ग्लाइकोजन के रूप में शरीर में जमा करके रखता है और आवश्यकता पड़ने पर इसे ग्लूकोज के रूप में छोड़ता है। लिवर शरीर में नुकसान करने वाले पदार्थों को निष्क्रिय करता है और प्रोटीन बनाता है जिस से हम रक्तस्त्राव और इंफेक्शन से बचे रहते है। इसके अलावा लीवर विटामिन बी12, ग्लूकोज और आयरन आदि को जमा करने का भी काम करता है। यदि हमारा लीवर यह काम किसी कारणवश नहीं कर पाता है तो इसका प्रतिकूल असर हमारे शरीर पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में त्वचा का फटना, मुंहासा, सूखापन और जलन की समस्या हो सकती है।

स्पष्ट है कि लीवर का स्वस्थ रहना हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। इसलिए इसकी देख-रेख बेहद जरुरी है क्योंकि इसके संक्रमित होने का खतरा हमेशा रहता है। इसके लिए जरुरी है कि हम अपने लीवर को नियमित रूप से डिटॉक्स करे ताकि वह अच्छी तरह से काम करे। यदि लीवर संक्रमित हो जाए या उसमें टॉक्सिंस जमा हो जाए तो एलर्जी, थकान, कोलेस्ट्रॉल व पाचन से संबंधित समस्याएं पैदा हो सकती है। यदि समय पर इसका सही उपचार न हो तो हमारा लीवर गंभीर बीमारियों का भी शिकार हो सकता है। एलोपैथी दवाइयों में इसका स्थाई समाधान मौजूद नहीं है। लेकिन आयुर्वेद के जरिए लीवर को स्वस्थ रखा जा सकता है बस उसके द्वारा बताए खान-पान और लीवर के देखभाल के तौर-तरीकों को अपनाना पड़ता है।

आयुर्वेद में बीमारियों के उपचार से ज्यादा इस बात पर जोर रहता है कि बीमारियाँ हो ही नहीं. उसका सिद्धांत ही है कि उपचार से बेहतर बीमारियों की रोकथाम के उपाय करना है. इसलिए वह स्वस्थ्य लीवर के लिए अच्छी जीवन शैली और संतुलित आहार पर जोर देता है जिसमें फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद, अनाज प्रोटीन और वसा भी शामिल हो. अपने खान-पान में महज कुछ बदलाव करके ही हम अपने लीवर को किसी भी तरह के संक्रमण से बचा सकते हैं. आयुर्वेद में ऐसे खाद्य पदार्थों का विस्तृत वर्णन है जिसे अपने खान-पान में शामिल कर हम अपने लीवर को प्राकृतिक रूप से निरोग रख सकते हैं. आइये जानते ही ऐसे कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में जिसके नियमित सेवन से लीवर की सफाई प्राकृतिक तरीके से संभव है.

1. लहसुन - लहसुन लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों या टॉक्सिंस को हटाने में मदद करता है. वह उन एंजाइम को सक्रिय करता है जो टॉक्सिंस को हटाते हैं. इसके अलावा इसमें एलिसिन का उच्च स्तर होता है जिसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटीबायोटिक और एंटिफंगल गुण होते हैं. इसके अलावा इसमें सेलेनियम भी होता है जो एंटीऑक्सिडेंट की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाता है. ये लीवर को साफ करने में सहायता करते हैं।

2. गाजर - गाजर में मौजूद विटामिन ए लिवर की बीमारी को रोकता है। इसका जूस लीवर की गर्मी और सूजन को भी कम करता है. लीवर सिरोसिस में पालक व गाजर का मिश्रित रस फायदेमंद साबित होता है. गाजर में इनप्लांट-फ्लेवोनोइड्स और बीटा-कैरोटीन नामक तत्व भी पाए जाते हैं जो लीवर के सुचारू संचालन में सहयोग करते हैं.

3. सेब - सेब को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए ही अच्छा माना जाता है. कहावत ही है कि रोजाना एक सेब का सेवन हमें तमाम बीमारियों से दूर रख सकता है. लीवर के लिए भी यह बेहद फायदेमंद है. सेब में 'पेक्टिन' मौजूद होता है जो शरीर को शुद्ध करने और पाचन तंत्र से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

4. अखरोट- अखरोट में एमिनो एसिड पाया जाता है जो प्राकृतिक रूप से लीवर को डिटॉक्स करता है. इसलिए इसका सेवन करना चाहिए.

5. ग्रीन टी- ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट लीवर के कार्य को बेहतर बनाता है. इसलिए दूध की चाय की बजाए ग्रीन टी पीने की आदत आज से ही डालें.

6. पत्तेदार सब्जियां - हरी पत्तेदार सब्जियां रक्त में मौजूद विषाक्त पदार्थों को चूसती है. इसके अलावा वे शरीर भारी धातुओं के असर को कम करके लीवर की एक तरह से रक्षा करती है. इसलिए जितना हो सके हरी पत्तेदार सब्जियां रोज खाएं. इससे आपकी किडनी की हरियाली हमेशा कायम रहेगी.

7. खट्टे फल- विटामिन- सी से भरपूर संतरा, नींबू आदि खट्टे फल लीवर की सफाई करने की क्षमता को बढ़ाते हैं जिससे यह एंजाइम का उत्पादन करता है

8. हल्दी- इसके गुण किसी से छुपे नहीं है. लीवर के लिए भी यह किसी चमत्कार से कम नहीं है जो हमारे लीवर में होने वाले रेडिकल डैमेज की मात्रा को कम करता है। हल्दी वसा के पाचन में मदद करती है और पित्त का निर्माण करती है, जो हमारे लिवर के लिए प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर का काम करता है

9. चुकंदर - विटामिन सी का एक अच्छा स्रोत है, यह पित्त को बढ़ाता है और एंजाइमी गतिविधि को बढ़ावा देता है.

आयुर्वेद में वर्णित इन खाद्य पदार्थों को अपने नियमित भोजन में शामिल कर हम अपने लीवर को लंबे समय तक निरोग रख सकते हैं. इसके अलावा मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करना भी लीवर के लिए फायदेमंद साबित होता है.

ram n.kumar(लेखक आयुर्वेद के लिए समर्पित संस्था 'निरोगस्ट्रीट' के संस्थापक और मुख्य प्रबंधक अधिकारी हैं। इनसे [email protected] के जरिये संपर्क किया जा सकता है। उनका यह लेख मूलतः फायनेंसियल एक्सप्रेस में अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ था जिसे हिन्दी में अनुवाद कर हम साभार यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं। फायनेंसियल एक्सप्रेस के लेख का लिंक - फायनेंसियल एक्सप्रेस वेबलिंक )

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डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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