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हृदय रोग में भी लाभकारी है मुलेठी

By NirogStreet Desk| posted on :   29-Dec-2018| Herbs and Fruits

कई रोगों में लाभकारी है मुलेठी

स्वाद में मीठी मुलेठी में कैल्शियम, ग्लिसराइजिक एसिड, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटीबायोटिक, प्रोटीन और वसा पायी जाती है. यह कई रोगों में लाभकारी सिद्ध होती है. इसके इस्तेमाल से नेत्र रोग, मुख रोग, कंठ रोग, उदर रोग, सांस विकार, हृदय रोग, आदि में फायदा होता है. ये वात, पित्त और कफ त्रिदोषों को शांत करके कई रोगों के उपचार में रामबाण का काम करती है. भारतीय जड़ी बूटियों तथा वृक्षों के चमत्कार किताब में मुलेठी के बारे में लिखा गया है - "मुलैठी शीतल है, मधुर है , नेत्रों को हित करने वाली है , बल को बढाती है, वर्ण को सुंदर बनाती है , वीर्य शुद्ध और साफ़ उपजाती है, केशों को काले घुँघर बनाती है, स्वर को कोयल के समान सुरीला और धन के समान भारी बनाती है, पित्त दोष, वायुदोष और रक्त दोषों को दूर करती है , घाव को भरती है, विष और सूजन को पचाती है. मुलेठी गाढे खून को पतला और शुद्ध करती है, छाती और गले को कोमल करती है, छाती की बीमारियों श्वास और खांसी आदि में अत्यंत गुणकारी है.

रोग और मुलेठी द्वारा उपचार -

आखों के लिए फायदेमंद - मुलेठी के क्वाथ से नेत्रों को धोने से नेत्रों के रोग दूर होते हैं। मुलेठी की मूल चूर्ण में बरबर मात्रा में सौंफ का चूर्ण मिलाकर एक चम्मच प्रात: सायं खाने से आंखों की जलन मिटती है तथा नेत्र ज्योति बढ़ती है। मुलेठी को पानी में पीसकर उसमें रूई का फाहा भिगोकर नेत्रों पर बांधने से नेत्रों की लालिमा मिटती है।

कान और नाक रोग में फायदेमंद - मुलेठी कान और नाक के रोग में भी लाभकारी है। मुलेठी और द्राक्षा से पकाए हुए दूध को कान में डालने से कर्ण रोग में लाभ होता है। 3-3 ग्राम मुलेठी तथा शुंडी में छह छोटी इलायची तथा 25 ग्राम मिश्री मिलाकर, क्वाथ बनाकर 1-2 बूंद नाक में डालने से नासा रोगों का शमन होता है।

मुंह संबंधी रोग - मुंह के छाले मुलेठी मूल के टुकड़े में शहद लगाकर चूसते रहने से लाभ होता है। मुलेठी को चूसने से खांसी और कंठ रोग भी दूर होता है। सूखी खांसी में कफ पैदा करने के लिए इसकी 1 चम्मच मात्रा को मधु के साथ दिन में 3 बार चटाना चाहिए। इसका 20-25 मिली क्वाथ प्रात: सायं पीने से श्वास नलिका साफ हो जाती है। मुलेठी को चूसने से हिचकी दूर होती है।

ह्रदय रोग में लाभकारी - मुलेठी हृदय रोग में भी लाभकारी है। 3-5 ग्राम तथा कुटकी चूर्ण को मिलाकर 15-20 ग्राम मिश्री युक्त जल के साथ प्रतिदिन नियमित रूप से सेवन करने से हृदय रोगों में लाभ होता है।

पेट के रोग में फायदेमंद - इसके सेवन से पेट के रोग में भी आराम मिलता है। मुलेठी का क्वाथ बनाकर 10-15 मिली मात्रा में पीने से उदरशूल मिटता है।

त्वचारोग में फायदेमंद - त्वचा रोग भी यह लाभकारी है। पफोड़ों पर मुलेठी का लेप लगाने से वे जल्दी पककर फूट जाते हैं। मुलेठी और तिल को पीसकर उससे घृत मिलाकर घाव पर लेप करने से घाव भर जाता है।

यादाश्त में सुधार : मुलेठी यादाश्त बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती. इसका एंटीऑक्सीडेंट गुण मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव डालती है और भूलने की बीमारी के प्रभावों को घटाती है.

एंटी-अल्सर : एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेटिंग गुण के कारण पेट, आंत और मुंह के अल्सर के इलाज के लिए सबसे अच्छी प्राकृतिक औषधीय है।

वायरस से सुरक्षा - मुलेठी की जड़ें वायरस, बैक्टीरिया और कवक से सुरक्षा प्रदान करती है.

गठिया रोग में फायदेमंद - गठिया रोग में भी यह फायदेमंद सिद्ध होता है.

हार्मोनल संतुलन - मुलेठी की जड़ों में उपस्थित फाइटोस्ट्रोजेनिक यौगिक महिलाओं के हार्मोनल असंतुलन संबंधी समस्याओं और रजोनिवृत्ति के लक्षण के खिलाफ उपयोगी होता है.

शारीरिक थकान मिटाने में प्रभावी - मुलेठी का एक और लाभ भी है और वह यह कि मुलेठी शारीरिक थकान मिटाती है. यदि किसी को निरंतर थकान जैसी तकलीफ हो तो उसे अपने पास मुलेठी रखनी चाहिए। जब याद आए उसे निकाल कर चूस लें, थकान जैसी यह तकलीफ कुछ ही दिनों में छूमंतर हो जाएगी.

नोट - मुलेठी को छीलकर इसके ऊपर का छिलका निकाल देना चाहिए, क्योंकि वह अत्यंत हानिकारक है.

( कृपया आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लेकर ही किसी भी औषधि या दवा का सेवन करे.)

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