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आयुर्वेद के अनुसार शहद के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ayurveda ke Anusar shahad ke Fayde aur Nuksan in Hindi

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By NS Desk | 18-Mar-2021

shahad ke Fayde aur Nuksan

शहद का परिचय -  Introduction of Honey in Hindi

शहद संसार के सर्वाधिक पौष्टिक पदार्थों में से एक है और आयुर्वेद में यह अपने उत्कृष्ट मिठास के लिए के लिए जाना जाता है। शहद में स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने वाले अनेक गुण मौजूद पाए जाते हैं और आप अपनी सूखी या बलगम वाली खांसी के उपचार के लिए शहद में अदरक का रस व काली मिर्च मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं। शहद आपके पाचन तंत्र को सुधार सकता है और शारीरिक वज़न को कम करने में मदद भी कर सकता है। आप पाचन क्रिया में सुधार लाने तथा वज़न को कम करने के लिए इसका सेवन गुनगुने पानी में मिलाकर कर कर सकते हैं। शहद सफेद चीनी का सबसे अच्छा विकल्प है और यह डायबिटिज या मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। शहद में एंटीबैक्टीरियल तथा एंटीऑक्सीडेंट तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद पाए जाते हैं जो सूजन या घाव भरने में मदद करते हैं। फिर भी शहद का अत्यधिक सेवन दस्त का कारण बन सकता है। गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कभी भी अपरिष्कृत या असंसाधित शहद का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह हानिकारक सिद्ध हो सकता है।

शहद के प्रमुख गुण - Key Properties of Honey in Hindi

शहद के कुछ ऐसे प्रमुख गुण जिनके कारण इसे औषधि के रूप में विभिन्न रोगों के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है, इस प्रकार हैं-
• इसके एंटीऑक्सीडेंट 
• एंटीबैक्टीरियल व
• एंटीफंग्ल गुण 
• इसकी उष्ण 
• कफदोष नाशक
• वातदोष नाशक व
• रासायनिक प्रकृति 
शहद में मौजूद इसके ये विविध प्रकार के गुण अनेक तरह के रोगों के इलाज में सहायता करते हैं।
यह भी पढ़े► आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ayurveda ke Anusar Shilajit ke Fayde aur Nuksan in Hindi

शहद के ऐतिहासिक उपयोग - Historical Use of Honey in Hindi

शहद प्राचीन काल से ही अपने औषधीय गुणों के कारण विभिन्न प्रकार के रोगों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता रहा है। अतीत में इसका उपयोग खास तौर पर घावों तथा जलने के इलाज के लिए किया जाता था। शहद के कुछ अन्य उपयोग इस प्रकार हैं-
• यह खांसी-जुकाम के इलाज में मदद करता है।
• यह रक्त शर्करा का स्तर कम कर सकता है।
• यह दस्त या डायरिया का उपचार करने में सक्षम है।
• यह शरीर में उच्च कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है।
• पुरुषों एवं महिलाओं में जनन क्षमता की वृद्धि में सहायता करता है।
• हेय फीवर या परागज ज्वर के उपचार में मदद करता है।
• घाव या जलने के इलाज में काम आता है।

अतः ये स्वास्थ्य संबंधी कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिनका शहद के इस्तेमाल से इलाज किया जा सकता था अथवा किया जा सकता है। अतः कह सकते हैं कि लोग शहद के औषधीय गुणों को प्राचीन काल में भी पहचानते थे और इसके प्रयोग से विभिन्न रोगों का इलाज भी करते थे।

आयुर्वेद उपचार में शहद के उपयोग - Uses of Honey in Ayurveda Treatment in Hindi

शहद एक ऐसा पौष्टिक मकरंद होता है जो व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य को चुस्त-दुरुस्त करने में सक्षम होता है। आयुर्वेद में इसका प्रयोग निम्न रोगों में लाभ पहुंचाने में मदद करता है।

1. खांसी के उपचार में सहायक 
विज्ञान-
वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक शहद अपनी म्युकोलिटिक (श्लेष्मा अपघट्य) प्रकृति के कारण श्लेष्मा के गाढ़ेपन को अपघटित या कम करके छाती के संकुलन या उसकी रुकावट में राहत प्रदान करता है। इसीलिए खांसी-जुकाम के इलाज के लिए शहद का सेवन उपयुक्त रहता है।

आयुर्वेद- आयुर्वेद के मुताबिक़ शहद शरीर में कफ की गड़बड़ी का निराकरण करने में सक्षम होता है और इसी कारण छाती के संकुलन या उसकी रुकावट में राहत पहुंचाता है। इस तरह कह सकते हैं कि शहद शरीर में व्याप्त कफ दोष को ठीक करके खांसी में आराम पहुंचाता है।

खांसी के उपचार हेतु शहद के सेवन का तरीका 
अगर आप खांसी का इलाज करना चाहते हैं तो शहद का निम्न प्रकार से सेवन करना चाहिए।
क. किसी कटोरे में एक चम्मच शहद लें।
ख. अब इसमें 2-3 बूंदें अदरक के ताजा रस की डालें और अच्छी तरह से मिला लें।
ग. दिन में दो बार इसका सेवन करने से खांसी तथा छाती की रुकावट में पूरा आराम प्राप्त मिलेगा।

2. डायबिटिज या मधुमेह के रोगियों के लिए लाभप्रद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेद के अनुसार शहद में दीपन तथा पाचन संबंधी गुण मौजूद पाए जाते हैं जो रक्त शर्करा के लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह उपापचय में सुधार भी लाता है। अतः इस तरह यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करके मधुमेह में आराम देता है।

डायबिटिज या मधुमेह के रोग में शहद के सेवन का तरीका 
डायबिटिज या मधुमेह के रोगियों को शहद का निम्न प्रकार से सेवन करना चाहिए।
क. शहद में प्राकृतिक मिठास होता है और इसीलिए इसे चीनी की जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके सेवन से रक्त शर्करा का लेवल नहीं बढ़ता है।
ख. यदि आप डायबिटिज की दवाइयों का सेवन कर रहे हैं तथा साथ में शहद का सेवन भी करना चाहते हैं तो चिकित्सक का परामर्श अनिवार्य रूप से लेना चाहिए।

3. उच्च कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद 
विज्ञान-
वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक शहद में एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं तथा इसी वजह से यह शरीर में रक्त शर्करा के लेवल को कम करने में मदद करता है।इसके अलावा इसमें मौजूद पालिफेनोल शरीर में बुरे या हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और अच्छे या लाभप्रद कोलेस्ट्रॉल के लेवल में वृद्धि करता है। अतः शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करने के लिए शहद का सेवन फायदेमंद होता है।

आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शहद का दीपन एवं पाचन संबंधी गुण शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करता है और उपापचय में सुधार लाता है। अतः शहद उपापचय में सुधार दर्ज कर शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद करता है।

शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने के लिए शहद के सेवन का तरीका 
यदि आप अपने शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने के लिए शहद का सेवन करना चाहते हैं तो निम्न विधि का पालन कीजिए।
क. किसी कटोरे में दो चम्मच शहद लें।
ख. अब इसमें 3 चम्मच दालचीनी का पाउडर डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इस मिश्रण का दिन में दो बार 1-1 चम्मच खाना खाने के बाद सेवन करें।
घ. अगर आप इस प्रयोग को 1-2 महीने तक नियमित रूप से करेंगे तो निश्चय ही लाभ प्राप्त होगा।

4. डायरिया या दस्त के उपचार में मदद 
शहद में एंटीबैक्टीरियल या जीवाणुरोधी तत्व उपस्थित पाए जाते हैं और इसी कारण यह डायरिया के इलाज में कारगर सिद्ध होता है। वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक शहद जीवाणुओं की वृद्धि तथा उनकी गतिविधि को नियंत्रित करता है तथा परिणामस्वरूप डायरिया या दस्त से राहत मिलती है। अतः डायरिया के उपचार के लिए शहद का सेवन लाभप्रद सिद्ध होता है।

डायरिया के उपचार के लिए शहद के सेवन की विधि 
डायरिया अर्थात् दस्त के उपचार हेतु शहद का निम्न प्रकार से सेवन करना चाहिए।
क. किसी कटोरे में एक चम्मच शहद लें।
ख. अब इस कटोरे में एक चम्मच दही डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इसका दिनभर में दो बार सेवन करने से डायरिया में आराम मिलेगा।

5. फुट या पैर की अल्सर में लाभ 
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शहद का रसायन संबंधी गुण फुट अल्सर के उपचार में सहायक सिद्ध होता है।

6. जनन क्षमता में लाभप्रद 
शहद में ऐसे गुण मौजूद पाए जाते हैं जो स्त्री व पुरुष दोनों की जनन क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। अतः इस उद्देश्य से भी शहद का सेवन किया जा सकता है।

जनन क्षमता को बढ़ाने के लिए शहद के सेवन का तरीका 
जनन क्षमता को बढ़ाने के लिए आप 1-2 चम्मच शहद को एक गिलास दूध में मिलाकर ले सकते हैं। आपको इसका सेवन रात के समय  नियमित रूप से करना चाहिए। 

7. हेय फीवर( परागज ज्वर) के उपचार में मदद 
शहद का इम्युनोथैरिपी प्रकिया यानी प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने वाली चिकित्सा के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है तथा इसमें पराग की उपस्थित के कारण हेय या परागज ज्वर के उपचार में मदद मिलती है। यह शरीर में पराग कणों के प्रति रोधकता पैदा करता है। अतः इसके नियमित सेवन से हेय फीवर या परागज ज्वर ठीक हो जाता है।

हेय फीवर या परागज ज्वर के उपचार के लिए शहद के सेवन का तरीका 
यदि आप हेय फीवर या परागज ज्वर से पीड़ित हैं तो आपको शहद के उपभोग का निम्न तरीका अपनाना चाहिए।
क. 2 से 3 चम्मच शहद लें।
ख. आप विकल्प के तौर पर इसमें गुनगुना पानी भी मिला सकते हैं या फिर इसका सेवन चाय में भी कर सकते हैं।
ग. सही असर पाने के लिए इसका दिन में दो बार सेवन करना उचित रहता है।

8. जलने के उपचार में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शहद शरीर में कफ व पित्त दोष का निराकरण कर जले हुए के उपचार में मदद करता है। इसके अतिरिक्त यह अपनी शीत प्रकृति के कारण प्रभावित भाग पर शीतलता का एहसास भी कराता है।

जले हुए के उपचार हेतु शहद के उपयोग का तरीका 
यदि आप जले हुए का उपचार करने के लिए शहद का उपयोग करना चाहते हैं तो निम्न विधि को अपनाइए।
क. शहद को जले हुए भाग पर लगाएं तथा इसे बिलकुल भी रगड़ना नहीं है।
ख. शरीर के प्रभावित भाग पर 1-2 घंटे तक लगा रहने दें।
ग. उसके उपरांत शहद को ठंडे पानी से धो दें।

9. सनबर्न या आतपदाह के उपचार में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शहद की तासीर ठंडी या शीतल होती है और यह आतपदाह से ग्रस्त त्वचा को शीतलता प्रदान करता है।

सनबर्न या आतपदाह के उपचार में शहद के उपयोग का तरीका 
सनबर्न या आतपदाह के उपचार के लिए शहद का निम्न प्रकार से उपयोग करना चाहिए।
क. एक कटोरी में आवश्यकतानुसार कुछ शहद लें।
ख. अब इसमें एक या दो चम्मच एलवेरा का जेल डालकर अच्छी तरह से मिला लें ।
ग. अब इस मिश्रण को शरीर के प्रभावित भाग पर अच्छी तरह से लगा लें और 1-2 घंटे तक लगा रहने दें।
घ. उसके उपरांत ठंडे पानी से धो लें 
ङ. प्रभावित भाग पर पूरा आराम मिलने तक यह प्रक्रिया कई बार दोहराएं।

10. त्वचा के पुनरुद्धार या संपोषण में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेद के अध्ययन के मुताबिक शहद की कसाय प्रकृति त्वचा के पुनरुद्धार या संपोषण में मदद करती है। अतः आप शहद का उपयोग अपनी त्वचा के उपचार के लिए भी कर सकते हैं।

11. बवासीर के इलाज में मदद 
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शहद की शीत या उपचारात्मक प्रकृति बवासीर के इलाज में मदद करती है। इसका शरीर पर शीतल प्रभाव पड़ता है और इसी कारण यह दर्द में आराम मिलता है।

बवासीर के इलाज के लिए शहद के उपयोग का तरीका 
बवासीर के इलाज में शहद का उपयोग निम्न विधि से करना चाहिए।
क. किसी कटोरे में एक चम्मच शहद लें और उसमें जैतून का तेल व मधुमक्खी के छत्ते से प्राप्त मोम डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ख. अब इस मिश्रण को शरीर के प्रभावित भाग पर लगाएं। इसके लगाने से दर्द में आराम मिलेगा।

12. मसूड़ों की सूजन के उपचार में मदद 
मुंह में जीवाणुओं की वृद्धि होने से मसूड़ों में सूजन आ जाती है। जीवाणु प्लाक के रूप में उत्पन्न होकर मसूडों के शोथ या सूजन का कारण बनते हैं। शहद में एंटीबैक्टीरियल या जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं जो जीवाणुओं की वृद्धि को नियंत्रित करके प्लाक का बनना रोकते हैं। इसके अलावा इसके एंटीइनफ्लेमेट्री गुण मसूड़ों की सूजन में आराम देते हैं।

मसूड़ों की सूजन के उपचार हेतु शहद के उपयोग का तरीका 
यदि आप मसूड़ों की सूजन से परेशान हैं और शहद की मदद से उसका उपचार करना चाहते हैं तो शहद का निम्न प्रकार से उपयोग कीजिए।
क. एक गिलास गरम पानी में एक चम्मच शहद डालें।
ख. अब शहद को इस गरम पानी में अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इस मिश्रण से दिन में दो बार गरारे करें।
घ. इसके गरारे करने से मसूड़ों की सूजन से आराम मिलेगा।

13. ओष्ठ हर्पीज के उपचार में मदद 
शहद में एंटीवायरल तत्व मौजूद पाए जाते हैं जो ओष्ठ हर्पीज नामक रोग के उपचार में मदद करते हैं। यह मुंह के छालों की स्थिति में हर्पीज विषाणुओं की गतिविध को नियंत्रित करता है। इसके अलावा इसके एंटीइनफ्लेमेट्री तत्व दर्द और सूजन में आराम देते हैं।

ओष्ठ हर्पीज के उपचार हेतु शहद के उपयोग का तरीका 
यदि आप मुंह के छालों से परेशान हैं और शहद की मदद से उपचार करना चाहते हैं तो उसका निम्न प्रकार से उपयोग कीजिए।
क. किसी कटोरे में एक चम्मच शहद लें।
ख. अब उसमें एक चम्मच हल्दी डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. अब इस पेस्ट को होठों पर लगाएं। दिन में दो बार लगाने से आराम मिल जाएगा।
यह भी पढ़े► आयुर्वेद के अनुसार दालचीनी के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ayurveda ke Anusar Dalchini ke Fayde aur Nuksan in Hindi

चिकित्सक द्वारा निर्देशित शहद के उपयोग की उचित मात्रा - Appropriate Dose of Honey as Directed by Doctor in Hindi

चिकित्सक द्वारा निर्देशित शहद के उपयोग की उचित मात्रा इस प्रकार है।
हनी (शहद) जेल- आपको एक से चार चम्मच या फिर अपनी आवश्यकतानुसार हनी जेल का इस्तेमाल करना चाहिए।

आयुर्वेदिक उपचार में शहद के उपयोग - Uses of Honey in Ayurvedic Treatment in Hindi

शहद का आयुर्वेदिक उपचार में  उपयोग किया जाता है। आइए जानें कि आप इसका रोगों के उपचार के तौर पर कैसे प्रयोग कर सकते हैं।

1. दूध के साथ शहद
आप शहद को दूध में मिलाकर निम्न प्रकार से ले सकते हैं- 
क. एक गिलास गरम दूध लें।
ख. अब इसमें 1-2 चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से अच्छी तरह से मिला लें।
ग. आप अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए इसे रात को सोने से पूर्व पी सकते हैं।

2. शहद का गुनगुने पानी में सेवन
आप शहद का गुनगुने पानी में निम्न प्रकार से सेवन कर सकते हैं।
क. एक गिलास गुनगुना पानी लें।
ख. अब इसमें एक या दो चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इसे आपको खाली पेट पीना चाहिए। इसके सेवन से पाचन तंत्र में अच्छा सुधार देखने को मिलेगा।

3. शहद का अदरक के साथ सेवन
आप शहद का अदरक के रस में निम्न प्रकार से सेवन कर सकते हैं।
क. एक चम्मच अदरक का रस लीजिए।
ख. अब इस रस में एक या दो चम्मच शहद की डालिए।
ग. आप खांसी तथा मुंह के छालों के उपचार के लिए इसका सुबह तथा रात को सोने से पूर्व सेवन कर सकते हैं।

4. नींबू पानी में शहद का सेवन 
शहद का नींबू और पानी के साथ सेवन करने के लिए निम्न तरीका अपनाइए।
क. एक गिलास गुनगुना पानी लेकर उसमें आधा नींबू निचोड़ लें।
ख. अब इसमें एक या दो चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. आपको इसे सुबह खाली पेट पीना चाहिए। इसके सेवन से शरीर के उपापचय में सुधार आएगा और कोलेस्ट्रॉल का लेवन तथा वज़न नियंत्रित होगा।

5. शहद का फेस पैक के रूप में प्रयोग 
आप अपनी शुष्क त्वचा के इलाज के लिए शहद का फेस पैक भी तैयार कर सकते हैं। इसके लिए आपको निम्न विधि का पालन करना चाहिए।
क. किसी कटोरे में एक या दो चम्मच शहद लें।
ख. अब इसमें एक या दो चम्मच दूध डालकर बढ़िया पेस्ट तैयार कर लें।
ग. इस पेस्ट का इस्तेमाल अपनी त्वचा पर करें तथा 10-15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर पानी से धो लें।
घ. अपनी शुष्क त्वचा के इलाज के लिए इसका सप्ताह में दो-तीन बार प्रयोग करें।

6. शहद का मुल्तानी मिट्टी के साथ उपयोग 
आप त्वचा को कोमल तथा चमकदार बनाने के लिए शहद और मुल्तानी मिट्टी का पेस्ट भी बना सकते हैं। इसके लिए आपको निम्न विधि का पालन करना चाहिए।
क. किसी कटोरे में एक दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी लें।
ख. अब इसमें दो चम्मच शहद तथा गुलाब जल डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इस प्रकार आपको एक गाढ़ा पेस्ट प्राप्त होगा।
घ. इस पेस्ट को चेहरे, गरदन तथा हाथों पर लगाएं और दस-पंद्रह मिनट तक लगा रहने दें।
ङ. उसके उपरांत इसे ठंडे पानी से धो लें।
च. आप स्वस्थ तथा चमकदार त्वचा पाने के लिए इस पेस्ट का सप्ताह में दो-तीन बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

7. शहद का कंडिशनिंर के रूप में प्रयोग 
आप शहद का कंडिशनिंर निम्न प्रकार से बना सकते हैं।
क.एक कटोरे में लगभग आधा कप दही लें।
ख. अब इसमें 3-4 चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. अब इस मिश्रण को सिर पर अच्छी तरह से लगाएं। मिश्रण सिर की त्वचा तक लगना चाहिए।
घ. इस मिश्रण को 40-45 मिनट तक सिर पर लगा रहने दें।
ङ. उसके उपरांत बालों को नल के नीचे सिर करके अच्छी तरह से खंगाल कर धो लें।
च. आप इस प्रक्रिया को सप्ताह में एक बार दोहराएंगे तो बाल मुलायम और रेशमी बन बनेंगे।

8. घावों के उपचार हेतु शहद उपयोग 
आप शहद का उपयोग जले हुए या घावों के इलाज के लिए भी कर सकते हैं। शहद में एंटीबैक्टीरियल या जीवाणुरोधी व एंटी-इनफ्लेमेट्री गुण मौजूद पाए जाते हैं जो घावों को बहुत जल्दी से भरने में मदद करते हैं।
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शहद के उपभोग से संबंधित कुछ सावधानियां - Some Precautions Related to the Use of Honey in Hindi

शहद के उपभोग से पूर्व कुछ खास सावधानियां रखना जरूरी होता है।

दिल के रोगियों के लिए 
कई मामलों में शहद का सेवन रक्तचाप की वृद्धि का कारण बन जाता है जो दिल के मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। अतः यदि आप हाईपरटेंसिव औषधियों का सेवन करने के दौरान शहद का उपभोग कर रहें तो अपने रक्तचाप की नियमित जांच कराते रहें।

विशेषज्ञों की राय 
आयुर्वेद- 1.
शहद गुरु प्रकृति का होता है और इसीलिए इसको सीमित मात्रा में उपभोग करने की सलाह दी जाती है। इसका अत्यधिक मात्रा में अनिद्रा, उल्टी या दस्त का कारण बन सकता है।
2. शहद का घी के साथ कभी भी सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह शरीर में वात,कफ व पित्त दोष उत्पन्न कर सकता है।
3. शहद को उबालने या उबले हुए पानी में मिलाकर उपभोग की सलाह नहीं दी जाती है। ऐसा करने से इसमें हानिकारक रासायनिक बदलाव आ सकते हैं।
4. शहद और मूली का साथ-साथ सेवन करना हानिकारक सिद्ध होता है क्योंकि इनका संयुक्त रूप से उपभोग करना शरीर के लिए जहरीला साबित हो सकता है।
5. शहद की अम्लीय प्रकृति होती है और इसीलिए इसे ज्यादा देर तक मुंह में रखना हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इससे दंत वल्क को क्षति पहुंच सकती है।

एलर्जी से ग्रस्त व्यक्ति के लिए
अगर आप एलर्जी से ग्रस्त हों या इसके प्रति आप में अति संवेदनशीलताहो तो आपको शहद का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर आपकी त्वचा शहद के प्रभाव से लाल हो जाती या उस पर धब्बे बनते हैं तो आपको अपनी त्वचा इसे कभी नहीं लगाना चाहिए। इसके प्रयोग से पूर्व आपको अपनी त्वचा के धब्बों या चित्ति की जांच करवानी चाहिए।

गर्भवती महिलाओं के लिए 
शहद में मौजूद सी बोटुलिनम तथा ग्रेयानोटोक्सिन गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होता है। इसीलिए गर्भवती महिलाओं को शहद का सेवन करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। इसके सेवन से शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं।

स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए 
शहद में मौजूद सी बोटुलिनम तथा ग्रेयानोटोक्सिन शिशु के स्वास्थ्य पर हानिकारक हो सकते हैं। इसीलिए स्तनपान कराने वाली महिलाओं को शहद का सेवन करने पहले चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है।

मधुमेह के रोगियों के लिए 
मधुमेह के  मरीज शहद को चीनी की जगह उपयोग करते हैं और  यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। शहद में ग्लूकोज तथा फल शर्करा भरपूर मात्रा में मौजूद होती है और इनके कारण रक्त में ग्लूकोज के लेवल के बढ़ने का खतरा बन जाता है। अतः यदि आप मधुमेह की दवाइयों के सेवन के साथ-साथ शहद का सेवन भी करना चाहते हैं तो चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य है।
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शहद से संबंधित प्रश्नोत्तर - Honey Related FAQ's in Hindi

प्र. भारत में शहद के कुछ सर्वोत्तम ब्रांड के क्या नाम हैं?
उ.
भारत में बिकने वाले शहद के कुछ सर्वोत्तम या प्रसिद्ध ब्रांड के नाम हैं- 
• पतंजलि 
• हिमालय
• बीज 
• हितकारी
• वैद्यनाथन 
• डाबर
• झंडू शुद्ध 

प्र. क्या शहद को नींबू पानी में लेने का कोई फायदा होता है?
उ.
शहद को नींबू पानी में लेने के अनेक लाभ होते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल के लेवल तथा वज़न को कम करने में मदद करता है। इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है और इसीलिए शरीर में लाभप्रद कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा शरीर में बुरे या हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम करके संपूर्ण स्वास्थ्य में सुधार लाता है।

नींबू पानी में शहद के सेवन का तरीका 
क. एक गिलास गुनगुना पानी लेकर उसमें नींबू के एक टुकड़े का रस निचोड़ लें।
ख. अब इस पानी में एक या दो चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. आपको यह पानी सुबह खाली पेट पीना चाहिए।

प्र. मनका शहद के उपभोग का क्या फायदा होता है?
उ.
मनका शहद को शुद्ध माना जाता है और यह कई तरह के स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है।
• यह शहद कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करता है।
• प्रदाह या सूजन में आराम देता है।
• मधुमेह के नियंत्रण में सहायक होता है।
• यह जले हुए या घावों के उपचार में प्रयोग होता है।
• यह आंख, कान आदि के संक्रमण के इलाज में मदद करता है।
• यह जठरांत्र से संबंधित समस्याओं के उपचार में मदद करता है।

प्र. भारत में विविध प्रकार के शहद की कीमत या भाव क्या है?
उ.
विविध प्रकार के ब्रांड के शहद की कीमत या भाव भिन्न-भिन्न पाया जाता है। इसका भाव इसकी मात्रा व गुणवत्ता पर निर्भर करता है। फिर भी सौ ग्राम शहद की कीमत पचास से सत्तर रुपए तक हो सकती है।

प्र. अपरिपक्व या कच्चे शहद तथा आर्गेनिक शहद में  क्या अंतर है?
उ.
आर्गेनिक शहद और कच्चे शहद में बहुत अंतर होता है। आर्गेनिक शहद के लिए मधुमक्खियां ऐसे फूलों से मकरंद एकत्र करती हैं जिनके पौधों को बिना किसी प्रकार का रसायन प्रयोग किए आर्गेनिक तौर पर उगाया जाता है। इसके विपरीत कच्चे शहद को मधुमक्खियों के छत्ते से प्राप्त किया जाता है तथा इसे निचोड़ कर तथा छनाकर अथवा संसाधित करके प्रयोग किया जाता है। अतः आर्गेनिक शहद और कच्चे शहद में यही खास अंतर होता है कि आर्गेनिक शहद को संसाधित करने की जरूरत नहीं पड़ती है जबकि कच्चे शहद को संसाधित करना पड़ता है।

प्र. एक चम्मच भर शहद में ठीक-ठीक कितनी कैलोरी निहित होती है?
उ.
एक चम्मच शहद में लगभग 64 कैलोरी निहित हो सकती है।

प्र. क्या हम शहद का उपभोग वज़न कम  करने के लिए कर सकते हैं?
उ.
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शारीरिक वज़न बढ़ने का कारण कफ दोष तथा आम का जमाव बनता है। आम शरीर में एकत्र विषैले अपशिष्ट पदार्थ होते हैं। शहद का सेवन कफ दोष को मिटाता है तथा शरीर को विषैले अपशिष्ट या आम से मुक्ति दिलाता है। इस कारण उपापचय में सुधार आता है और वज़न कम होता है। यह वज़न कम करने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह शरीर में सीरम के लेवल को कम करता है।

प्र. वज़न कम करने के लिए शहद के सेवन का तरीका 
उ.
आप शरीर का वजन कम करने के लिए शहद का पानी व नींबू के साथ सेवन कर सकते हैं। इसके लिए निम्न विधि अपनाइए।
क. लगभग एक गिलास गुनगुना पानी लेकर उसमें आधा नींबू निचोड़ लें।
ख. अब इसमें एक या दो चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इसे सुबह खाली पेट पीना चाहिए ताकि उचित लाभ प्राप्त हो सके।

प्र. क्या शहद का सेवन एलर्जी का कारण बन सकता है?
उ.
शहद का सेवन एलर्जी का कारण तभी बन सकता है जब आप पराग कणों से होने वाली एलर्जी से पहले से ही ग्रस्त हों। इसका कारण यह होता है कि शहद को एकत्र करते समय कुछ पराग कण शहद में मिल जाते हैं। यही बाद में एलर्जी की वजह बनते हैं। अतः यदि आपको पराग कणों से एलर्जी होती हो तो आप शहद का सेवन मत कीजिए।

प्र. शहद के सेवन की निर्देशित या उपयुक्त  मात्रा क्या होती है?
उ.
शहद के कम या सीमित मात्रा में उपभोग का परामर्श या निर्देश दिया जाता है क्योंकि इसमें फल शर्करा तथा ग्लूकोज काफी मात्रा में उपस्थित होता है और इसी कारण इसका ज्यादा मात्रा में किया गया सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। मधुमेह के रोगियों को शहद के सेवन से पूर्व चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य है।

संदर्भ:

http://www.ayurveda.hu/api/API-Vol-1.pdf
https://main.ayush.gov.in/sites/default/files/Ayurvedic%20Pharmacopoeia%20of%20India%20part%201%20volume%20IX.pdf 
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डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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