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आयुर्वेद के अनुसार दालचीनी के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ayurveda ke Anusar Dalchini ke Fayde aur Nuksan in Hindi

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By NS Desk | 06-Mar-2021

Dalchini

दालचीनी का परिचय - Introduction of Dalchini in Hindi

दालचीनी सबके घरों में पाया जाने वाला एक सामान्य तथा लोकप्रिय मसाला है।  दालचीनी में अनेक तरह के औषधीय गुण विद्यमान पाए जाते हैं और इसीलिए यह विभिन्न प्रकार के रोगों के उपचार में उपयोग की जाती है।इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्व भी मौजूद होते हैं और इसी कारण यह मधुमेह के उपचार में भी सहायक होती है। यह शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को कम करती है। दालचीनी कोलेस्ट्रॉल लेवल को को कम करने में भी योग देती है और इसके इसी गुण की वज़ह से ह्रदय रोग नियंत्रित होते हैं। इसके अलावा दालचीनी में एंटी-स्पाजमोडिक गुण भी निहित पाए जाते हैं जो मासिक धर्म से संबंधित समस्याओं से राहत देते हैं। इसमें उपस्थित एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा संबंधी समस्याओं, जैसे कि मुहांसों आदि के उपचार में मदद करते हैं।

दालचीनी के गुण - Properties of Dalchini

दालचीनी में अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुण उपस्थित होते हैं और यह विभिन्न प्रकार के रोगों के उपचार में काम आती है। दालचीनी के कुछ लाभप्रद गुण इस प्रकार हैं-
• एंटीऑक्सीडेंट या प्रतिऑक्सीकारक गुण 
• एंटीबैक्टीरियल या जीवाणुरोधी गुण 
• एंटीफंग्ल या फफूंदरोधी गुण 
• एंटीस्पाजमोडिक गुण 
• उष्ण प्रकृति 
• कफ निस्सारक गुण 
• तीक्ष्ण और रुक्षण प्रकृति 
दालचीनी के ये उपर्युक्त सभी गुण स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने वाले हैं और  व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को बनाने में मदद कर सकते हैं।

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दालचीनी के ऐतिहासिक उपयोग - Historical Uses of Dalchini in Hindi

दालचीनी के औषधीय गुणों के फलस्वरूप लोग हजारों सालों इसका उपयोग करते आए हैं। यह सामान्य-सा मसाला अनेक रोगों के उपचार में सफलतापूर्वक योग दे सकता है। इसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। इसका उपयोग भोजन पकाने के अलावा त्वचा तथा बालों की विभिन्न समस्याओं के उपचार के लिए किया जाता है।

दालचीनी नीचे दिए गए कुछ प्रमुख रोगों के उपचार में मदद करती है-
• उच्च रक्तचाप को कम करती है।
• उच्च कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करती है।
• ह्रदय रोगों को कम करने में मदद करती है
• वज़न को नियंत्रित करने में मदद करती है।
• त्वचा के मुहांसों के उपचार में मदद करती है।
• बालों की वृद्धि में सहायक होती है।
• यह शोथ या सूजन के उपचार में मदद करती है।
अतः दालचीनी के उपयोग से उपरोक्त रोगों के उपचार में मदद मिलती है। लोग प्राचीन या आदि काल से ही इसके औषधीय गुणों में विश्वास करते आए हैं।

 

आयुर्वेदिक उपचार में दालचीनी के उपयोग - Uses of Dalchini in Ayurvedic treatment in Hindi

दालचीनी एक ऐसा मसाला है जिसका आयुर्वेदिक उपचार में बहुत अधिक महत्व है। दालचीनी में अनेक स्वास्थ्यवर्धक गुण पाए जाते हैं और विभिन्न प्रकार के रोगों के उपचार हेतु इसका उपयोग किया जाता है। आइए, जानें कि यह किन-किन रोगों के उपचार में मदद कर सकती है।

1. मधुमेह के उपचार में मदद
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी की उष्ण प्रकृति शरीर में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है और इसी कारण मधुमेह से आराम मिलता है। मधुमेह का कारण कमजोर पाचन तथा वात की गड़बड़ी से उत्पन्न टोक्सिन या विषैला अपशिष्ट बनता है जो शरीर में जमा होकर शर्करा के स्तर को बढ़ाता है। अतःदालचीनी  की उष्ण प्रकृति शरीर को आम या विषैले अपशिष्ट से निजात  दिलाकर इंसुलिन में सुधार लाती है।

2. चक्रीयधमनी या कोरोनरी आरट्रीज के उपचार में मदद 
आयुर्वेदिक-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी  में कफ की गड़बड़ी को संतुलित करने वाले गुण मौजूद पाए जाते हैं जो चक्रीयधमनी से संबंधित रोगों के उपचार में मदद करती है जो मुख्यतः कफ की गड़बड़ी का परिणाम होता है। इसीलिए दालचीनी  कफ की गड़बड़ी को ठीक करके रक्त के थक्कों की रोकथाम करती है और चक्रीयधमनी से जुड़ी समस्याओं के निराकरण में मदद करती है।

चक्रीयधमनी से संबंधित रोगों की रोकथाम हेतु दालचीनी के उपभोग का आयुर्वेदिक तरीका

यदि आप चक्रीयधमनी से जुड़े रोगों की रोकथाम के लिए दालचीनी का उपभोग करना चाहते हैं तो निम्न विधि का पालन कीजिए-
क. एक बरतन में लगभग डेढ़ कप पानी लें और इसमें दो इंच लंबा दालचीनी का टुकड़ा डालकर पानी को उबालें।
ख. दालचीनी की इस डंडी को 5-8 तक उबालें।
ग. अब दालचीनी के पानी को एक गिलास में छान लें और इसमें नींबू निचोड़ लें।
घ. आप चक्रीयधमनी से जुड़े रोगों की रोकथाम हेतु इस पानी को नियमित रूप से पी सकते हैं।

3. एलर्जी के उपचार में मदद
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी में उष्ण तथा कफ को संतुलित करने वाले गुण मौजूद पाए जाते हैं जो एलर्जी की समस्या के समाधान में सहायक होते हैं। यह शरीर में आम जो कि एक विषैला अपशिष्ट होता है उसके जमाव को रोकती है और शरीर में व्याप्त कफ दोष को मिटाती है।

एलर्जी के उपचार को लेकर दालचीनी के उपभोग से संबंधित आयुर्वेदिक टिप्स 
यदि आपको किसी तरह की एलर्जी से जुड़ी समस्या है और आप उसका उपचार दालचीनी के उपभोग से करना चाहते हैं तो निम्न टिप्स अपनाएं।
क. एक कटोरे में 1-2 चुटकी दालचीनी का पाउडर लें।
ख. अब इसका पेस्ट बनाने के लिए इसमें शहद मिला लें।
ग. एलर्जी की समस्या के समाधान के लिए इसका दिन में तीन बार उपभोग कर सकते हैं।

4. फंग्ल संक्रमण के उपचार में मदद
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी  की प्रकृति उष्ण एवं तीक्ष्ण होती है और इसी कारण यह फंग्ल संक्रमण के जोखिम को कम करती है।

5. इरिटेबल बावेल सिंड्रोम के उपचार में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी  की उष्ण प्रकृति व्यक्ति की पाचक अग्नि में सुधार लाती है। इरिटेबल बावेल सिंड्रोम पाचक अग्नि के असंतुलन का परिणाम होता है और इसीलिए दालचीनी के सेवन से पाचक अग्नि में वृद्धि के साथ ही इरिटेबल बावेल सिंड्रोम के लक्षणों में सुधार देखने को मिलता है।

इरिटेबल बावेल सिंड्रोम के उपचार हेतु दालचीनी के उपभोग से संबंधित आयुर्वेदिक टिप्स 
क. एक बरतन में एक से डेढ़ कप पानी लें और  उसमें दो इंच लंबा दालचीनी का टुकड़ा डालकर पानी को उबालें।
ख. दालचीनी के टुकड़े को पानी में 5-8 मिनट तक उबालें।
ग. अब इसे छान कर इसमें नींबू निचोड़ लें।
घ. इरिटेबल बावेल सिंड्रोम से छुटकारा पाने के लिए इस पानी को दिन में दो बार पिएं।

6. मासिक धर्म से जुड़े दर्द के उपचार में मदद 
 आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी के वात को संतुलित करने वाले गुण मासिक धर्म के दर्द से राहत देते हैं, क्योंकि इसका कारण शरीर में वात की गड़बड़ी ही बनती है। दालचीनी का सेवन इस गड़बड़ी को ठीक करके दर्द में आराम देता है।

मासिक धर्म के दर्द के उपचार हेतु दालचीनी के उपभोग से संबंधित आयुर्वेदिक टिप्स 
यदि आप मासिक धर्म के दर्द और ऐंठन से परेशान हैं और उसका उपचार दालचीनी के उपभोग से करना चाहते हैं तो निम्न टिप्स का पालन कीजिए।
क. एक बरतन में एक या डेढ़ कप पानी लें और इसमें दो इंच लंबा दालचीनी का टुकड़ा डालकर पानी को उबालें।
ख. इस टुकड़े को पानी में 5-8 मिनट तक उबालें।
ग. अब इसे छान लें तथा इसमें नींबू निचोड़ लें।
घ. आप मासिक धर्म से संबंधित दर्द से छुटकारा पाने के लिए इसे दिन में दो बार पी सकते हैं।

7. मुहांसों के उपचार में मदद 
दालचीनी मुहांसों के उपचार में खास मदद कर सकती है। इसमें एंटीबैक्टीरियल तथा एंटी-इनफ्लेमेट्री गुण मौजूद पाए जाते हैं जो मुहांसों का कारण बनने वाले जीवाणुओं की वृद्धि पर प्रतिबंध लगा कर मुहांसों के उपचार में मदद करते हैं और त्वचा की सूजन में भी आराम देते हैं।

8. मुंह के फंग्ल या फफूंद संक्रमण के उपचार में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी की उष्ण और तीक्ष्ण प्रकृति मुंह के फंग्ल या फफूंद संक्रमण से छुटकारा दिलाने में मदद करती है।

चिकित्सा द्वारा निर्देशित दालचीनी की उचित मात्रा 
चिकित्सक द्वारा निर्देशित दालचीनी की निर्देशित मात्रा इस प्रकार है- 
• दालचीनी कैपसूल- दिन में 1-2 कैपसूल कि सेवन कर सकते हैं।
• दालचीनी का पाउडर- आप दिन में दो बार एक से दो चुटकी दारचीनी का सेवन कर सकते हैं अथवा इसका एक से दो चम्मच पाउडर भी उपभोग कर सकते हैं।
• दालचीनी का तेल- आप दारचीनी के तेल की 2-3 बूंदें इस्तेमाल करें  या फिर उसका आवश्यकतानुसार उपभोग करें।

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आयुर्वेदिक उपचार में दालचीनी के उपयोग - Uses of Dalchini in Ayurvedic treatment in Hindi

दालचीनी का उपभोग तथा आयुर्वेदिक उपचार में उपयोग कर सकते हैं। आइए जानें कि आप इस मसाले का उपयोग तथा उपभोग कैसे कर सकते हैं।

शहद के साथ दालचीनी पाउडर 
आप शहद के साथ दालचीनी पाउडर का उपभोग निम्न प्रकार से कर सकते हैं-
क. एक कटोरी में 1-2 चुटकी दालचीनी का पाउडर लें।
ख. इस कटोरी में एक चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इस मिश्रण को दिन में दो बार खाना खाने के बाद लें।

दालचीनी कैपसूल का पानी के साथ सेवन
क. आप दालचीनी के 1-2 कैपसूल का सेवन कर सकते हैं।
ख. आप इन कैपसूल को दिन में दो बिर खाना खाने के बाद ले सकते हैं।
ग. आप इनका सेवन दोपहर या रात के भोजन के उपरांत करें तो बेहतर रहेगा।

वज़न कम करने के लिए दालचीनी तथा नींबू के पानी का सेवन
यदि आप अपना वज़न कम करने के इच्छुक हैं तो निम्न प्रकार से दालचीनी और नींबू से बने पानी का निम्न प्रकार से सेवन कर सकते हैं-
क. एक गिलास में गुनगुना पानी लेकर उसमें 1-2 चुटकी दालचीनी का पाउडर मिला लें।
ख. इस पानी में आधा नींबू निचोड़ लें और अच्छा तरह से मिला लें।
ग. अप इस पानी को पी लें। वज़न कम करने के लिए शहद के साथ सेवन करना ज्यादा बेहतर रहता है।

संधिशोथ और अनिद्रा के लिए दालचीनी- हल्दी दूध 
यदि आप संधिशोथ के दर्द और अनिद्रा से राहता पाना चाहते हैं तो आफ दालचीनी-हल्दी दूध का सेवन कर सकते हैं। उसके सेवन का निम्न तरीका अपना सकते हैं-
क. एक बरतन में एक गिलास दूध लें और इसे अच्छी तरह से उबाल लें।
ख. इस उबलते हुए दूध में दो से तीन चुटकी दालचीनी का पाउडर और एक से दो चुटकी हल्दी पाउडर मिला लें।
ग. इस दूध के उबलने के बाद ठंडा होने दें।
घ. जब यह दूध गुनगुना हो जाए तो संधिशोथ व अनिद्रा के उपचार हेतु इसको पी लें।
ङ. आपको यह दूध सोने से पूर्व पीना चाहिए।

दालचीनी की चाय
आप तनाव और वज़न कम करने के लिए दालचीनी की चाय भी पी सकते हैं। इस चाय को बनाने के लिए आप निम्न तरीका अपनाएं-
क. एक बरतन में डेढ़ कप पानी तथा दो इंच लंबा दालचीनी का टुकड़ा डालकर पानी को उबालें।
ख. इस पानी में दालचीनी के टुकड़े को 5-8 मिनट तक उबालें।
ग. अब इसे छान लें तथा इसमें नींबू निचोड़ लें।
घ. आप तनाव और वज़न कम करने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पी सकते हैं।

दालचीनी का फेस पैक के तौर पर इस्तेमाल
यदि आप त्वचा से संबंधित कई समस्याओं जैसे कि मुहांसों आदि या फिर उसके दाग-धब्बों से परेशान हैं और दालचीनी से उपचार करना चाहते हैं तो निम्न विधि का पालन कीजिए- 
क. एक कटोरी में 1-2 चुटकी दालचीनी का पाउडर लें।
ख. अब इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर कर बढ़िया पेस्ट बना लें।
ग. अब इस पेस्ट को चेहरे तथा गरदन पर लगाएं और 10-15 मिनट तक लगाकर रखें।
घ. उसके उपरांत सादे पानी से धो लें।
ङ. आप मुहांसों व दाग-धब्बों से पूरी तरह राहत पाने के लिए यह उपाय सप्ताह में दो-तीन बार दोहरा सकते हैं।

दालचीनी का तेल
आप दालचीनी के तेल का अन्य वाष्पशील तेलों के साथ जोड़ों के दर्द के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। उसके लिए आपको निम्न तरीका अपनाना चाहिए- 
क. एक कटोरी में 2-3, बूंदें दालचीनी के तेल की लें।
ख. अब इसमें 4-6 बूंदें तिल के तेल की मिला लें।
ग. आप इसे प्रभावित भाग पर पर इस्तेमाल करके जोड़ों के दर्द से राहत पा सकते हैं।

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दालचीनी के दुष्प्रभाव - Side effects of Dalchini in Hindi

दालचीनी के उपभोग के कुछ प्रमुख दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं-
● उलटी
● मतली
● चक्कर आना
● तंद्रा 
● डायरिया 
● त्वचा की पित्तिका 
● मुंह तथा जीभ की सूजन

दालचीनी के उपभोग को लेकर रखी जाने वाली कुछ सावधानियां 

दालचीनी के उपभोग के समय कुछ निम्न सावधानियां रखना अनिवार्य है।

● विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के मुताबिक़ आपको इसका सेवन करते समय निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए-
1. दालचीनी की उष्ण प्रकृति पाचक अग्नि में वृद्धि कर सकती है। अतः यदि आपको पित्त की गड़बड़ी रहती है या आप जठरीय समस्याओं से पीड़ित हैं तो आपको दालचीनी का बहुत सीमित मात्रा में उपभोग करना चाहिए।
2. यदि आप नाक से रक्त स्राव या फिर वे महिलाएं जिन्हें मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक रक्त स्राव की समस्या होती है उन सबको दालचीनी के उपभोग से पूर्व चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य है।
3. यदि व्यक्ति की त्वचा तेलीय है या उसकी त्वचा अत्यंत संवेदनशील है तो उसे दालचीनी के तेल का इस्तेमाल बड़ी ही सावधानी से करना चाहिए।
4. यह भी हिदायत दी जाती है कि दालचीनी के तेल का लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए।

● मधुमेह के रोगियों के लिए
यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं तो आपको ध्यान रखना चाहिए कि दालचीनी निम्न रक्त शर्करा लेवल का कारण बन सकती है और इसीलिए यदि आप दारचीनी का उपभोग कर रहे हैं तो अपने रक्त शर्करा के स्तर की नियमित जांच कराते रहें।

● स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए
गर्भवती महिलाओं के लिए दालचीनी का उपभोग हानिकारक नहीं होता है। अतः इसका उचित मात्रा में उपभोग किया जा सकता है। मगर यदि इसके अनुपूरकों का सेवन करें तो चिकित्सक से परामर्श अवश्य कर लें।

● ह्रदय रोगियों के लिए
अगर आप ह्रदय से संबंधित रोग से ग्रस्त हैं तो आपको ध्यान रखना चाहिए कि दालचीनी के उपभोग से रक्तचाप कम हो सकता है। अतः यदि आप रक्तचाप की दवाइयां खाने के साथ-साथ दालचीनी का उपभोग भी करें तो अपना रक्तचाप अवश्य जांचते रहें ।

● अन्य औषधीय अंतः क्रिया
यदि आप एंटीकोयगुलैंट या एंटीप्लेटलेट से संबंधित दवाइयों का सेवन कर रहें हैं तो आपको दालचीनी का सेवन करने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य करना चाहिए, क्योंकि  दालचीनी का सेवन प्लेटलेट्स की  संख्या कम कर सकता है और  जिस कारण रक्त स्राव की समस्या उत्पन्न हो सकती है। अतः इस दौरान अपनी प्लेटलेट्स की संख्या की जांच अवश्य कराते रहें।

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दालचीनी से संबंधित प्रश्नोत्तर - Dalchini Related FAQ's in Hindi

प्र. दालचीनी के दैनिक उपयोग क्या-क्या हैं?
उ.
दालचीनी का उपयोग विभिन्न खाद्य पदार्थ, जैसे कि पकवान, आइस-क्रीम, च्यूइंग गम,  सूप, चाय, कैंडी आदि को तैयार करने में किया जाता है। दालचीनी की छाल के औषधीय फायदों को ध्यान में रखते हुए इसका प्रयोग टूथपेस्ट, इत्र, लिपस्टिक,  कफ सिरप, नसल स्प्रे, माऊथ वाश आदि के बनाने में किया जाता है। ये दालचीनी के कुछ सामान्य उपयोग हैं।

प्र. दालचीनी को भंडारित करके रखने का उचित तरीका क्या है?
उ.
आप दालचीनी पाउडर तथा उसकी डंडियों को वायुरोधी डिब्बों में भरकर धूप या गरमी से दूर सुरक्षित भंडारित करके रख सकते हैं। आप इन डिब्बों को अंधकारमय तथा शुष्क स्थानों पर भी रख सकते हैं। यदि सही तरीके भंडारित करके रखा जाए तो इसका पाउडर लगभग छह मास तक व इसकी डंडियां लगभग एक साल तक सुरक्षित रह सकती हैं।

प्र. क्या दालचीनी के प्रभाविता की जांच करने का भी कोई तरीका होता है?
उ.
दालचीनी के पाउडर तथा इसकी डंडियों की प्रभाविता की जांच निम्न प्रकार से कर सकते हैं-
क. चुटकी भर दालचीनी पाउडर लेकर अपनी उंगलियों के बीच रगड़ें और फिर सूंघ कर देखें। यदि गंध शक्तिशाली व ताजा आती है तो समझो कि दालचीनी प्रभावशाली है। अगर गंध तीव्र नहीं आती है तो समझना कि दालचीनी प्रभावशाली नहीं है।
ख. इसी प्रकार यदि आपके पास दालचीनी की डंडी है तो इसका सिरा तोड़कर अपनी उंगलियों के बीच मसलें तथा सूंघें। यदि गंध तीक्ष्ण तथा ताजा है तो दालचीनी  प्रभावशाली है अन्यथा नहीं है।

प्र. क्या दालचीनी की डंडी का दोबारा प्रयोग हो सकता है?
उ.
जब तक दालचीनी की डंडियां अपनी लज्जत नहीं खो देती तब तक उनका पुनरुपयोग हो सकता है। इसके लिए आपको इस डंडी को पानी में धोकर सुखा देना चाहिए। आप इस डंडी को पीसकर प्रयोग कर सकते हैं।

प्र. क्या दालचीनी वज़न घटाने में मदद करती है?
उ.
दालचीनी में कफ को दूर करने वाले गुण मौजूद पाए जाते हैं जो वज़न को कम करने में मदद करते हैं क्योंकि कफ की गड़बड़ी न होने पर शरीर का वज़न नहीं बढ़ता है। शारीरिक वज़न कम करने के लिए दालचीनी का सेवन शहद में करना अच्छा रहता है।

प्र. क्या दालचीनी का उपभोग अदरक के साथ किया जा सकता है?
उ.
अदरक तथा दालचीनी दोनों में ही एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो गहन व्यायाम के बाद मांसपेशियों के दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं। गहन व्यायाम के दौरान शरीर में फ्री रेडिकल्स की उत्पत्ति होती है जो ऑक्सीडेटिव तनाव का कारण बन मांसपेशियों में थकान पैदा करते हैं। अतः अदरक का दालचीनी के साथ उपभोग करने से मांसपेशियों की थकान मिटती और शरीर की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है।

प्र. क्या हम दालचीनी की डंडी को खा सकते हैं?
उ.
दालचीनी की डंडी उपभोग के योग्य होती है और इसका प्रयोग विविध प्रकार के खाद्य पदार्थों को तैयार करने में होता है। अतः दालचीनी का निम्न प्रकार से उपभोग किया जा सकता है-
क. दालचीनी की कुछ डंडियां लें तथा उन्हें 1-2 मिनट के लिए भून लें।
ख. अब इन डंडियों को पीस कर पाउडर तैयार कर लें। 
ग. अब इस पाउडर का प्रयोग भोजन बनाने या पेय पदार्थ तैयार करने में कर सकते हैं।

प्र. वज़न कम करने के लिए दालचीनी का उपभोग कैसे करें?
उ.
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शारीरिक वजन में वृद्धि शरीर में कमजोर पाचन तंत्र के कारण आम या टोक्सिन का संचय हो जानेसे होती है। टोक्सिन एक विषैला अपशिष्ट होता है और शरीर में जमा होकर  वजन को बढ़ता है। दालचीनी  की उष्ण प्रकृति उपापचय को सुधार कर शरीर से आम या टोक्सिन को हटाती है तथा वज़न को कम करती है।

प्र. वजन कम करने के लिए दालचीनी के उपभोग से संबंधित टिप्स
उ.
यदि आप अपना वजन कम करने के लिए दालचीनी का उपभोग करना चाहते हैं तो निम्न टिप्स का पालन कीजिए।
क. दालचीनी का 1-2 चुटकी पाउडर लें और उसे एक चम्मच शहद में मिला लें ।
ख. इसका प्रतिदिन खाना खाने बाद दो बार सेवन करें ।
ग. अच्छे परिणाम पाने के लिए आप यह तरीका दो-तीन मास तक लगातार आजमा सकते हैं।

प्र. क्या दालचीनी अपच या अजीर्ण के उपचार में मदद कर सकती है?
उ.
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी में दीपन तथापाचन संबंधित गुण होते हैं जो तंत्र को मजबूत करने का काम करते हैं। ये पाचक अग्नि को बढ़ाते हैं और इसी कारण शरीर में पाचक अग्नि की वृद्धि होती है। अतः दालचीनी  शरीर में कफ की गड़बड़ी को ठीक कर  पाचक अग्नि में वृद्धि करती है।

प्र. पाचन में सुधार लाने के उद्देश्य से दालचीनी के उपभोग संबंधित टिप्स 
उ.
यदि आप अपने पाचन तंत्र को सुधारने के लिए दालचीनी का उपभोग करना चाहते हैं तो निम्न टिप्स का पालन कीजिए-
क. एक बरतन में डेढ़ कप पानी लें और इसमें दो इंच लंबा दालचीनी का टुकड़ा डालकर पानी को उबालें।
ख. इसमें 5-6 मिनट तक दालचीनी की डंडी को उबलने दें।
ग. अब इसे एक गिलास में छान लें और इसमें नींबू निचोड़ लें।
घ. आप अपने पाचन में सुधार लाने के लिए इसे दिन में दो बार पी सकते हैं।

प्र. क्या लिवर से संबंधित किसी समस्या से ग्रस्त व्यक्ति दालचीनी का उपभोग कर सकता है?
उ.
लिवर की समस्या वाले रोगी को दालचीनी का कभी भी अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह लिवर की टोक्सिटी या उसकी क्षति का कारण बन सकती है। ऐसा इसमें उपस्थित कोमरिन नामक तत्व के कारण होता है।

प्र. क्या दालचीनी उच्च कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करती है?
उ.
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शरीर में उच्च कोलेस्ट्रॉल लेवल का कारण पाचक अग्नि के असंतुलन की वजह से विषैले अपशिष्ट जिसे आम कहते हैं ,का जमाव या संचय बनता है। दालचीनी  में मौजूद दीपन या क्षुधावर्धक और पाचन संबंधी गुण पाचन को सुधारते हैं तथा शरीर से आम के जमाव को घटा कर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मदद करती है।
कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने के दालचीनी के उपभोग से संबंधित टिप्स 
यदि आप कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने के लिए दालचीनी का उपभोग उपभोग करना चाहते हैं तो निम्न विधि का पालन कीजिए-
क. दालचीनी का 1-2 चुटकी पाउडर लें और उसमें शहद मिला लें।
ख. इसे खाना खाने के बाद दिन में दो बार लें।
ग. बेहतर परिणाम पाने के लिए यह उपाय दो से तीन महीने तक लगातार जारी सके।

प्र. क्या दालचीनी का उपभोग अम्ल प्रतिवाह या रिफलक्स का कारण बनता है?
उ.
दालचीनी में ऐसे गुण मौजूद पाए जाते हैं जो पाचन को सुधारने व पाचक अग्नि को संतुलित करने में लाभप्रद सिद्ध होते हैं। फिर भी इसका अधिक मात्रा में सेवन इसकी उष्ण प्रकृति के फलस्वरूप अम्ल प्रतिवाह या एसिड रिफलक्स का कारण बन सकता है। अतः इसीलिए यह सुझाव दिया जाता है कि दालचीनी का सेवन सदा उचित मात्रा में ही करना चाहिए। आप इसका उपभोग शहद या दूध में कर सकते हैं।

प्र. क्या दालचीनी पाउडर का हल्दी के साथ खाली पेट सेवन करना उचित रहता है?
उ.
दालचीनी की प्रकृति उष्ण होती है और यदि आपको एसिडिटी की समस्या रहती है तो इस स्थिति में इसका खाली पेट सेवन करने से एसिडिटी होने का खतरा बढ़ जाता है। अतः ऐसी स्थिति में इसका सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए। अगर आपको ऐसी कोई समस्या नहीं है तो आप दालचीनी को हल्दी के साथ गुनगुने दूध में खाली पेट ले सकते हैं। इसके सेवन से आपको वज़न कम होने में  विशेष लाभ प्राप्त होगा।

प्र. वजन कम करने के लिए दालचीनी के उपभोग का तरीका क्या है?
उ.
यदि आप वजन कम करने के लिए दालचीनी का उपभोग करना चाहते हैं तो निम्न विधि का पालन कीजिए-
क. एक बरतन में डेढ़ कप पानी लें और इसमें दो इंच लंबा दालचीनी का टुकड़ा डालकर पानी को उबालें।
ख. इसे 5-8 मिनट तक उबलने दें।
ग. अब इसे एक गिलास में छान लें और इसमें नींबू निचोड़ लें।
घ. वजन को कम करने के लिए आप इस चाय को दिन में दो बार पी सकते हैं।

प्र. क्या दालचीनी की चाय पीने का कोई फायदा है?
उ.
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी में वात को संतुलित करने वाले गुण मौजूद पाए जाते हैं जो शरीर में वात को संतुलित करते हैं। अतः इसीलिए दालचीनी  की चाय का शरीर पर लाभप्रद प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त दालचीनी  के दीपन या क्षुधावर्धक और पाचन संबंधी गुण पाचन क्रिया को सुधार कर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

प्र. क्या दालचीनी का उपभोग महिलाओं के पोलिसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम के उपचार में मदद करता है?
उ.
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक शरीर में वात तथा कफ की गड़बड़ी ही पोलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम का कारण बनती है। दालचीनी  की कफ व वात को संतुलित करने वाले गुण वात एवं कफ को संतुलित करके इस समस्या में आराम पहुंचाते हैं। अतः दालचीनी  का सेवन इस समस्या का समाधान कर सकता है।

प्र. क्या दालचीनी का उपभोग त्वचा समस्याओं के लिए लाभप्रद है?
उ.
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक दालचीनी की रुक्षण एवं तीक्ष्ण प्रकृति त्वचा से संबंधित समस्याओं के निदान में काफी मदद करती है। यह झुर्रियों, शुष्क त्वचा, तेलीय त्वचा आदि के उपचार में सफलतापूर्वक योग देती है। यह त्वचा के रोम छिद्रों को साफ कर त्वचा को स्वस्थ  एवं चमकदार बनाती है।

प्र. त्वचा के लिए दारचीनी के उपभोग से संबंधित आयुर्वेदिक टिप्स
उ.
क. एक कटोरी में 1-2 चुटकी दारचीनी का पाउडर लें।
ख. इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर बढ़िया पेस्ट तैयार कर लें।
ग. इस पेस्ट को चेहरे व गरदन पर लगाएं और 5-10 मिनट तक लगा रहने दें।
घ. इसके उपरान्त सादे जल से धो लें।
ङ. त्वचा की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए यह उपाय सप्ताह में दो तीन दोहराएं।

संदर्भ:

https://main.ayush.gov.in/sites/default/files/Ayurvedic%20Pharmacopoeia%20of%20India%20part%201%20volume%20IX.pdf 
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/26109781/ 
https://www.researchgate.net/publication/258035117_Medicinal_properties_of_'true'_cinnamon_Cinnamomum_zeylanicum_A_systematic_review
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https://www.easyayurveda.com/2014/12/04/cinnamon-benefits-dose-home-remedies-side-effects/

consult with ayurveda doctor.
डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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