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आयुर्वेद के अनुसार अलसी खाने के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ayurveda ke Anusar Alsi Khane ke Fayde aur Nuksan in Hindi

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By NS Desk | 04-Mar-2021

Alsi Khane ke Fayde aur Nuksan

अलसी का परिचय - Introduction of Alsi in Hindi

अलसी एक पादप आधारित तिलहन होता है तथा इसे फ्लैक्स सीड्स के नाम से जाना जाता है। इसका उपयोग अनेक तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के लिए किया जाता है। यह कई प्रकार के पोषक तत्वों या, जैसे कि फाइबर, कार्बोहाइड्रेट,प्रोटीन, विटामिन,खनिज आदि के रूप में काफ़ी समृद्ध होता है। अलसी या फलैक्स सीड्स को पूरी यरह से भूनने के उपरांत ही उपयोग करना चाहिए। लोग अनेक तरह के रोगों के उपचार के लिए इसका सेवन पानी या सलाद के साथ करते हैं।

 

अलसी में अनेक तरह के आयुर्वेदिक तथा अन्य लाभ देने वाले पोषक तत्व मौजूद पाए जाते हैं। अलसी पाचन तंत्र में सुधार के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है तथा शरीर में संचित आम या टोक्सिन या जीव विष को हटाने के लिए जानी जाती है। यह पाचक अग्नि को कम करने तथा आंतों की चाल में वृद्धि करने के लिए उपयोग की जाती है जो कब्ज की समस्या का समाधान करती है। अलसी की विरेचक प्रकृति शरीर से मल त्याग या मल उत्सर्जन को सरल बनाती है। अगर भूनी हुई अलसी का सेवन सुबह नाश्ते के साथ किया जाए तो यह वज़न को नियंत्रित या कम करने में मदद कर सकती है।

 

इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण बालों को स्वस्थ बनाने में काफी मददगार साबित होते हैं। यह बालों की वृद्धि में योग देती है तथा रूसी को नियंत्रित करती है। इसका उपयोग प्रसाधन सामग्री बनाने वाले उद्योगों में होता है तथा यह त्वचा से संबंधित कई समस्याओं जैसे कि एलर्जी, सूजन आदि को कम करने तथा साथ ही घावों को शीघ्र भरने आदि के लिए भी इस्तेमाल की जाती है।

 

आयुर्वेद के अनुसार अलसी की प्रकृति गुरु या भारी होती है और इसकी कारण यह पचने में थोड़ी मुश्किल होती है। इसीलिए इसके अकेले उपभोग का सुझाव नहीं दिया जाता है। अतः इसका सेवन पानी के साथ ही करना चाहिए।

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अलसी के अन्य क्या-क्या नाम हैं? - What are the Other Names of Alsi in Hindi?

विभिन्न क्षेत्रों में अलसी को विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम लिनुमुसीटेटीसिसिमुम है। अलसी के कुछ अन्य नाम हैं- अलसी या फलैक्स सीड्स, तीसी, लिनसीड्स,मर्शीना,जावासु,अलासी, अतासी, बिट्टू, नीमपुष्पी,कशुमा आदि।

 

शरीर तथा स्वास्थ्य के लिए अलसी के फायदे - Benefits of Alsi for Body and Health in Hindi

अलसी स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद होती है। यहां अलसी के कुछ ऐसे चमत्कारी फायदे दिए जा रहे हैं जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

 

● अलसी हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद करती है।

वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक-अलसी में फाइबर, लिगनेंस, अल्फा लिनोलेयिक एसिड तथा अर्जीनायन उपस्थित होता है जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। अतः हाइपरटेंशन से पीड़ित व्यक्ति अलसी के सेवन से अपने रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इससे जुड़ी अन्य समस्याओं के समाधान में भी मदद पा सकता है।

 

● बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया के लिए फायदेमंद

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया नाम बीमारी में अलसी बढ़ी हुई प्रोस्टेट गलैंड को नियंत्रित रखने में काफ़ी फायदेमंद मानी जाती है।

 

● स्तन कैंसर के उपचार में मदद

अलसी को स्तन कैंसर की सेल्स या कोशिकाओं की वृद्धि और उनके प्रफलन यानी फैलने की रोकथाम के लिए काफी कारगर माना जाता है। अतः इसका सेवन महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर के उपचार में मदद कर सकता है।

 

● कोलन या रेक्टम कैंसर के उपचार में मदद

अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड तथा लिग्निन उपस्थित पाए जाते हैं जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट तथा अन्य स्वस्थ कोशिकाओं को संरक्षित करने का काम करते हैं। वैज्ञानिक विशेषज्ञों के मुताबिक़ अलसी कोलन या रेक्टम कैंसर के उपचार में मदद कर सकती है।

 

● फेफडों के कैंसर के उपचार में मदद

भले ही इस बारे में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं कि अलसी फेफड़ों के कैंसर के लिए बहुत अधिक असरदार होती है, तथापि विज्ञान इस बात को मानता है कि अलसी के सेवन से फेफड़ों के कैंसर के उपचार में मदद मिल सकती है।

 

● रजो निवृत्ति की समस्या के उपचार में मदद

रजो निवृत्ति शरीर में कई तरह की परेशानियां लेकर आती है और आधुनिक वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक अलसी का सेवन इन परेशानियों के निदान में काफ़ी मदद करता है।

 

● प्रोस्टेट गलैंड के कैंसर के उपचार में मदद

अलसी में लिग्निंस मौजूद पाए जाते हैं जो प्रोस्टेट गलैंड के कैंसर के उपचार में मदद कर सकते हैं। यह प्रोस्टेट ग्रंथि में कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि को कम करने तथा उनके फैलाव रोकने में बहुत अधिक असरदार साबित होता है।

 

● एंडोमेट्रियल या गर्भाशय के कैंसर के उपचार में मदद

आधुनिक विज्ञान के मुताबिक अलसी कैंसर के उपचार में मदद करती है। अतः यह एंडोमेट्रियल या गर्भाशय के कैंसर के उपचार में भी मदद कर सकती है।

 

● एटेंशन डिफिस्टि हाइपरेक्टिव या ध्यानाभाव या अतिसक्रियता विकार के उपचार में मदद

अलसी में कुछ ऐसे अच्छे फैटी एसिड मौजूद पाए जाते हैं जो ध्यानाभाव या अतिसक्रियता विकार के उपचार में मदद करते हैं। फिर भी अलसी के रासायनिक संघटन को देखते हुए विज्ञान कोई निश्चित साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करता है कि अलसी इस रोग के उपचार में विशेष मदद कर सकती है।

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अलसी के उपयोग से रोगों/स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार - Treatment of Diseases / Health Problems with the Use of Alsi in Hindi

हम आयुर्वेदिक तथा वैज्ञानिक तौर पर अलसी का उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार के लिए करते हैं।

● कब्ज

आयुर्वेद- व्यक्ति के शरीर में उत्पन्न वात दोष की गड़बड़ी कब्ज का कारण बनती है। उलटे-सीधे खान-पान/ नींद तथा कैफीन के अत्यधिक सेवन की वजह से होने वाली पाचन संबंधी  कमजोरी ही वात की गड़बड़ी का कारण बनती है। अलसी अपनी विरेचक प्रकृति के कारण आंतों की शुष्कता को खत्म करती है और उनमें जमा मल के उत्सर्जन को सरल बनाती है।

टिप्स:

1. कब्ज के उपचार के लिए एक या दो चम्मच अलसी के बीजों से तैयार पाउडर का दिन में दो बार पानी के साथ सेवन करना चाहिए।

2. गरम पानी या दूध में अलसी के तेल का सेवन भी किया जा सकता है।

 

● डायबिटिज मेलिटस टाइप1 तथा टाइप2 के उपचार में मदद

आयुर्वेद- आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति में डायबिटिज का कारण वात दोष बनता है। अपच या कमजोर पाचन के कारण शरीर में आम या टोक्सिन जमा हो जाता है और इसी वजह से इंसुलिन के स्राव में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा वात दोष के कारण अग्नाशय की कोशिकाएं भी गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं। अलसी अपनी दीपन या क्षुधावर्धक प्रकृति के फलस्वरूप शरीर में आम या टोक्सिन की मात्रा को कम करती है। इसके अलावा इसके सेवन से पाचन में सुधार आता है और इंसुलिन का स्राव सामान्य हो जाता है।

 

● इरिटेबल बावेल सिंड्रोम के उपचार में मदद

आयुर्वेद- इरिटेबल बावेल सिंड्रोम या ग्रहनी को आयुर्वेद में पाचक अग्नि की गड़बड़ी का परिणाम माना जाता है। अलसी अपनी दीपन या क्षुधावर्धक तथा पाचन प्रकृति के फलस्वरूप इरिटेबल बावेल सिंड्रोम के उपचार में मदद करती है, क्योंकि यह पाचक अग्नि में वृद्धि करने में समर्थ होती है।।

टिप्स:

आप इरिटेबल बावेल सिंड्रोम के उपचार के लिए 1-2 चम्मच भूने हुए अलसी के बीज पानी के साथ उपभोग कर सकते हैं।

 

● बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में  मदद

आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक पाचक अग्नि की कमी ही उच्च कोलेस्ट्रॉल लेवल का कारण बनती है। पाचनवकी गड़बड़ी के कारण रक्त में टोक्सिन जमा हो जाता है जो कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बढ़ाता है। रक्त में बुरे कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ने से रक्त वाहिकाओं में रुकावट बनती है जो हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। अलसी अपने दीपन या क्षुधावर्धक और पाचन गुणों के  फलस्वरूप  शरीर से आम को हटाकर रक्त वाहिकाओं में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करती है।

 

ह्रदय रोगों के उपचार में मदद

आयुर्वेद- ह्रदय रोगों का शरीर के कोलेस्ट्रॉल लेवल से सीधा संपर्क होता है। पाचक अग्नि के सुधार से रक्त वाहिकाओं में जमा कोलेस्ट्रॉल कम होता है। अलसी का सेवन रक्त वाहिकाओं में बुरे कोलेस्ट्रॉल के लेवल को जमने से रोकता है। अलसी के दीपन या क्षुधावर्धक और पाचन तथा पाचन संबंधी गुण शरीर से आम या टोक्सिन को हटाकर ह्रदय रोगों की रोकथाम में मदद करते हैं।

टिप्स:

एक-चौथाई चम्मच अलसी को भूनकर उसका पाउडर बना लें।

इस पाउडर में अंडे की जर्दी, शहद और केला मिला कर मिश्रण तैयार कर लें। इस मिश्रण का सुबह के नाश्ते के साथ सेवन करने से ह्रदय रोगों से बचाव होता है।

 

● मोटापा

आयुर्वेद- शरीर के वज़न की वृद्धि अथवा मोटापे कारण मेदाधातु की गड़बड़ी से जमा होने वाला आम या टोक्सिन बनता है। इसका कारण खराब खान-पान या जीवन शैली बनते हैं। अलसी  अपनी उष्ण तथा शक्तिशाली प्रकृति के फलस्वरूप शरीर में आम या टोक्सिन के जमाव को नियंत्रित करती है। इस तरह शरीर का वज़न या मोटापा कम होने में मदद मिलती है।

टिप्स:

अलसी के आधा कप बीज लेकर उन्हें भून ले और फिर उनका चाय ,मिल्कशेक या अन्य पेय बनाकर सेवन करें। ऐसा करने से शरीर के वज़न या मोटापे को घटाने में मदद मिलेगी।

 

● त्वचा का संक्रमण

आयुर्वेद- अलसी की मदद से एलर्जी, सूजन, घाव या अन्य त्वचा-समस्याओं का संभव हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार असली की उपचारात्मक या स्तम्मक प्रकृति त्वचा से संबंधित समस्याओं के उपचार में मदद करती है। यह त्वचा से संबंधित सभी प्रकार के संक्रमण का उपचार कर सकती है।

टिप्स:

त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने के लिए इसके तेल को प्रत्यक्ष रूप से त्वचा पर इस्तेमाल कर सकते हैं। 

त्वचा की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भूनी हुई अलसी को गुलाब जल, शहद, दूध तथा केले में मिलाकर पेस्ट के रूप में चेहरे, गरदन या त्वचा के प्रभावित भाग पर लगाया जा सकता है।

 

● कार्पेल टनल सिंड्रोम

आयुर्वेद- शरीर में वात दोष की गड़बड़ी के कारण हाथों या बाजुओं में दर्द, सूजन या उनके सुन्न होने की समस्या उत्पन्न होती है। अलसी की प्रकृति गरम तथा वात की गड़बड़ी को ठीक करने वाली होती है और इसीलिए यह इस समस्या का निदान करने में मदद करती है।

टिप्स:

एक गिलास गरम पानी में अलसी के बीजों से बना पाउडर लें। कार्पेल टनल सिंड्रोम से मुक्ति पाने के लिए इसका दिन में दो बार खाना खाने के बाद सेवन करें।

इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए आप प्रभावित भाग पर अलसी के तेल से मालिश भी कर सकते हैं।

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आयुर्वेद द्वारा निर्देशित अलसी की मात्रा के विविध रूप - Variety forms of Alsi as directed by Ayurveda in Hindi

आयुर्वेदिक उपचार में अलसी का उपयोग तैल, बीज, पाउडर या कैपसूल आदि के रूप में किया जाता है। इन सभी से अलसी के विभिन्न प्रकार के पेय, जैसे-चाय, दूध, पानी आदि बनाकर पिए जाते हैं। यदि आप अलसी की उचित मात्रा के सेवन को लेकर अपने चिकित्सक से परामर्श नहीं कर पाते हैं तो फिर नीचे दिए गए निर्देशानुसार इसकी मात्रा का उपभोग कर सकते हैं।

 

● अलसी का पाउडर- विभिन्न स्वास्थ्य-समस्याओं के उपचार हेतु अलसी के पाउडर की एक-चौथाई से आधा चम्मच मात्रा का दिन में दो बार सेवन करें। बाह्य उपचार हेतु इसके आधा से एक चम्मच पाउडर का गुलाब जल में इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

● अलसी का तेल- अलसी के तेल का सेवन गरम पानी या दूध में किया जा सकता है। इसके एक से दो चम्मच तेल का दिन में एक बार सेवन कर सकते हैं। त्वचा तथा घावों के उपचार के लिए इसके तेल का अपनी आवश्यकतानुसार प्रयोग कर सकते हैं।

 

● अलसी के कैपसूल- विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इसके 1-2 कैपसूल का सेवन दिन में एक या दो बार किया जा सकता है।

अगर आप चिकित्सक से संपर्क करते हैं तो फिर इसका सेवन उनके परामर्शानुसार ही करना चाहिए।

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अलसी से संबंधित आयुर्वेदिक केयर के विविध प्रकार - Variety of Alsi-related Ayurvedic Care in Hindi

● अलसी पाउडर

अलसी के बीज या फलैक्स सीड्स पाउडर के रूप में भी उपलब्ध होते हैं। इसके भूने हुए बीजों को पीसकर पाउडर बनाया जाता है। इस पाउडर का उपयोग कब्ज, त्वचा रोगों आदि के उपचार के लिए किया जाता है।

टिप्स:

अपने चिकित्सक के परामर्शानुसार आप अलसी के पाउडर का सेवन पानी या दूध में कर सकते हैं। आप इसके इस्तेमाल से मिल्कशेक या इसके लड्डू भी बना सकते हैं।

 

● अलसी का मिल्कशेक

विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे आंतों की गति में सुधार आदि को ध्यान में रखते हुए आप अलसी का मिल्कशेक के रूप में भी उपभोग कर सकते हैं। सामान्य व्यक्ति भी अपनी सेहत को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए इसका उपभोग कर सकता है। इस तरह व्यक्ति अपने स्वाद को बरकरार रखने के साथ-साथ सेहतमंद जीवन-शैली पाने में भी समर्थ हो सकता है।

टिप्स:

अलसी के कुछ बीज लेकर उन्हें भूरा होने तक भूनें।

अब इन्हें मिक्सर में पीसकर इनका पाउडर बना लें।

अब इस मिश्रण को गरम दूध में डालकर अच्छी तरह से मिला लें।

अपना स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें चीनी या कोई अन्य खाद्य पदार्थ, जैसे कि खजूर आदि भी मिला सकते हैं।

 

● अलसी के लड्डू

अलसी का उपभोग उसके बीजों या उसके तेल के रूप में करने के बजाय यदि किसी मिठाई, खास तौर से उससे बने लड्डुओं के रूप में करना बहुत अधिक मजेदार होता है। इस प्रकार स्वाद के साथ-साथ सेहत भी बनती है।

टिप्स:

अलसी का पाउडर या उसके बीज लें और उन्हें भूने हुए आटे में मिला लें।

आप इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नमक, काली मिर्च तथा कोई अन्य घटक भी मिला सकते हैं।

इस मिश्रण को गूंद कर नरम लोइयां तैयार कर लें।

अब इन लोइयों को गोल-गोल आकार देकर छोटे-छोटे लड्डू बना लें।

आप ऐसे लड्डू बनाकर 10-12 दिनों के लिए भंडारित करके रख सकते हैं।

 

● अलसी या फलैक्स सीड्स ऑयल कैपसूल

अलसी के तेल के विकल्प के तौर पर उसके तेल से बने कैपसूल का सेवन भी किया जा सकता है। विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इसके 1-2 कैपसूल का पानी के साथ सेवन किया जा सकता है।

 

● अलसी या फलैक्स सीड्स ऑयल अथवा तेल

अलसी के तेल का सेवन गरम दूध या पानी में किया जा सकता है। अपने पाचन तंत्र को मजबूत या बेहतर बनाने के लिए इसका 1-2  चम्मच तेल दूध या पानी में मिलाकर रात को सोने से पहले पी लें।

 

● अलसी के साबुत बीज

अलसी के बीजों का विभिन्न उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए भूनकर या पानी में भिगोकर उपभोग किया जाता है। खांसी या सर्दी-जुकाम के उपचार के लिए इसके बीजों का पानी के साथ सेवन करना चाहिए।

टिप्स:

एक या दो चम्मच अलसी के बीजों को एक गिलास पानी में पूरी रात भिगो कर रखें।

अगले दिन सुबह इस पानी में आधा नींबू निचोड़ लें।

अब इस पानी को खाली पेट पी लें। इसके सेवन से खांसी, सर्दी-जुकाम, फ्लू आदि के उपचार में मदद मिलेगी। 

पाचन तंत्र के सुधार हेतु अलसी के कच्चे या भूने हुए बीजों का सेवन कर सकते हैं। खाना खाने के बाद दिन में दो बार 1-2 चम्मच की मात्रा में इसके बीजों को चबाकर खाएं।

 

● अलसी की चाय

अलसी का चाय या क्वाथ के रूप में भी उपभोग कर सकते हैं। यह अलसी के सेवन के सबसे अधिक लोकप्रिय या प्रचलित तरीकों में से एक है तथा कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।

टिप्स:

एक बरतन में एक कप पानी उबाल लें।

इस उबलते पानी में चाय की पत्ती डाल दें।

बेहतर स्वाद और संघटन को ध्यान में रखते हुए इसमें एक कप दूध भी मिला दें।

इस मिश्रण को कुछ देर तक ठीक से उबालें।

इसमें एक चम्मच अलसी का पाउडर मिला दें।

अब इस चाय को छान लें और औषधि के रूप में पिएं।

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अलसी का बाह्य उपयोग - External Use of Alsi in Hindi

त्वचा से संबंधित समस्याओं के उपचार हेतु या उसे सेहतमंद बनाए रखने के लिए अलसी के पाउडर अथवा तेल का इस्तेमाल किया जाता है।

 

● अलसी पाउडर

अलसी के पाउडर का शहद या गुलाब जल में पेस्ट बनाकर प्रयोग किया जाता है। अलसी का बना फेस पैक चेहरे पर इस्तेमाल करने से त्वचा के दाग-धब्बे मिटते हैं और वह स्वस्थ बनती है।

टिप्स:

आधा या एक चम्मच अलसी का पाउडर गुलाब जल में मिला लें।

इस पेस्ट को प्रभावित भाग या चेहरे तथा गरदन पर लगाएं।

इसे 5-7 मिनट तक लगा रहने दें।

सूखने के बाद अच्छी तरह से धो लें।

चेहरे को सूखा कर उस मोस्राइजर का इस्तेमाल करें।

 

● अलसी का तेल

त्वचा को सुंदर बनाने तथा उसे मोस्राइज करने के लिए चेहरे और गरदन पर अलसी के तेल की मालिश करनी चाहिए।

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अलसी के दुष्प्रभाव - Side Effects of Alsi in Hindi

हालांकि अलसी में स्वास्थ्य को लाभ या फायदे पहुंचाने वाले अनेक गुण मौजूद पाए जाते हैं मगर फिर भी इसके अति उपभोग या उपयोग के कुछ दुष्प्रभाव भी देखे जाते हैं। इसके दुष्प्रभाव अधिकांशतः उदर से संबंधित समस्याओं से ग्रस्त लोगों, गर्भवती महिलाओं, मधुमेह रोगियों, स्तनपान कराने वाली महिलाओं आदि में देखे जाते हैं। विज्ञान तथा आयुर्वेद दोनों ही के विशेषज्ञ  इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन निषेध बताते हैं और चिकित्सक के परामर्शानुसार सेवन करने का सुझाव देते हैं, क्योंकि इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे कि डायरिया आदि का कारण बन सकता है। अलसी या फलैक्स सीड्स अपनी गुरु या भारी प्रकृति के कारण पचने में मुश्किल होते हैं।

 

अलसी के उपयोग से संबंधित कुछ प्रमुख सावधानियां - Some of the major precautions related to the use of Alsi in Hindi

● मधुमेह के रोगियों के लिए- आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक़ आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अलसी की प्रकृति तिक्त या कटु होती है। अतः यह शरीर में निम्न रक्त शर्करा लेवल का कारण बन सकती है। इसीलिए अगर आप मधुमेह रोधी दवाइयों के सेवन के साथ-साथ अलसी का सेवन भी कर रहे हैं तो अपने रक्त शर्करा के लेवल की नियमित रूप से जांच कराते रहें।

 

● गर्भवती महिलाओं के लिए- आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक़ गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त सावधानियां रखने की जरूरत होती है। अलसी की तासीर बहुत गरम या उष्ण होती है। अतः इसका सेवन करने से पूर्व चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य समझना चाहिए। 

 

● स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए- स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अलसी के सेवन से परहेज करना चाहिए। अगर इसका सेवन करना भी पड़े तो चिकित्सक के परामर्श के बाद ही करना चाहिए।

 

● ह्रदय रोगियों के लिए- अलसी में वात को संतुलित करने वाले गुण मौजूद पाए जाते हैं और  इसी कारण यह रक्तचाप को तेजी से कम करती है। अतः आयुर्वेदिक विशेषज्ञ यह सुझाव देते हैं कि अति रक्तचाप को नियंत्रित करने वाली दवाइयों का सेवन करने वाले व्यक्ति को अलसी के सेवन के दौरान अपने रक्तचाप की नियमित जांच कराते रहना चाहिए।

 

● अति संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए- ऐसे लोग जिन्हें एलर्जी की शिकायत रहती हो अलसी का अपनी त्वचा पर इस्तेमाल शहद, दूध या गुलाब जल में मिलाकर ही करना चाहिए, क्योंकि अपनी उष्ण या गरम तासीर की वजह से  यह गंभीर एलर्जी का कारण बन सकती है। 

 

● अन्य सावधानियां- अलसी रक्त में थक्के जमने की प्रक्रिया को धीमी कर सकती है।अतः इसका सेवन चिकित्सक की देखरेख में करना अनिवार्य है। आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अलसी गुरु या भारी प्रकृति की होती है और इसी वजह से यह आंतों की चाल को बाधित कर पाचन मार्ग में अवरुद्ध पैदा कर सकती है। अतः इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए इसके सेवन के दौरान प्रचुर या पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।

अलसी के साबुत या कच्चे बीजों को पचाना मुश्किल होता है। अतः इसके बीजों को भूनकर तथा उन्हें पीसकर भोजन में मिलाकर उपभोग करना उचित रहता है।

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अलसी से संबंधित प्रश्नोत्तर - Alsi Related FAQ's in Hindi

प्र. अलसी में कौन-कौन से तत्व मौजूद होते हैं?

उ. अलसी में पोषक तत्व तथा रासायनिक यौगिक प्रचुर मात्रा में उपस्थित पाए जाते हैं। इसमें शर्करा, लिनोलिक एसिड, ओलिक एसिड, कैफेरोन, सिटोस्टेरोल, फिनायलप्रोपनायड, फ्रुक्टोस तथा लिनमैरीन आदि निहित पाए जाते हैं। इसके ये सभी तत्व इसमें एंटीडायबिटिक, उपचारात्मक, एंटीहाइपरटेंशिव, तथा अन्य औषधीय गुण पैदा करते हैं।

 

प्र. बाजार में अलसी के कितने ब्रांड तथा प्रकार उपलब्ध पाए जाते हैं?

उ. बाजार में अलसी के बीज, तेल, कैपसूल आदि उपलब्ध पाए जाते हैं। बाजार में मिलने वाले इसके कुछ प्रमुख ब्रांड टोटल एक्टिवेशन, श्री श्रीसत्व,  ओर्गेनिक इंडिया, केवा, न्यूट्रो एक्टिव, 24मंत्रा, रिच मिलेट, नेचर्स वे आदि मिलते हैं। 

 

प्र. क्या अलसी व्यक्ति की सेहत के लिए अच्छी होती है?

उ. अलसी व्यक्ति की सेहत के लिए फायदेमंद होती है क्योंकि यह कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार में मदद करती है। इसमें फाइबर, लिगनेन, ओमेगा 3फैटी एसिड आदि उपस्थित पाए जाते हैं जो रक्त शर्करा तथा रक्त कोलेस्ट्रॉल के लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसमें एंटी-कैंसर तथा एंटीऑक्सीडेंट गुण भी उपस्थित पाए जाते हैं।

 

प्र. क्या अलसी ब्लड थिनर या विरलक का काम करती है? 

उ. अलसी में ओमेगा 3फैटी एसिड मौजूद पाया जाता है। अलसी में इस तत्व की उपस्थिति इसे एक प्राकृतिक ब्लड थिनर या विरलक का रूप देती है।

 

प्र. क्या शरीर में हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए उपभोग कर सकते हैं?

उ. आधुनिक विज्ञान के मुताबिक अलसी हार्मोन्स को संतुलित करने में खास भूमिका निभाती है। अलसी का सेवन हार्मोन्स उपापचय को संतुलित करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा यह रक्त में प्रोलेक्टिन के लेवल को बढ़ाती और एस्ट्राडियोल के लेवल को कम करती है। इससे हार्मोन्स संतुलित होते हैं और रजो निवृत्ति के उपचार में मदद मिलती है।

 

प्र. क्या अलसी त्वचा को रेडिएशन से बचाने में मदद करती है?

उ. अलसी में फोटोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद पाए जाते हैं जो सूर्य की पैराबैंगनी किरणों से बचाने के लिए एक सुरक्षा छत्रक का काम करते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की कोशिकाओं की क्षति से बचाव करते हैं और फ्री-रेडिकल्स को नष्ट करने में मदद करते हैं।

 

प्र. क्या अलसी बालों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है?

उ. अलसी में एंटीबैक्टीरियल तथा एंटीऑक्सीडेंट मौजूद पाए जाते हैं जो बालों के फालिकिल्स या कूप को स्वस्थ बनाते हैं तथा साथ ही बालों की रूसी से छुटकारा दिलाने में भी मदद करते हैं। फिर भी विज्ञान द्वारा यह बात प्रमाणित नहीं है मगर फिर भी बालों के लिए उत्पाद बनाने वाले प्रसधान सामग्री तैयार करने वाले उद्योग इसका इस्तेमाल करते हैं।

 

प्र. अलसी में कौन से एंटीऑक्सीडेंट उपस्थित पाए जाते हैं?

उ. अलसी में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व मौजूद पाए जाते हैं और इसी कारण अलसी के बीजों को एंटीऑक्सीडेंट की प्रकृति का धनी माना जाता है। इसमें मौजूद लिगनेन, फेनोलिक एसिड तथा टोकोफैरोल्स इसे एंटीऑक्सीडेंट होने का दर्जा प्रदान करते हैं। ये सभी यौगिक मिलकर संयुक्त रूप से फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाली कोशिकाओं की क्षति से बचाव करने में समर्थ होते हैं।

 

प्र. अलसी आर्ट्रिज या धमनियों के लिए किस प्रकार फायदेमंद होती है?

उ. आयुर्वेद के अनुसार उष्ण तथा रेचन या विरेचक प्रकृति की होती है। इसी कारण यह रक्त में आम या टोक्सिन को नियंत्रित करती है। इसके अलावा यह पाचन तंत्र में सुधार करके मल विसर्जन को सरल बनाती है। अतः इसीलिए इसे धमनियों के लिए बेहतर माना जाता है।

 

प्र. अलसी का तेल सेहत के लिए कैसे फायदेमंद होता है?

उ. आयुर्वेद के अनुसार अलसी में उष्ण तथा ग्राही या अवशोषण के गुण मौजूद पाए जाते हैं। अतः इसी कारण यह विभिन्न प्रकार के रोगों, जैसे- कब्ज,  हाइपरटेंशन, ह्रदय से संबंधित रोगों आदि के उपचार में मदद करती है। इसका स्तम्मक गुण त्वचा से जुड़ी समस्याओं के निराकरण में मदद करता है। यह बालों को मजबूत कर उनकी वृद्धि में योग देती है।

 

प्र. अलसी के भूने हुए बीज सेहत के लिए कैसे फायदेमंद होते हैं?

उ. अलसी के भूने हुए बीज सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। यह  ओमेगा 3एसिड, फाइबर तथा लिगनेन आदि से भरपूर होती है और  इसी वज़ह से इसके भूने हुए बीज मधुमेह, हार्ट अटैक,  आर्थ्राइटिस और अन्य प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से राहत प्रदान करते हैं। इसमें विटामिन ए तथा ई भी निहित पाया जाता है। इसके भूने हुए बीजों का सेवन शरीर में पाचक अग्नि की वृद्धि करता है और मरोड़, दर्द, सूजन एवं आंतों की अन्य कई समस्याओं से छुटकारा भी दिलाता है।

 

संदर्भ:

https://main.ayush.gov.in/sites/default/files/Ayurvedic%20Pharmacopoeia%20of%20India%20part%201%20volume%20IX.pdf

http://www.ayurveda.hu/api/API-Vol-1.pdf

https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4152533/

https://www.phytojournal

consult with ayurveda doctor.
डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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