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ल्यूकोडर्मा के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपाय - Leukoderma Ke Karan, Lakshan Aur Upchar

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By Dr. Bhawana Bhatt | 29-Dec-2020

Leukoderma

ल्यूकोडर्मा (Leukoderma) एक प्रकार का त्वक विकार है जिसमे शरीर के कुछ हिस्से की या संपूर्ण शरीर की त्वचा अपने प्राकृतिक  रंग को खो देती है अर्थात त्वचा (skin) में सफ़ेद रंग के पैचेज बन जाते हैl एक अन्य त्वक विकार विटिलिगो (Vitiligo) में भी शरीर पर सफ़ेद रंग के पैचेज बन जाते है परन्तु वह ल्युकोडेर्मा से भिन्न होता हैl ल्युकोडेर्मा और विटिलिगो के बीच का यह अल्प अंतर सिर्फ चिकित्सक ही समझ पाते है आम जनमानस तो ल्युकोडेर्मा और विटिलिगो दोनों से सफ़ेद दाग ही समझते हैl इस रोग की शुरुआत में सफ़ेद रंग के पैचेज पहले एक छोटे हिस्से तक ही सिमित रहते है लेकिन समय व्यतित होने के साथ साथ काफी बड़े हिस्से में विस्तृत हो जाते हैl

आयुर्वेद में ल्यूकोडर्मा

आयुर्वेद में ल्यूकोडर्मा को किलास  के नाम से जाना जाता है जो वात और पित्त दोष की विकृति से होता हैl यह एक ऐसा रोग है जिसमे रोगी को शारीरक रूप से कोई दर्द आदि कष्ट न होकर तनाव आदि मानसिक कष्ट ज्यादा  होता हैl

ल्यूकोडर्मा के लक्षण 

1-हाथ मुँह होंठ तथा बाजू की त्वचा में सफ़ेद रंग के पैचेज होना

2-पलकों मूंछ और सर के बालों का असमय सफ़ेद होना

चिकत्सीय परामर्श कब ले?

चूँकि इस व्याधि में रोगी को किसी भी प्रकार की शारीरिक पीड़ा नहीं होती है इसलिए रोगी का ध्यान इस पर नहीं जाता I अतः दूसरे व्यक्ति द्वारा बताये जाने पर या स्वयं से ही खुद की त्वचा के प्राकृतिक रंग में कोई भी परिवर्तन दिखाई देने पर या शरीर में कहिं पे भी सफ़ेद दाग दिखाई देने पर शीघ्र ही चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिएl

ल्यूकोडर्मा के कारण 

1-आग से जल जाना 
2-दुर्घटना होने पे शरीर की त्वचा का कट जाना 
3-कई प्रकार की त्वक विधि जैसे एक्जिमा,सोरायसिस 
4-ऑटो इम्यून डिसऑर्डर्स जैसे थाइरोइड की विकृति 
5-कुछ दवाई के दुष्प्रभाव स्वरुप  

ल्यूकोडर्मा से बचाव 

1-अत्यधिक मात्रा में खट्टी चीजों का सेवन करने से बचेl
2-मांसाहार के साथ दूध या दूध से बने खाद्य पदार्थ न ले 

ल्यूकोडर्मा के लिए डायग्नोसिस 

1-स्किन बायोप्सी  
2-ब्लड टेस्ट  

ल्यूकोडर्मा के लिए घरेलू उपाय 

1-नीम के तेल की दो तीन बूँद को रूई के फाहे की सहायता से त्वचा में उपस्थित सफ़ेद दाग के ऊपर लगाकर तीस मिनट बाद पानी से धो ले 
2-एक चम्मच हल्दी को एक चम्मच सरसो के तेल में मिलाकर त्वचा में लगाकर तीस मिनट के लिए छोड़ दे और फिर पानी से धो दे 

ल्यूकोडर्मा में क्या करे 

1-साधारण नमक के स्थान पर सैंधव नमक का प्रयोग करे 
2-करेला अनार आदि पित्त शामक चीजों को आहार में शामिल करे
3-पर्याप्त मात्रा में जल पिए 
4-मानसिक शांति के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करे

ल्यूकोडर्मा में क्या न करे? 

1-खट्टी चीजों का सेवन न करे 
2-दही का सेवन न करे 
3-मांसाहार का सेवन न करे
4-अल्कोहल चाय कॉफ़ी का सेवन न करे 
5-अत्यधिक गर्म और ठंडी चीजों से बचे

प्रश्न उत्तर 

प्रश्न - ल्यूकोडर्मा​ के लिए उपलब्ध सबसे अच्छा उपचार क्या है? 
उत्तर -ल्यूकोडर्मा​ के लिए सबसे अच्छा उपचार है अपने आहार विहार अच्छा रखना विरुद्धाहार (जैसे दूध और मछली उड़द की दाल और दूध मूली और दूध को एक साथ मिलकर खाना) का सेवन न करना।
 
प्रश्न- ल्यूकोडर्मा​ का मुख्य लक्षण क्या है? 
उत्तर -ल्यूकोडर्मा का मुख्य लक्षण यह है की इसमें त्वचा अपने प्राकृतिक रंग को खो देती है तथा शरीर में सफ़ेद रंग के पैचेज अर्थात सफ़ेद दाग हो जाते है । 
 
प्रश्न - ल्यूकोडर्मा​  और विटिलिगो में क्या अंतर है? 
उत्तर- ल्यूकोडर्मा और विटिलिगो दोनों में ही त्वचा अपने प्राकृतिक रंग को खो देती है लेकिन दोनों में अंतर होता है ल्यूकोडर्मा में होने वाले सफ़ेद दाग का कारण आग से जल जाना, सड़क दुर्घटना में त्वचा का कट जाना आदि कारणों से  मिलेनिन हार्मोन बनाने वाली मिलेनोसाईट सेल्स का नष्ट हो जाना है  जबकि  विटिलिगो में होने वाले सफ़ेद दाग का कारण ऑटो इम्यून डिसऑर्डर के कारण मिलेनिन हार्मोन बनाने वाली मिलेनोसाईट सेल्स का नष्ट हो जाना है। 
 
प्रश्न - क्या ल्यूकोडर्मा​  का स्थाई उपचार संभव है ? 
उत्तर - ल्यूकोडर्मा का स्थाई उपचार तो संभव नहीं है लेकिन ऐसे दवाई जरूर उपलब्ध है जो ल्युकोडेर्मा की अवस्था को और ज्यादा बढ़ने से रोक देती है । 
 
प्रश्न - ल्यूकोडर्मा​  के केस में आयुर्वेदिक उपचार कितना कारगर है ? 
उत्तर - ल्यूकोडर्मा के केस में आयुर्वेदिक उपचार कारगर तो है लेकिन तभी जब रोगी चिकित्सक द्वारा बताई गई दवाई के साथ साथ चिकित्सक द्वारा बताये गए पथय अपथय का भी पालन करे ।
ल्यूकोडर्मा का आयुर्वेदिक उपचार
डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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