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अमेरिका ने भी माना गौमूत्र को अमृत, फायदे जानकर रह जायेंगे हैरान - Gomutra Benefits in Hindi

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By NS Desk | 11-Feb-2019

gomutra

अमेरिका ने भी माना गोमूत्र को अमृत, फायदे जानकर रह जायेंगे हैरान

आयुर्वेद में गोमूत्र की तुलना अमृत से - Gomutra (Cow Urine) in Ayurveda

आयुर्वेद में गोमूत्र को अमृत कहा गया है, बीमारियों को रखता है दूर - विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में गौमूत्र (cow urine) को औषधि का स्थान प्राप्त है और इसे अमृत या जीवन का जल ( water of life ) कहा गया है. कई औषधियों के निर्माण में इसका उपयोग किया जाता है. सुश्रुत संहिता में गोमूत्र को पशु उत्पत्ति (animal origin) का सबसे प्रभावी पदार्थ बताया गया है. इसे पंचगव्य घृत के पांच अवयवों में से एक महत्वपूर्ण अवयव माना गया है. पंचगव्य गाय के मूत्र, दूध, घी, दही और गोबर से तैयार होती है और औषधीय गुणों से भरपूर होती है. इसका प्रयोग कई रोगों से लड़ने या औषधि में प्रयोग किए जाने वाले जड़ी-बूटियों के साथ मिलाकर किया जाता है. इस तरह के अनोखे उपचार को काउपथी या पंचगव्य पथरी कहा जाता है और यह मधुमेह, कैंसर और एड्स जैसी घातक बीमारियों के लिए भी फायदेमंद बताया गया है.

गोमूत्र के महत्व को अमेरिका ने भी माना - Gomutra (Cow Urine) Importance

अमेरिका जैसे विकसित देशों ने भी गोमूत्र को महत्व को स्वीकार है. नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन और यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (national center for biotechnology information u.s. national library of medicine) की वेबसाईट पर दी हुई जानकारी के मुताबिक़ गोमूत्र को इसके औषधीय गुणों के लिए यूएस पेटेंट (सं. 6,896,907 और 6,410,059) प्रदान किया गया है. वहां हुए रिसर्च में भी इसे जैव बढ़ाने वाला (bioenhancer) एंटीबायोटिक (antibiotic), एंटिफंगल (antifungal) और एंटीकैंसर (anticancer) माना गया है.

भारत में गोमूत्र पीने की पुरानी परम्परा - Gomutra (Cow Urine) in India 

भारत में हजारों वर्षों से गोमूत्र पीने का चलन है और इसका उपयोग प्राचीन काल से ही कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है। आयुर्वेद साहित्य में में कुष्ठ, शूल, उदर रोग, उदर शूल,पेट फूलना आदि के उपचार के लिए इसके महत्व और उपयोगों का उल्लेख मिलता है. चर्म रोग, पेट के रोग, गुर्दे के रोग, हृदय रोग, पथरी, मधुमेह, लीवर की समस्या, पीलिया, एथलीट फुट, सिस्ट, रक्तस्राव आदि के उपचार में भी इसका महत्व प्रमाणित हो चुका है.

गोमूत्र के तत्व - Gomutra (Cow Urine) Elements

गोमूत्र में पानी 95%, यूरिया 2.5%, खनिज, नमक, हार्मोन और एंजाइम 2.5% हैं। इसमें लोहा, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, यूरिया, यूरिक एसिड, अमीनो एसिड, एंजाइम, साइटोकिन और लैक्टोज आदि शामिल हैं.

गोमूत्र का धार्मिक महत्व - Gomutra (Cow Urine) Releigious Importance 

भारतीय परम्परा में गाय को पवित्र माना जाता है और पूजा की जाती है. साथ ही यह माना जाता है कि गाय में 36 करोड़ देवी देवताओं का निवास होता है। गोबर व गोमूत्र का उपयोग धार्मिक कार्यों में प्राचीनकाल से किया जा रहा है. शास्त्रों में अनुसार गौमूत्र में गंगा जी वास करती हैं और इसे पीने से पापों का तो नष्टह होता ही है और साथ में बीमारियों भी ठीक हो जाती हैं।

गोमूत्र का चिकित्सीय उपयोग - Gomutra (Cow Urine) : Therapeutic uses of cow urine in Hindi

1- त्वचा रोग: यह सभी प्रकार की त्वचा की समस्याओं, खुजली, धूप की कालिमा, एक्जिमा, सोरायसिस, मुँहासे आदि में बहुत मददगार है।

2- पेट, किडनी और दिल की बीमारियाँ: गाय का गोबर और मूत्र पेट की बीमारियों, दिल की बीमारियों, गुर्दे की बीमारियों और तपेदिक के लिए सबसे अच्छा इलाज है।

3- कैंसर और मधुमेह: गोमूत्र मधुमेह, मिर्गी और माइग्रेन के रोगियों के लिए भी उपयोगी है. इसके अलावा कैंसर और एड्स जैसी बीमारियों को भी ठीक करने की क्षमता इसमें मौजूद है.

4- वात, पित्त और कफ: आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ त्रिदोष के कारण हम बीमार होते हैं. गोमूत्र पीने से त्रिदोषों का नाश होता है और बीमारियों से हमारा बचाव होता है.

5- रक्त: गोमूत्र हमारे खून को साफ़ करता है जिससे कई बीमारियों की चपेट में आने से हम बच जाते हैं. एनीमिया रोग में ये कारगर होता है.

6- जोड़ों के दर्द में लाभकारी: अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान है तो गौमूत्र आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। जोड़ों के दर्द में दर्द वाले स्थान पर गौमूत्र से सेकाई करने से आराम मिलता है।

(निरोग स्ट्रीट पर प्रकाशित लेखों का उद्देश्य आयुर्वेद से संबंधित जानकारी देना और जागरूकता पैदा करना है. कृपया चिकित्सक की राय लेकर ही किसी प्रकार की चिकित्सा करे.)

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consult with ayurveda doctor.
डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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