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ओडिशा जिले में एनसीडी वाले लोगों को महामारी के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है: अध्ययन

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By NS Desk | 09-Aug-2021

भुवनेश्वर, 9 अगस्त (आईएएनएस)। ओडिशा के खोरधा जिले में कोविड-19 महामारी के दौरान पुरानी गैर-संचारी बीमारियों (एनसीडी) से पीड़ित लोगों को स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंचने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। यह बात एक अध्ययन से सामने आई है।

आईसीएमआर-क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) और कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (केआईएमएस) ने संयुक्त रूप से मई-जून 2020 के दौरान ओडिशा के खोरधा जिले में मिश्रित-विधि अध्ययन किया। रिपोर्ट सोमवार को प्रकाशित हुई थी।

अध्ययन में कम से कम एक एनसीडी वाले कुल 491 व्यक्तियों ने भाग लिया। इनमें 51 फीसदी (252) पुरुष थे।

अध्ययन से पता चला कि लगभग दो-तिहाई प्रतिभागियों को अपनी नियमित जांच (69 प्रतिशत) में चुनौतियों का सामना करना पड़ा; जबकि 67 फीसदी को डे-केयर प्रक्रियाओं में और 61 फीसदी को अस्पताल पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

इसी तरह, लगभग 59 प्रतिशत प्रतिभागियों ने डॉक्टर नियुक्तियों में समस्याओं की सूचना दी, 56 प्रतिशत को आपातकालीन उपचार में चुनौतियों का सामना करना पड़ा, 47 प्रतिशत ने फार्मेसी तक पहुंच और 46 प्रतिशत प्रतिभागियों की स्वास्थ्य सेवा में देरी हुई।

इस बीच, 37 प्रतिशत ने माना कि वे सामाजिक प्रतिबंध/लॉकडाउन के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकते हैं, 29 प्रतिशत ने अस्पतालों में जाने के लिए एक बाधा के रूप में वित्त की व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया और 16 प्रतिशत ने कोविड -19 संक्रमण के डर से अस्पताल जाने से परहेज किया।

उन्होंने कहा, गुणात्मक निष्कर्षों से पता चला है कि महामारी की शुरूआत से पहले, प्रतिभागियों ने नियमित रूप से अस्पतालों या चिकित्सकों का दौरा करके अपनी एनसीडी स्थितियों का प्रबंधन किया। लगभग सभी ने अपने नियमित उपचार को कोविड -19 के खतरे की तुलना में महामारी के दौरान कम प्राथमिकता के रूप में माना है।

एक से ज्यादा गैर-संचारी रोगों के साथ शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने एक ही एनसीडी स्थिति वाले ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की तुलना में डॉक्टर से परामर्श करने में काफी अधिक चुनौती की सूचना दी।

एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि उत्तरदाताओं (96 प्रतिशत) के बीच पारिवारिक नेटवर्क समर्थन का प्राथमिक स्रोत थे, जबकि लगभग तीन प्रतिशत अपने दोस्तों और पड़ोसियों पर निर्भर थे।

इनमें भाग लेने वाले कुछ रोगियों ने टेलीकंसल्टेशन का फायदा उठाने का प्रयास किया या टेलीफोन या इंटरनेट-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने चिकित्सकों से परामर्श किया। हालांकि, टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म पर एक नए चिकित्सक से संपर्क करते समय उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड और उपचार की पृष्ठभूमि की जानकारी की अनुपलब्धता एक बड़ी चुनौती थी।

--आईएएनएस

एसएस/आरजेएस

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डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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