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इंडोनेशिया में कोविड के बढ़ने से बच्चों की मौतें बढ़ी

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By NS Desk | 26-Jul-2021

जकार्ता, 26 जुलाई (आईएएनएस)। इंडोनेशिया में कोविड-19 के कारण सैकड़ों बच्चों की मौत हो गई है, जिनमें से कई 5 साल से कम उम्र के हैं।

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि इंडोनेशिया में किसी भी अन्य देश की तुलना में कोविड के कारण बाल मृत्यु दर ज्यादा है।

इंडोनेशियाई बाल चिकित्सा सोसायटी के प्रमुख डॉ अमन भक्ति पुलुंगन के हवाले से कहा गया कि अकेले 12 जुलाई के सप्ताह के दौरान कोविड-19 से 150 से ज्यादा बच्चों की मौतें हुई है। हाल ही में हुई मौतों में से आधी 5 साल से कम उम्र के बच्चों की हुई हैं।

पुलुंगन ने बाल रोग विशेषज्ञों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश के पुष्ट मामलों में 12.5 प्रतिशत बच्चे हैं, जो पिछले महीनों की तुलना में ज्यादा है।

उन्होंने कहा हमारी संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है। हम अपने बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ क्यों नहीं दे रहे हैं?

द एनवाईटी ने बताया कि दक्षिण पूर्व एशिया में मौतों में बढ़ोतरी डेल्टा वैरिएंट की वृद्धि के साथ मेल खाती है, जहां टीकाकरण दर कम है, जिससे न केवल इंडोनेशिया में बल्कि थाईलैंड, मलेशिया, म्यांमार और वियतनाम में भी महामारी का रिकॉर्ड प्रकोप हुआ है।

जुलाई में, इंडोनेशिया ने दैनिक मामलों की संख्या में भारत और ब्राजील को पीछे छोड़ दिया, जो महामारी का नया उपरिकेंद्र बन गया है। सरकार ने शुक्रवार को लगभग 50,000 नए संक्रमण और 1,566 मौतों की सूचना दी।

पुलुंगन के अनुसार, महामारी शुरू होने के बाद से इंडोनेशिया में 18 वर्ष से कम उम्र के 800 से अधिक बच्चे वायरस से मर चुके हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश मौतें पिछले महीने ही हुई हैं।

गैर-लाभकारी समूह सेव द चिल्ड्रन के एशिया स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. यासिर अराफात ने कहा, अब तक, बच्चे इस महामारी के छिपे हुए शिकार रहे हैं। अब और ऐसा नहीं होगा।

यासिर ने कहा, इंडोनेशिया जैसे देश न केवल वायरस से मरने वाले बच्चों की रिकॉर्ड संख्या देख रहे हैं, बल्कि हम नियमित टीकाकरण और पोषण सेवाओं से गायब बच्चों में भी खतरनाक वृद्धि देख रहे हैं,जो उनके अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि बच्चों में मौतों की संख्या कुपोषण, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों के कारण हो सकती है।

देश की कम टीकाकरण दर एक अन्य कारक है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अवर वल्र्ड इन डेटा प्रोजेक्ट के अनुसार, केवल 16 प्रतिशत इंडोनेशियाई लोगों को एक खुराक मिली है और केवल 6 प्रतिशत को पूरी तरह से टीका लगाया गया है।

--आईएएनएस

एसएस/आरजेएस

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डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।
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