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जर्मन दूतावास में निरोगस्ट्रीट भारत-जर्मनी आयुर्वेद संगोष्ठी

By NirogStreet Desk| posted on :   04-May-2019| Nirogstreet News

जर्मन दूतावास में निरोगस्ट्रीट का कार्यक्रम, आयुर्वेद के क्षेत्र में संभावनाओं की तलाश

दिल्ली. जर्मन दूतावास और निरोगस्ट्रीट के साझा प्रयास से चाणक्यपूरी स्थित जर्मन दूतावास में आयुर्वेद को लेकर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में जर्मन सांसद डॉ. रॉबी श्लुण्ड (DR. Robby Schlund) मौजूद थे. डॉ. रॉबी स्वयं आयुर्वेद के न सिर्फ प्रशंसक हैं बल्कि जर्मनी में एक आयुर्वेद चिकित्सा केंद्र भी चलाते हैं. संगोष्ठी में आयुर्वेद को लेकर दोनों देशों के बीच संभावनाओं पर विस्तृत परिचर्चा हुई. इसमें देश के विख्यात वैद्य देवेन्द्र त्रिगुणा समेत देश के जाने-माने कई आयुर्वेद डॉक्टरों ने हिस्सा लिया और संगोष्ठी में अपनी बात रखी. भारत में जर्मन एम्बेसी के काउंसिलर एवं जर्मनी के सामाजिक और श्रम मंत्रालय के सलाहकार और संसद सदस्य मि. टिमोथस फेल्डर-रूसिस ने भी अपनी बात रखी. संगोष्ठी में चर्चा के केंद्र में रहा कि मौजूदा परिस्थितियों में आयुर्वेद को कैसे जर्मनी में सामान्य जनमानस के बीच पहुंचाया जाये!

जर्मन सांसद डॉ. रॉबी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जर्मनी में अभी लोग आयुर्वेद से मतलब सिर्फ मसाज चिकित्सा समझते हैं. इसकी बड़ी वजह ये है कि अभी वहां आयुर्वेद से जुड़े लोग सिर्फ स्पा खोलने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. इससे बहुत लोग आयुर्वेद को लेकर अलग तरह की धारणा बना रहे हैं और इसे सिर्फ वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति मानते हैं. यही वजह है कि वहां लोग आयुर्वेद को गंभीरता से नहीं ले रहे. इसके लिए जागरूकता फ़ैलाने की जरुरत है. दिक्कतों के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां कई तरह की क़ानूनी समस्याएं भी हैं जिसके कारण आयुर्वेद को वहां की सरकार के साथ मिलकर जमीनी स्तर तक पहुंचाने में कई वर्ष लग जायेंगे, लेकिन एक अच्छी चीज़ यह भी है कि वहां के मुख्य चिकित्सा पद्धति में कार्य करने वाले लोग आयुर्वेद को लेकर बेहद सकारात्मक हैं। इसके पहले डॉ. रॉबी ने 'नमस्कार' से अभिवादन कर अपने उद्बोधन की शुरुआत की.

संगोष्ठी में तकरीबन 20 आयुर्वेद चिकित्सकों ने अपनी बात रखी. उन्होंने नेत्र चिकित्सा, शल्य, मर्म, क्षारसूत्र, कर्ण वेधन, पंचकर्म, काय चिकित्सा आदि आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र के बारे में जर्मनी के शिष्टमंडल को अवगत कराया. अंत में आम सहमति बनी कि गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर जर्मनी में आयुर्वेद की संभावनाओं को तलाशा जाए और विचारों का आदान-प्रदान हो.

निरोगस्ट्रीट की तरफ से राम.एन. कुमार ने अपनी बात रखी और आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के लिए ऐसे और भी संगोष्ठीयों के आयोजन और विचारों के आदान-प्रदान पर जोर दिया.


NirogStreet Desk

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