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किडनी को स्वस्थ्य रखने के सात उपाय

By Ram N Kumar| posted on :   12-Mar-2019| Nirog Tips

किडनी मानव शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। किडनी की खराबी, किसी गंभीर बीमारी या मौत का कारण भी बन सकता है। इसकी रचना और कार्य अत्यंत जटिल हैं। यह शरीर से विषैले और हानिकारक पदार्थों को निकालता है। यह शरीर का खून साफ कर पेशाब बनाती है और उसे मूत्रवाहिनी (Ureter), मूत्राशय (Urinary Bladder) और मूत्रनलिका (Urethra) के द्वारा बाहर निकाल देती है। किडनी शरीर के लिए जरूरी पानी की मात्रा को रखते हुए अधिक जमा हुए पानी को पेशाब के द्वारा बाहर निकाल देती है। लेकिन जब किडनी ख़राब हो जाती हैं तो वे अतिरिक्त पानी शरीर के बाहर नहीं निकल पाता जिससे शरीर में सूजन की समस्या हो जाती है। शरीर की दोनों किडनीयों में प्रति मिनट 1200 मिली लिटर खून स्वच्छ होने के लिए आता है जो हृदय द्वारा शरीर में पहुँचनेवाले समस्त खून के बीस प्रतिशत के बराबर है। इस तरह 24 घंटे में अनुमानत: 1700 लिटर खून का शुद्धीकरण होता है। इसलिए जरुरी है कि किडनी की देखभाल की जाए और इसे किसी बीमारी या संक्रमण से बचाया जाए। यहाँ किडनी को स्वस्थ रखने के कुछ उपाय बताये जा रहे हैं जिसका अनुपालन कर हम अपनी किडनी को दुरुस्त रख सकते हैं -

1. व्यायाम से रहे फिट :

नियमित रूप से एरोबिक व्यायाम और दैनिक शरीरिक गतिविधियाँ, रक्तचाप को सामान्य रखने में और रक्त शर्करा को नियंत्रण करने में मदद करती हैं। इस तरह शरीरिक गतिविधियाँ, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के खतरे को कम कर देती है और इस प्रकार सी। के। डी। (Chronic kidney disease - CKD) के जोखिम को कम किया जा सकता है।

2- संतुलित आहार :

ताजे फल और सब्जियों युक्त आहार लें। आहार में परिष्कृत खाघ पदार्थ, चीनी, वसा और मांस का सेवन घटाना चाहिए। वे लोग जिनकी उम्र 40 के ऊपर है, भोजन में कम नमक लें जिससे उच्च रक्तचाप और किडनी की पथरी के रोकथाम में मदद मिले।

3. संतुलित वजन :

स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम के साथ अपने वजन का संतुलन बनाए रखें। यह मधुमेह, ह्रदय रोग और सी।के।डी। के साथ जुड़ी अन्य बीमारियों को रोकने में सहायक होता है।

4. धूम्रपान और तंबाकू से बचे :

धूम्रपान करने से एथीरोस्क्लेरोसिस होने की संभावना हो सकती है। यह किडनी में रक्त प्रवाह को कम कर देता है। जिससे किडनी की कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है। अध्ययनों से यह भी पता चला हैं की धूम्रपान के कारण उन लोगों में जिनके अंतर्निहित किडनी की बीमारी है या होने वाली है, उनके किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट तेजी से आती है।

5. दर्द निवारक दवाओं से सावधान :

लम्बे समय तक दर्द निवारक दवाई लेने से किडनी को नुकसान होने का भी भय रहता है। सामान्यतः ली जाने वाली दवाओं में दवाई जैसे आईब्यूप्रोफेन, डायक्लोफेनिक, नेपरोसिन, आदि किडनी को क्षति पहुँचाते हैं जिससे अंत में किडनी फेल्योर हो सकता है। अपने दर्द को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर से परामर्श लें और अपनी किडनी को किसी भी प्रकार से खतरे में न डालें।

6. पानी पर्याप्त मात्रा में पीएं :

रोज 3 लीटर से अधिक (10-12 गिलास) पानी पीएँ। पर्याप्त पानी पीने से, पेशाब पतला होता है एवं शरीर से कभी विषाक्त अपशिष्ट पदार्थों को निकलने और किडनी की पथरी को बनने से रोकने में सहायता मिलती है।

7. किडनी की नियमित जांच :

किडनी की बीमारियाँ अक्सर छुपी हुई एवं गंभीर होती है। अंतिम चरण पहुँचने तक इनमें किसी भी प्रकार का लक्षण नहीं दिखता है। किडनी की बीमारियों को रोकथाम और शीघ्र निदान के लिए सबसे शक्तिशाली पर प्रभावी उपाय है नियमित रूप से किडनी का चेक -अप कराना। किडनी का वार्षिक चेक -अप कराना, उच्च जोखिम वाले व्यक्ति के लिए बहुत जरुरी है, जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापे से ग्रस्त हैं। 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से अपने किडनी की जाँच करवाना जरुरी है। किडनी की बीमारी और उसके निदान के लिए सबसे सरल विधि है की साल में एक बार रक्तचाप का माप लेना, खून में क्रीएटिनिन को मापना और पेशाब परीक्षण करवाना।

Ram N Kumar

CEO, NirogStreet

He is a proactive evangelist of Ayurveda whose aim is to make Ayurveda the first call of treatment