Home Blogs Herbs and Fruits प्रकृति का वरदान है तुलसी, आयुर्वेद में विशेष महत्व

प्रकृति का वरदान है तुलसी, आयुर्वेद में विशेष महत्व

By NirogStreet Desk| posted on :   12-Mar-2019| Herbs and Fruits

तुलसी को पवित्र पौधा माना जाता है. धार्मिक दृष्टि से तो इसका महत्व है ही, औषधीय रूप से भी ये बेहद महत्वपूर्ण है. विशिष्ट औषधीय गुणों के कारण तुलसी को आयुर्वेद में अमृत कहा गया है. तुलसी का वानस्पतिक नाम ऑसीमम सैक्टम (Ocimum sanctum) है. संस्कृत में इसे सुरसा, भुतग्नि और तुलसी नाम से पुकारा जाता है. धार्मिक पूजा - पाठ और यज्ञ - अनुष्ठानों में इसका उपयोग किया जाता है और प्रसाद व चनामृत में भी इसके पत्ते डाले जाते हैं. तुलसी की पूजा देवी के रूप में की जाती है. साल में एक बार तुलसी पूजा व तुलसी विवाह का आयोजन भी किया जाता है. भगवान विष्णु की कोई भी पूजा बिना तुलसी के पूरी नहीं मानी जाती.

भारत में यह हर जगह पाया जाता है और इसकी सिर्फ पत्तियां ही नहीं बल्कि बीज, तना, फूल भी पवित्र माने जाते हैं. माना जाता है कि पवित्र तुलसी अपने प्रदूषित हवा को शुद्ध करती है और मच्छरों और मक्खियों आदि को भी दूर रखती है। आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के ढेरों स्वास्थ्य लाभ हैं. यह कफ और वात दोष को दूर करता है. इसके दो प्रकार हैं. हरे रंग की पत्तियों वाले तुलसी को राम तुलसी और कालापन लिए हरी पत्तियों (जिसे बैगनी भी कहा जा सकता है) को कृष्ण तुलसी कहा जाता है. हालाँकि दोनों के औषधीय गुण समान होते हैं.

तुलसी के स्वास्थ्य लाभ :

तुलसी कफ को रोकने में प्रभावी भूमिका निभाता है और इसे बढ़ने से रोकता है. इसमें एंटीवायरल गुण होते हैं जो इसे महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी वाला पौधा बनाती है. पाचन तंत्र पर प्रभाव डालकर यह भूख को जगाने में भी अहम भूमिका निभाता है. कफ के साथ-साथ ये हृदय के लिए भी यह गुणकारी है. चिंता और तनाव को दूर करने में यह सहायक सिद्ध होता है. यह वात को संतुलित करती है और इसलिए पेट में बनने वाली अतिरिक्त गैस को बाहर निकालने में मददगार साबित होती है. इससे पेट दर्द में फायदा होता है. इसमें एंटीमैटिक (antiemetic) गुण भी होते हैं जो उल्टी की प्रवृत्ति को भी दूर करने में मदद करता है। त्वचा रोगों में भी ये ख़ासा फायदेमंद है. यह जलन और खुजली को कम करता है. इसमें डीटॉक्स करने की अदभूत क्षमता है जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है.

गुर्दे की पथरी और आंखों के संक्रमण के इलाज में भी पवित्र तुलसी का उपयोग किया जाता है। अस्थमा के रोगियों के साथ-साथ पुरानी सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों के इलाज के लिए ये जड़ी-बूटी काफी उपयोगी है। इस तरह के औषधीय उपयोग के लिए तुलसी के पौधे की पत्तियों, बीजों और जड़ों का उपयोग किया जाता है। पवित्र तुलसी का उपयोग सिरदर्द, सांसों की दुर्गंध (मुंह से दुर्गंध), वात, साइनसाइटिस (sinusitis) और बुखार के इलाज के लिए भी किया जाता है।

तुलसी का काढ़ा या तुलसी की चाय

तुलसी का काढ़ा सर्दी, खांसी और जुकाम में रामवाण औषधि साबित होता है. यह काढ़ा तुलसी के पत्तों, लौंग और अदरक के साथ बनाया जाता है.

निष्कर्ष -

कई वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि पवित्र तुलसी औषधीय गुणों से भरी हुई है। इसमें बैक्टीरिया और विषाणु को नष्ट करने वाला (antimicrobial), तनाव को कम करने वाला (anxiolytic), एंटीलिपिडेमिक यानी लिपिड को कम करने वाला (antilipidemic), एंटीडायबिटिक (ग्लूकोज कम करना), और एंटीहाइपोटॉक्सिक (यकृत सुरक्षात्मक) आदि गुण पाए जाते हैं.

NirogStreet Desk

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