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IMA को समझना होगा कि आयुर्वेद से उन्हें कोई खतरा नहीं

By NS Desk | Vaidya Street | Posted on :   10-Dec-2020

आयुर्वेद चिकित्सकों के नाम पर IMA के द्वारा की जाने वाली हड़ताल हास्यास्पद! : 11 दिसंबर को IMA के द्वारा आयुर्वेद के स्नाकोत्तर चिकित्सकों को शल्य चिकित्सा के अधिकारों को दिए जाने के विरोध में हड़ताल का एलान करना एक बचकाना कार्य और बहुत ही छोटी सोच को दर्शाता है, ऐसा लग रहा है कि IMA के लोग या तो वास्तविक सत्य के प्रति आंख बंद किये हुए हैं या फिर वे सही सत्य को समझना नहीं चाहते या वे अपने से बेहतर या बराबर किसी अन्य को खड़े देखना नहीं चाहते! 

इनमें से जो भी उनकी स्थिति हो लेकिन वास्तविक सत्य यह है कि शल्य चिकित्सा की उत्पत्ति न सिर्फ आयुर्वेद के आचार्यों ने की है बल्कि बेहद उन्नत और विकसित रूप में उसपर कार्य किया जाता था, आज भी इस सत्य के कई प्रमाण मौजूद हैं।

इसके अतरिक्त जिन चिकित्सकों को यह अधिकार दिए जाने का विरोध किया जा रहा है वे भी 8.5 वर्ष का समय देने के बाद सिर्फ 58 तरह के शल्य क्रियाओं को करने के लिए अधिकृत किये गए हैं, और जो भी यह 58 तरह की शल्य क्रियाओं का अधिकार मिला है उनमें पहले से ही वर्षों से आयुर्वेद की शल्य क्रिया करने वाले चिकित्सकों ने अपनी विधा की श्रेष्ठता सिद्ध की है, उदाहरण के रूप में: अग्निकर्म के माध्यम से वेदना शमन की बात हो या कई तरह के कॉर्न, ग्रंथि आदि का निर्हरण हो या क्षारसूत्र के माध्यम से पाइल्स, फिस्टुला, फिसर पर स्थाई परिणाम देने की बात हो! 

इतना ही नहीं क्षारसूत्र की स्थिति तो यह है की देश के सबसे बड़े ऐलोपैथ के अस्पताल AIIMS या चंडीगढ़ के PGI या विश्व कि सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था WHO सभी ने इस विधि को श्रेष्ठ तो बताया ही है साथ ही इसे अपनाकर रोगियों को बेहतर परिणाम दे रहे हैं! 

★ IMA से जुड़े लोगों को समझना होगा कि उनकी दुकानों पर कोई खतरा नहीं है, बस सामने वाला जिसमें बेहतर है वह अपने कार्यों को प्रसारित करने के लिए अपने स्तर से बेहतर प्रयास कर रहा है! 
★ बाकि यदि IMA से जुड़े लोगों के कुत्सित प्रयासों का बखान किया गया तो वे कहीं खड़े होने की स्थिति में नहीं होंगे उदाहरण के रूप में 80 के दशक के समय में दूसरी अन्य विधाओं के चिकित्सकों के अधिकारों का अतिक्रमण IMA ने बेहद चालाकी से किया जिसमें:

HOTA (Human Organ Transplantation Act ) 
MTP (Medical Termination of Pregnancy Act ) 
PCPNDT Act (Radiology Act)  
Drug & Cosmetic Act में 3 h (1) schedule 

★ इन एक्ट्स को बनाकर बड़ी चालाकी से देश में अन्य पद्धतियों के ऊपर क़ानूनी गुंडागर्दी जैसी तरकीब यह कहकर अपनाई कि इन एक्ट्स या नियमों से जुड़े कार्य सिर्फ IMA से जुड़े लोग ही कर सकते हैं क्योंकि यह इनके पिता जी ने बनाई है, क्या यह अन्यों के अधिकारों का हनन नहीं है?
★ क्या इन सभी चीज़ों का अविष्कार ऐलोपैथ डॉक्टर्स ने किया ? 
या इंजीनियरों ने इनका अविष्कार किया और बाद में चिकित्सा में जरुरत पड़ी इसलिए इनका प्रयोग होने लगा, क्या ऐलोपैथ के अतरिक्त दुनिया में कोई अन्य चिकित्सा नहीं होती या 200 वर्ष पहले जब ऐलोपैथ की फार्मा लॉबी पैदा नहीं हुई थी तब इससे पहले दुनिया में लोगों का उपचार नहीं होता था?
★ ऐसा कौन सा एंटीबायोटिक खोजा गया है जिसके माध्यम से किसी रोग को नष्ट किया गया है उल्टा रिसर्च और एक्सपेरिमेंट के नाम पर देश में आज भी लाखों लोग मेडिकल नेग्लिजेंस के कारण असमान्य मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं! 
★ IMA से जुड़े लोगों को समझना चाहिए प्रत्येक सिस्टम और प्रत्येक चिकित्सा की एक सीमा है, कहीं उनके तरीके कारगर है तो कहीं अन्य पद्धतियों के, आयुर्वेद में कई लोग ऐलोपैथ का प्रयोग करते हैं तो ऐलोपैथ के भी अधिकांश चिकित्सक आयुर्वेद या हर्बल के नाम पर विभिन्न दवाओं का प्रयोग करते हैं, देश में जहाँ जिसकी जरुरत हो वहां उसका इस्तेमाल करना ही बेहतर है! 
★ बाकि बिडंबना यह है कि भारत देश में अंग्रेजो को आंख बंद करके फॉलो करने के कारण हमारे देश के लोग भी अपनी खूबियों को भूल गए या उनको नीची नज़र से ही देखते रहे, लेकिन अब कोरोना के बाद ऐसा समय आया है जब देश और दुनिया को स्वास्थ्य के लिए अन्य बेहतर मौजूद विकल्पों की ओर भी अग्रेसित किया जाये या उन तक पहुंच बनाई जाये! 
★ किसी विषय पर विरोध के लिए बंद का आवाहन करके रोगियों को परेशान करके यह सोचना की हम नहीं तो कोई नहीं या इस कारण से हमारी मांगे मानी जायेंगी, यह बताता है कि अहंकार किस स्तर पर है, विरोध का तरीका कार्य को बंद करने से नहीं स्वयं को सिद्ध करने से होना चाहिए! 
★ वैसे यह बताना चाहता हूँ कि आयुर्वेद के चिकित्सक कोरोना में जिस तरह से देश के सरकरी स्तरों पर या प्राइवेट हॉस्पिटल्स के ICU में ईमानदारी से सेवाएं दिए हैं क्या वैसे ही IMA के तथाकथित महान लोग जमीन पर कर सकते हैं? 
यदि आयुर्वेद के सभी चिकित्सक अपनी सेवाओं का बहिष्कार कर दें तो बड़े-बड़े अस्पताल के सैकड़ों BMW और AUDI गाड़ियों से चलने वाले लोग इनमें चल पाएंगे?
लेकिन अच्छी बात यह है कि देश में किसी भी स्थिति में आयुर्वेद के चिकित्सक अपनी चिकित्सा सेवाएं कभी बंद नहीं करेंगे, हम अपना विरोध स्वयं को सिद्ध करके ही देंगे, और अपनी खूबियों से ही अपनी पहचान में विस्तार करते रहेंगे! 
★ कुछ लोग यह सोचते हैं कि आयुर्वेद के लोगों में एकजुटता की कमी है..अब यह भी देख लीजिये कि हम अपने-अपने स्थानों पर अलग-अलग जरूर बैठे रहते हैं लेकिन जो भी थोड़े-थोड़े भी इकट्ठे होते हैं उनमें चिकित्सा के माध्यम से रोगियों को स्वास्थ्य लाभ देने का जज्बा, रोगियों की सच्चे मन से सेवा व दुनिया की सभी पद्धतियों और उनके चिकित्सकों के प्रति सम्मान का नजरिया हमेशा से रहा है और हमेशा रहेगा! 
★ बस लेकिन गलत तरीकों से हमारे अधिकारों का अतिक्रमण कोई भी करेगा तो अब शांत नहीं बैठेंगे, सही तरीके से उसका उत्तर निश्चित रूप से दिया जायेगा, और शल्य तो अभी झांकी है, इंजेक्शन, MTP, रेडियोलोजी आदि बाकि है! 
★ खुद के हुनर से सिद्ध करिये की आपमें कितनी खूबी है, ऐसी बच्चों जैसी या शादी के फूफा या मौसा की तरह मुँह फुलाकर कार्य के बहिष्कार की धमकी देना IMA के लोगों को बंद करना चाहिए, क्योंकि यह सब सामान्य जनता के बीच में बचकाना लगता है और देश की चीज़ों के प्रति असम्मान दिखाता है! 
★ और हाँ आयुर्वेद के विषय में कुछ भी बकवास करने से पहले 5.5 वर्ष का कोर्स करके उसके सिद्धांतों को समझकर इसके ऊपर अपनी प्रतिक्रिया दें! ऐसे ही मुँह फाड़कर आयुर्वेद को नुस्खा, Placibo या क्वेक्स कहना बहुत ज्यादा फनी लगता है!  
★ चलते-चलते सिर्फ इतना ही कि चींटी भी हाथी को गिरा देती है, और यहाँ तो क़ानूनी रूप से शिक्षा लेकर आये आयुर्वेद के स्नातक हैं, जो अब गलत को सुनकर शांत नहीं रहेंगे! आयुर्वेद के सभी चिकित्सक एवं विद्यार्थियों से मेरी अपील है कि अपने कार्यों का रिकॉर्ड तैयार करें और उसको सही रूप में प्रत्येक सम्बंधित मंच पर लगातार प्रसारित करते रहें और गलत के विरुद्ध हमेशा एकजुट रहें!
(नोट: मेरे यह विचार किसी भी सिस्टम और व्यक्ति को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं है, या नीचा दिखाने के लिए नहीं है, बस यह शब्द उन अहंकारियों के लिए हैं जो यह सोचते हैं कि चिकित्सा का क्षेत्र उनकी बपौती है!) 
जय धन्वंतरि, जय आयुर्वेद 
(डॉ. अभिषेक गुप्ता (आयुर्वेदाचार्य) के सोशल मीडिया वॉल से साभार) 

NS Desk

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