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बच्चे को आयुर्वेद ने सर्जरी से बचाया, पढ़िए वैद्य नम्रता कुलश्रेष्ठ की केस स्टडी

By NS Desk | Vaidya Street | Posted on :   06-Jan-2021

Vaid Namrata Kulshrestha

अमूमन लोगों में ये भ्रान्ति रहती है कि आयुर्वेद धीमी गति से काम करता है इसलिए आपातकाल में यह रोगी की कोई मदद नहीं कर सकता. लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है. आयुर्वेद में ऐसी अनेक औषधियां और चिकित्सा पद्धतियाँ है जिसकी मदद से आपातकाल में रोगी को तत्काल स्वास्थ्य लाभ मिलता है. ऐसे ही एक केस स्टडी को शल्य तंत्र विशेषज्ञ वैद्य (डॉ.) नम्रता कुलश्रेष्ठ ने निरोगस्ट्रीट के साथ शेयर किया है. इस केस स्टडी में उन्होंने बताया है कि कैसे आयुर्वेद की मदद से एक बच्चे का न केवल जीवन की रक्षा हुई बल्कि वह स्वस्थ्य भी गया. 

वैद्य नम्रता कुलश्रेष्ठ, शल्य तंत्र विशेषज्ञ : केस स्टडी -  Vaid Namrata Kulshrestha Case Study

आज एक माह के फालोअप के बाद यह शाट क्लीनिकल स्टडी आप सभी के ज्ञानार्थ व उपयोग के लिए प्रेषित है-

फोन से बच्चे की बीमारी की सूचना और चिकित्सकीय सलाह :

  • 7 दिसंबर 2020 को मेरे पास फोन आया कि मेरे12 साल के बेटे को 3 दिन से मोशन नहीं हुआ है और पेट फूल रहा है, गैस भी नहीं पास हो रही. 
  • मैं फोन पर कंसल्टेशन देने के पक्ष में कभी नहीं रहती परंतु कोरोना काल में फोन ही कंसल्टेशन का सबसे सुरक्षित माध्यम बना है.  
  • स्थिति कुछ ऐसी थी कि बालक को न तो  लक्जे़टिव दिया जा सकता था ना कोई दूसरी दवा. 
  • मुझे आंत्रावरोध का शक हुआ इस लिए मुंह से कुछ भी खिलाने के लिए सख्त मना किया और तुरंत एक एक्स-रे ऐबडोमन के लिए एडवाइज दी.

बच्चे को पीडियाट्रिशियन के पास ले जाया गया 

  • जब तक एक्स-रे की रिपोर्ट आती तब तक परिवार के लोग उस बच्चे को लेकर पीडियाट्रिशियन के पास पहुंचे.
  • पीडियाट्रिशियन ने जब बच्चे की हालत देखकर एमर्जन्सी कण्डीशन है ऐसा बता कर तुरंत पीडियाट्रिक सर्जन के पास रेफर कर दिया. 

पीडियाट्रिक सर्जन की सलाह पर बच्चा सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती 

  • पीडियाट्रिक सर्जन ने  एग्जामिन करके इमरजेंसी कंडीशन को भांपते हुए एक्स-रे रिपोर्ट दिखाने को कहा, जो कि अभी तक आई नहीं थी.
  • इसी बीच उन्होंने अल्ट्रासाउंड करके देखा परंतु कुछ क्लियर नहीं हुआ. 
  • रोग की गंभीरता को समझते हुए पीडियाट्रिक सर्जन तुरंत अस्पताल में भर्ती होने को कहने लगे. 
  • सर्जन का कहना था कि तुरंत तैयारी से आकर हॉस्पिटल में भर्ती करवाएं जिससे बच्चे का ऑपरेशन किया जा सके. 

बच्चे के माता-पिता का दुबारा फोन कॉल 

  • सारी स्थिति को बताते हुए मेरे पास दोबारा फोन आया तब तक एक्स-रे  फिल्म आ चुकी थी और माता-पिता ने एक्स-रे मुझे व्हाट्सएप पर भेजा.
  • एक्सरे देखकर मेरा शक यकीन में बदल गया क्योंकि एक्स-रे इंटेस्टाइनल ऑब्स्ट्रक्शन को दर्शा रहा था.
  • आंत्रावरोध की वजह से अलग-अलग फ्लुइड लेवल  दिखाई दे रहे थे परंतु ऐसी स्थिति में पेरेंट्स के पास भी सर्जरी के अलावा अन्य रास्ता नहीं था.  

आयुर्वेदिक चिकित्सा आजमाया और फौरन फायदा दिखा 

  • इसी क्षण मेरे दिमाग में आया की "सिट्ज़ बाथ" एक ऐसी पद्धति है जो कि अपान वायु को  नियंत्रित करती है और साथ ही एब्डोमिनल और पेरिनियल मसल्स को रिलैक्स कर देती है.
  • ऐसा कई मरीजों में देखा है कि जिनको मलावरोध या मूत्र अवरुद्ध हो जाता है, केवल सिट्ज़ बाथ से उन्हें बहुत लाभ मिलता है.
  • यह सोच कर मैंने गुनगुने पानी से भरे एक टब में बच्चे को बिठाने के लिए कहा जिसमें उसका पेट और आधो भाग डूबा रहे.
  • यह भी समझा दिया कि यदि लैट्रिन आए तो बच्चा टब से उठे नहीं, टब में ही करले.
  • 20 मिनट के बाद  बच्चे को थोड़ा सा दर्द में आराम मिला. 
  • एक घंटे बाद फिर से यही विधि  दोहराई और ऐसा करने से बच्चे को पेट दर्द में भी आराम मिला और गैस पास हुई.
  • इसके साथ ही थोड़ा सा मल भी पास किया.  
  • बच्चे को आराम दिला करके फिर से डेढ़ घंटे बाद यही विधि रिपीट करवाइ गयी.
  • तीसरी बार जब बच्चे को सिट्ज़ बाथ दिया गया तो उसको दो चम्मच मल पास हुआ. 
  • जब थोड़ा सा स्टूल पास हुआ तो एक पॉजिटिव साइन समझते हुए मैंने बच्चे को "मात्रा वस्ती" देना उचित समझा.
  • तिल तेल की 30ml की मात्रा वस्ती मैंने बच्चे को दिलवाई और 1 घंटे बाद फिर से उसको चौथी बार सिट्ज़ बाथ के लिए कहा.
  • इस बार करीब एक कटोरी काला मल निकला.

बच्चे की सर्जरी रुकी 

  • इस स्थिति से संतुष्ट पेरेंट्स को थोड़ा तसल्ली मिली और वे दोबारा फोन कर सर्जन को बताया कि बच्चे ने थोड़ा स्टूल पास किया है और उसे अब दर्द में भी आराम है.  
  • इस प्रकार डॉक्टर ने अगले दिन वेट करने को कहा. 
  • अगले दिन सुबह उठते ही फिर से उसको एक सिट्ज़ बाथ दिया गया जिसमें उसने फिर से एक कटोरी स्टूल पास किया और मल की गांठे निकली.
  • इसके पश्चात पुनः तिल तेल की मात्रा बस्ती दिलवाई गई .
  • इसके बाद जो स्थिति हुई वह बिल्कुल एक नॉर्मल दिनों में जिस तरह से  पेट साफ होता है.
  • बच्चा अब बहुत अच्छा महसूस कर रहा था और खेलने में मन लग रहा था.

बच्चे को भूख लगी 

  • तीन दिन सिर्फ इनफ्यूज़न पर रखने के बाद चौथे दिन भूख लगी है कहकर भोजन मांगा.
  • अब तरल भोजन शुरू करवा दिया था.

आश्चर्य में पीडियाट्रिक सर्जन ​

  • सर्जन ने आज पेट की जांच की तो आश्चर्य से पूछा कि इसे मोशन कैसे हुआ? 
  • घर वालों ने सब बताया तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ.
  • सर्जन ने कहा इतनी मामूली सी चीज से आब्स्ट्रक्शन कैसे दूर हो सकता है... मैं भी ट्राई करके देखूंगा.

सर्जरी अच्छी करने वाला सर्जन होता है, परन्तु जो सर्जरी को भी टाल दे वह बेहतरीन सर्जन होता है.

( वैद्य नम्रता कुलश्रेष्ठ शल्य तंत्र विशेषज्ञ हैं)

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NS Desk

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