Home Blogs NirogStreet News कोरोनावायरस की चिकित्सा में आयुर्वेद चिकित्सा को शामिल किए जाने के संदर्भ में वैद्यों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

कोरोनावायरस की चिकित्सा में आयुर्वेद चिकित्सा को शामिल किए जाने के संदर्भ में वैद्यों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

By NS Desk | NirogStreet News | Posted on :   16-Apr-2020

कोरोना से सम्बंधित चिकित्सा व्यवस्था व प्रिवेंशन में समस्त भारत में आयुर्वेद चिकित्सा को सम्मलित किये जाने के व इस पर व्यवस्थित रूप से रिसर्च ट्रायल करने के सम्बन्ध में!

कोरोनावायरस की चिकित्सा में आयुर्वेद चिकित्सा को शामिल किए जाने के संदर्भ में 550 से अधिक वैद्यों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

सेवा में !
माननीय प्रधानमंत्री भारत
श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी

विषय: कोरोना से सम्बंधित चिकित्सा व्यवस्था व प्रिवेंशन में समस्त भारत में आयुर्वेद चिकित्सा को सम्मलित किये जाने के व इस पर व्यवस्थित रूप से रिसर्च ट्रायल करने के सम्बन्ध में!

आदरणीय महोदय !
जैसा कि ज्ञात है कि वर्तमान समय में हम सभी कोरोना महामारी के कारण लगातार बढ़ रहे रोगियों के मामलों को लेकर बेहद चिंतित हैं, देश की केंद्र व राज्य सरकारें भी इस महामारी के संक्रमण को सीमित करने के लिए अपने-अपने स्तर पर एकजुट होकर बेहतर प्रयास कर रहे है जिसके कारण विश्व के अन्य देशों की तुलना में हमारे देश में इस महामारी का प्रसार बेहद सीमित हुआ है।

महोदय वर्तमान समय में अबतक कोरोना के उपचार को लेकर कोई निश्चित चिकित्सा क्रम विश्व में कहीं भी नहीं ढूंढा जा सका है, विश्व के विभिन्न देश अपने-अपने स्तर पर इसके उपचार व रोकथाम के सही तरीकों को ढूंढने के लिए प्रयासरत है। ऐसे में भारत के पास अवसर है कि स्वास्थ रक्षा के हमारे पास मौजूद समस्त प्रकल्पों को सही रूप से पहचानकर व उनपर अनुसंधान कर न सिर्फ उनका उपयोग अपने देश के लोगों के स्वास्थ्य रक्षा के लिए किया जाये अपितु विश्व के लिए भी इस महामारी के विरुद्ध बेहतर चिकित्सा विकल्प मुहैया करवाकर अपने गौरव और मान को अधिक सुदृढ़ किया जाये।  

महोदय वर्तमान समय में विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, इससे पहले कभी सार्स, स्वाइन फ्लू, प्लेग आदि जैसी महामारियों ने लाखों लोगों के जीवन को समाप्त किया और आगे पूरी संभावना है की आने वाले समय में भी इस तरह की महामारियां समय-समय पर मानव जीवन के लिए चुनौतियों का सबब बनती रहेंगी ऐसे में इस तरह की स्थितियों से निपटने के लिए बचाव (प्रिवेंशन) पर अधिक जोर दिया जाये, ऐसे ही सिद्धांत को आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान में सर्वप्रथम कहा गया है:

"स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं आतुरस्य विकार प्रशमनं ..."
अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी व्यक्तियों के विकार का शमन।

कोरोना महामारी में भी प्रिवेंशन वाला सिद्धांत सबसे अधिक कारगर आ रहा है, इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हुए भारत देश को वर्तमान और भविष्य की तैयारियों के लिए स्वास्थ्य रक्षण के साथ-साथ आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से रोग प्रशमन पर भी गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

महोदय विश्व में और हमारे देश में मुख्य रूप से प्रत्येक चिकित्सा से जुड़ी स्थति में सबसे पहले अन्य चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिकता दी जाती है, यह बात भी सही है कि उनके पास पेपरों में व जमीनी कार्य करने के आंकड़ें ज्यादा व्यवस्थित मिलते है इसलिए यह प्राथमिकता देना स्वाभाविक भी लगता है, लेकिन महोदय हम सभी जानते हैं कई बार जो कार्य तलवार नहीं कर सकती वह कार्य सुई कर सकती है, इसलिए हमें जिस स्थान पर जिस वस्तु के माध्यम से कार्य करना होता है हम युक्तिपूर्वक उसका चयन करते हैं।

महोदय वर्तमान समय की स्वास्थ्य चुनौतियों के विरुद्ध आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र का प्रयोग भी सही युक्ति के साथ करने का सबसे उचित समय है क्योंकि आयुर्वेद में स्वास्थ्य रक्षण के अतरिक्त ऐसी गंभीर स्थिति से निपटने के लिए व्याधिक्षमत्व (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बेहतर करने के लिए रसायन योग, श्वसनवह संस्थान से सम्बंधित विकारों (Respiratory Disorders) के शमन के लिए चिकित्सा योग, ज्वर की चिकित्सा के योग, विभिन्न तरह के जांगम विषों के उपचार क्रम, शरीर का शोधन आदि प्रकल्पों को करने के लिए सैकड़ों सिद्ध विकल्प मौजूद हैं और महोदय हमारी ओर से यह बात कोई किताबी तथ्यों के आधार पर भी नहीं कही जा रही है, अभी हाल में चीन के द्वारा साझा की गई "Handbook of COVID-19 Prevention and Treatment" पुस्तिका में पेज 37 (देखें संलग्नक-1) पर लगभग 46 ऐसे ट्रेडिशनल चायनीस मेडिसिन की औषधियों के नाम कोरोना रोग के उपचार के लिए साझा किये गए हैं जिनके सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इनमें से अधिकांश औषध योग आयुर्वेद के शास्त्रों में भी वर्णित मिलते हैं व भारत में आयुर्वेद चिकित्सकों के द्वारा सामान्य रूप से श्वसन सम्बंधित विकारों में नियमित रूप से प्रयोग में भी लाये जाते हैं।

इसके अतरिक्त भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाले आयुष मंत्रालय ने भी अभी हाल में ही कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए 31-3-2020 को एक गाइडलाइन साझा की थी (देखें संलग्नक-2) जोकि आपके द्वारा विभिन्न आयुर्वेद चिकित्सकों के साथ की गई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद तैयार की गईं है व इन्हें आपने भी अपने ट्वीटर से देश भर के लोगों के लिए साझा किया था। इसके बाद जम्मू और कश्मीर राज्य  की ओर से दिनांक 3-4-2020 (देखें संलग्नक-4) को, मध्य प्रदेश राज्य की ओर से दिनांक 7-3-2020 को (देखें संलग्नक-4) एवं केरल राज्य की ओर से दिनांक 9-4-2020 को (देखें संलग्नक-5) सामान्य लोगों के लिए कोरोना से बचाव के लिए आयुर्वेद से जुड़े रोकथाम-संबंधी उपाय (preventive measures) साझा किये है।

इसके साथ-साथ 30 मार्च को केरल राज्य व 8 अप्रैल को हरियाणा और गोवा राज्य की सरकारों ने कोरोना के रोगियों को आयुर्वेद की औषधियों को देने का निर्देश जारी किया है। (देखें संलग्नक-6,7 और 8)
महोदय उपरोक्त राज्य व केंद्र सरकार की ओर से आयुर्वेद के माध्यम से किये गए सभी कार्य सराहनीय है, इस पत्र के माध्यम से हम सभी आयुर्वेद चिकित्सक आपसे यह अपील कर रहे हैं कि देश के अन्य राज्यों में भी आयुर्वेद की औषधियों का वितरण रोकथाम और उपचार दोनों ही दृष्टि से किया जाये व जितने भी व्यक्तियों या रोगियों को यह औषधियां दी जायें उनका डॉक्यूमेंटेशन का कार्य भी सही ढ़ंग से किया जाये जिससे इन सभी कार्यों को एक रिसर्च के रूप में विश्वभर में प्रस्तुत किया जा सके! 

कोरोना रोग में आयुर्वेद की चिकित्सा और दिशानिर्देशों में आयुर्वेद के इन सिद्धांतों का ध्यान अवश्य रखा जाये जिससे रोग शमन व इससे बचने में निश्चित रूप से बेहतर परिणाम मिलेंगे:
आयुर्वेद चिकित्सकों की ओर से इस स्थिति में सुझाया गया चिकित्सा सिद्धांत: 
1. निदान परिवर्जन (रोग को उत्पन्न करने वाले कारणों से रोगी का बचाव)
2. आम पाचन, लंघन, कफ शमन व रस-रसायन चिकित्सा
3. इस गंभीर रोग के कारण रोगी में मानसिक तनाव आना निश्चित है इसके शमन के लिए मेध्य औषध योगों का प्रयोग
4. शरीर के ऊपरी हिस्से से जुड़े श्वसन वह संस्थान गत विकारों में नस्य चिकित्सा का प्रयोग 
5. जांगम विष के उपचार क्रम (क्योंकि कोरोना वायरस के फैलने का मुख्य श्रोत जंगली जानवरों से फैला है इसलिए इसके उपचार क्रम का विशेष ध्यान रखा जाये)
6. ज्वर आदि के कारण शरीर के पाचन तंत्र पर व यकृत-प्लीहा पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है इसलिए अग्नि एवं यकृतघ्न और प्लीहघ्न औषध योगों का विशेष प्रयोग  
7. योग, प्राणायाम, मैडिटेशन और सात्विक आहार क्रम का विशेष पालन 

उपरोक्त सुझावों के अतरिक्त सभी कोरोना पीड़ित रोगियों पर अन्य पद्धतियों की प्रयोग की जा रही औषधियों के दुष्परिणामों को भी देखा जाये क्योंकि दुनिया भर में कोरोना के उपचार पर चल रही रिसर्च के ऊपर मीडिया के माध्यम से लगातार यह ख़बरें आ रही हैं कि अन्य औषधियों के गंभीर दुष्परिणाम भी रोगियों के ऊपर सामने आ रहे हैं जिसके कारण वर्तमान में प्रयोग की जा रही औषधियां कोरोना रोगियों पर कारगर कम हानिकारक अधिक हो रही हैं।

महोदय विनम्रता से देश के हम सभी सैकड़ों आयुर्वेद चिकित्सक आपसे अनुरोध कर रहे हैं कि आयुर्वेद की शक्ति को पहचानकर व्यवस्थित रूप से इसपर कार्य करके समस्त विश्व में भारत के मान को बढ़ाने व वास्तविक सामर्थ्य से अवगत करवाने के लिए सरकार की ओर से प्रत्येक स्तर पर गंभीरता से कार्य किया जाये, इस सम्बन्ध में हम सभी चिकित्सकों से किसी भी स्तर से जो भी संभव सहयोग देश की सरकार को चाहिए हो वो हम सभी पूर्ण सामर्थ्य के साथ किसी भी समय देने के लिए तत्पर हैं!

आप इस सम्बन्ध में देश के आयुर्वेद की जमीनी स्तर पर प्रयोगात्मक कार्य करने वाले चिकित्सकों से भी अवश्य चर्चा करें, इसके लिए यदि हमारे बीच के कुछ चिकित्सकों से आप वार्ता करना चाहें तो हमें अवश्य बतायें!
हम सभी का लक्ष्य न सिर्फ वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों का निवारण करना है अपितु भविष्य की अन्य स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए भी देश के स्वास्थ्य तंत्र को सशक्त बनाना है, इस दिशा में आयुर्वेद का एक-एक चिकित्सक आपके साथ खड़ा है।  

आशा है हम सभी चिकित्सकों की ओर से भेजे गए बिंदुओं पर गंभीरता से अवलोकन किया जायेगा और देश और दुनिया में आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य का बेहतर विकल्प सामान्य जन मानस के लिए तैयार किया जायेगा!  

समस्त आयुर्वेद चिकित्सकों की ओर से:  

प्रतिलिपि सूचनार्थ !
1. स्वास्थ्य मंत्री - स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार
2. स्वास्थ्य सचिव - स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार
3. आयुष मंत्री व आयुष सचिव - आयुष मंत्रालय भारत सरकार  
4. देश के समस्त राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य सचिव
5. देश के समस्त समाचार पत्र व न्यूज़ चैनल के संपादक  

NS Desk

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