Home Blogs NirogStreet News आयुर्वेद और एलोपैथी का सामंजस्य स्वास्थ्य के क्षेत्र में गेम चेंजर सिद्ध होगा

आयुर्वेद और एलोपैथी का सामंजस्य स्वास्थ्य के क्षेत्र में गेम चेंजर सिद्ध होगा

By NS Desk | NirogStreet News | Posted on :   03-Jan-2019

क्या आयुर्वेद और एलोपैथी एक साथ काम कर सकते हैं?

आयुर्वेद भारतीय जीवन प्रणाली का अभिन्न हिस्सा रहा है. इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति में सर्दी, खांसी, बुखार से लेकर घातक बीमारियों तक का उपचार संभव है. आयुर्वेद के पास हर मर्ज की दवा है. लेकिन आयुर्वेद के इतना उपयोगी होने के बावजूद एलोपैथी चिकित्सक शायद ही कभी आयुर्वेदिक दवा लिखते हैं. इस संबंध में सीधा तर्क ये है कि जिस चिकित्सा पद्धति के बारे में उन्होंने पढ़ाई की है उसी पद्धति पर आधारित दवाइयों को लिखेंगे, न कि उसकी जिसकी पढ़ाई नहीं की है. यहां तक कि दिल्ली मेडिकल काउंसिल प्रणाली ने घोषणा की कि किसी भी एलोपैथी चिकित्सक को आयुर्वेदिक दवा नहीं लिखनी चाहिए और कोई ऐसा करता है तो दंडनीय अपराध माना जाएगा. लेकिन इसके बावजूद बहुत सारे ऐसे एलोपैथी डॉक्टर भी मौजूद हैं जो आयुर्वेद के ज्ञान-विज्ञान में विश्वास रखते हैं और अपनी मुख्यधारा की दवाइयों के साथ-साथ आयुर्वेद को भी आजमाते हैं. लीवर, गठिया, खांसी जुकाम, बवासीर के साथ ही गुर्दे की पथरी आदि बीमारियों में आयुर्वेद दवाइयों के अच्छे परिणाम निकल कर सामने आए.

एलोपैथ के साथ आयुर्वेद को जोड़कर चिकित्सा करने की दिशा में देश के शीर्ष अस्पताल मेदांता ने हाल ही में बड़ा कदम उठाया और अब दोनों चिकित्सा प्रणालियों को एककृत कर वह मरीजों का उपचार कर रहा है. मेदांता ने इस संदर्भ में आयुर्वेद अस्पतालों से गठबंधन भी किया है और इसका नाम मेदांता- आयुर्वेद दिया है. भारत में यह पहली बार है, जब किसी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में एलोपैथी और आयुर्वेद से इलाज होगा. आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के इस मेल को भारतीय चिकित्सा क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी माना जा रहा है.

मेदांता के चेयरमेन डॉ. नरेश त्रेहन ने इस संबंध में आयुर्वेद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक दवाइयां और तकनीक में बहुत सारे रोगों का उपचार होता है लेकिन इसके दुष्प्रभावों (side effects) को भी झेलना पड़ता है और साथ ही यह बहुत अधिक महंगा भी होता है. दूसरी तरफ आयुर्वेद अपेक्षाकृत सस्ती चिकित्सा प्रणाली होने के साथ-साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर उसे बीमारियों से लड़ने में ज्यादा सक्षम बनाता है.

मेदांता की इस दिशा में योजनाओं का खुलासा करते हुए उन्होंने मेदांता आयुर्वेद के लॉन्च के मौके पर कहा - हमलोग आयुर्वेद और एलोपैथ को मिलाकर एक नयी चिकित्सा पद्धति को विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि रोगी को ज्यादा-से-ज्यादा फायदा हो और जब जैसी जरुरत हो, वैसी चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल किया जा सके. इससे उपचार की कुल लागत में कमी आएगी और मरीज के जल्द स्वस्थ होने की संभावना भी ज्यादा होगी. संभवतः स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह प्रयोग गेम चेंजर सिद्ध होगा.

दूसरी तरफ आयुर्वेद हॉस्पिटल के एमडी राजीव वासुदेवन ने कहा कि आयुर्वेद अब केवल मसाज और ऊपरी थेरेपी तक सीमित नहीं है. आयुर्वेद में इतना शोध हो चुका है कि अब हम मॉडर्न मेडिसिन के साथ मिलकर चिकित्सा क्षेत्र में नए कीर्तिमान हासिल कर सकते हैं. खास तौर पर महिलाओं के लिए आयुर्वेद में बहुत कुछ है.कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों में दवाएं और कीमोथेरेपी के कई साइड इफेक्ट्स होते है. साथ ही एलोपैथी दवाएं काफी महंगी होती हैं. मेदांता आयुर्वेद अब कैंसर के मरीजों के लिए नई थेरेपी और दवाएं लेकर आएगा, जो सस्ती होंगी और इनके साइड इफेक्ट्स भी नहीं होंगे.

मेदांता मेडिसिटी के सीईओ पंकज साहनी का मानना है कि आयुर्वेद हमारी प्राचीन चिकित्सा व्यवस्था का हिस्सा है, जिसमें कई शोध हुए हैं और ये बेहद प्रभावी भी हैं. मेदांता और आयुर्वेद का ये संगम प्राचीन चिकित्सा प्रणाली को और भी बेहतर बनाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य भारत के साथ ही दुनिया भर में आयुर्वेदिक दवाओं और थेरेपी को एलोपैथी के साथ जोड़कर नई और किफायती चिकित्सा प्रणाली प्रदान करना है.

आयुर्वेद और एलोपैथ को लेकर चल रहा ये प्रयोग वाकई में संभावनाओं से भरा है और यदि सफल होता है तो चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आना तय है. तरह - तरह के रोगों से पीड़ित भारतीय जनमानस के लिए तब ये राहत की बात होगी. साथ ही एलोपैथ भी करेगा जय आयुर्वेद.

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