Home Blogs NIrog Tips आयुर्वेद के मुताबिक बीमारियों का वाहक है विरुद्ध आहार

आयुर्वेद के मुताबिक बीमारियों का वाहक है विरुद्ध आहार

By NS Desk | NIrog Tips | Posted on :   05-Apr-2019

डॉ.प्रभात तिवारी

जिन पदार्थों के सेवन से रोग उत्पन्न होने की आशंका होती है, उन्हें विरुद्धाहार माना गया है. प्रकृति में कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं, जो बीमारियों का कारण होते हैं और कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो अनेक गुणों का खजाना होते हैं. जिनके प्रयोग से शरीर की पुष्टि उचित प्रकार से होती है. परन्तु जब इन्हीं गुणकारी खाद्य पदार्थों का सेवन किसी और खाद्य पदार्थ में मिलाकर किया जाये तो इससे हमारे शरीर क नुकसान होता हैं और अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं. ये विरुद्धाहार कहलाते हैं.

आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार के विरुद्धाहारों का वर्णन किया गया है.

- देश विरुद्ध : सूखे या तीखे पदार्थों का सेवन सूखे स्थान पर करना अथवा दलदली जगह में चिकनाईयुक्त भोजन का सेवन करना.

- काल विरुद्ध : ठंढ में सूखी और ठंढी वस्तुएं खाना और गर्मी के दिनों में तीखे, कषाय भोजन का सेवन.

- अग्नि विरुद्ध : यदि जठराग्नि मध्यम हो और व्यक्ति गरिष्ठ भोजन का सेवन करे तो इसे अग्नि विरुद्ध आहार कहा जाता है.

- मात्रा विरुद्ध : यदि घी और शहद बराबर मात्रा में लिया जाए तो ये हानिकारक होता है.

- सात्म्य विरुद्ध : नमकीन भोजन खाने की प्रवृति रखने वाले मनुष्य को मीठे, रसीले पदार्थ खाने पड़े.

- दोष विरुद्ध : वो औषधि भोजन का प्रयोग करना जो व्यक्ति के दोष बढ़ाने वाला हो और उनकी प्रकृति के विरुद्ध हो.

- संस्कार विरुद्ध : कई प्रकार के भोजन को अनुचित ढंग से पकाया जाए तो वह विषमई बन जाता है. दही अथवा शहद को अगर गर्म कर लिया जाए तो ये पुष्टिदायक होने की जगह घातक विषैले बन जाते हैं.

- वीर्य विरुद्ध : जिन चीजों की तासीर गर्म होती है, उन्हें ठंढी तासीर के पदार्थों के साथ लेना.

- कोष्ठ विरुद्ध : जिस व्यक्ति की कोष्ठबद्धता हो, यदि उसे हल्का, थोड़ी मात्रा में और कम मल बनाने वाला भोजन दिया जाए या इसके विपरीत शिथिल गुदा वाले व्यक्ति को अधिक गरिष्ठ और ज्यादा मल बनाने वाला भोजन देना कोष्ठ विरुद्ध आहार है.

- अवस्था विरुद्ध : थकावट के बाद वात बढ़ने वाला भोजन लेना अवस्था विरुद्ध आहार है.

- क्रम विरुद्ध : यदि व्यक्ति भोजन का सेवन पेट साफ़ होने से पहले करे अथवा जब उसे भूख न लगी हो अथवा जब अत्यधिक भूख लगने से भूख मर गयी हो.

- परिहार विरुद्ध : जो चीजें व्यक्ति को वैधय के अनुसार नहीं खानी चाहिए, उन्हें खाना - जैसे जिन लोगों को दूध न पचता हो, वे दूध से ही निर्मित पदार्थों का सेवन करे.

- उपचार विरुद्ध : किसी विशिष्ट उपचार विधि में अपथ्य (न खाने योग्य) का सेवन करना जैसे घी खाने के बाद ठंढी चीजें खाना (स्नेहन क्रिया में लिया गया घृत)

- पाक विरुद्ध : यदि भोजन अधपका रह जाए या कहीं - कहीं से जल जाए.

- संयोग विरुद्ध : दूध के साथ अम्लीय पदार्थों का सेवन.

- हृद विरुद्ध : जो भोजन रुचिकर न लगे उसे खाना.

- संपद विरुद्ध : यदि अधिक विशुद्ध भोजन को खाया जाए तो यह संपाद विरुद्ध आहार है. इस प्रकार के भोजन से पौष्टिकता विलुप्त हो जाती है. शुद्धिकरण या रिफाइनिंग करने की प्रक्रिया में पोषक गुण भी निकल जाते हैं.

- विधि विरुद्ध : सार्वजनिक स्थान पर बैठकर भोजन खाना.

- विरुद्धाहार के कारण होने वाली व्याधियां

विरुद्धाहार के सेवन से अनेक प्रकार के चर्म रोग, पेट में तकलीफ, खून की कमी (अनीमिया) , शरीर पर सफेद चकत्ते, पुरुषत्व का नाश आदि रोग हो जाते हैं.

नपुंसकता, विसर्प, अंधापन, जलोदर, विस्फोट, पागलपन, भगंदर, मूर्च्छा, मद, आध्मान, गलग्रह, पान्डु, आमविष, कुष्ठ, ग्रहणी, शोथ, अम्लपित्त, ज्वर, पीनस, संतान दोष.

उपरोक्त सूची के अनुसार विरुद्धाहार से प्रतिरक्षा तंत्र, अंतःस्त्रावी तंत्र, पाचन तंत्र, तंत्रिका तंत्र एवं रक्त परिसंचरन तंत्र प्रभावित होते हैं. वर्तमान में विज्ञान की एक नवीन शाखा topography इस मुद्दे पर कार्य कर रही है.

विपरीत आहार (विरुद्ध आहार)

- दूध के साथ : दही, मूली, मूली के पत्ते, खट्टे पदार्थ, नमक, कच्चे सलाद, इमली, खरबूजा, बेलफल, नारियल, आंवला, नींबू का रस, व मौसंबी-संतरा जूस, जामुन, कुल्थी, तिलकुट, तोरई, अनार, सत्तू, खट्टे फल, मछली आदि का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है.

- दही के साथ : दूध व दूध से बने मीठे व्यंजनों का सेवन, पनीर, खीर, गर्म पदार्थ, गर्म भोजन, खरबूजा व अन्य विपरीत आहार, खीरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए.

- खीर के साथ : दही, लस्सी, नींबू, कटहल, जामुन, शराब व सत्तू आदि पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

- शहद के साथ : घी, तेल-वसा, अंगूर, मूली, गर्म पानी, गर्म दूध, शर्करा से बना शरबत और खजूर से बनी मदिरा आदि पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. गुनगुना पानी ले सकते हैं.

- शीतल जल के साथ : अमरुद, खीर, ककड़ी, खरबूजा, मूंगफली, चिलगोजा, तेल और घी का सेवन नहीं करना चाहिए.

- गर्म पेय पदार्थ और गर्म पानी के साथ : शहद, कुल्फी, आइसक्रीम इत्यादि का सेवन विरुद्ध है.

- कुछ अन्य ठंढे पदार्थों का सेवन भी हमारे शरीर के लिए नुकसानदेह है.

- घी के साथ : शहद और ठंढे पानी को कभी भी घी में मिलाकर नहीं खाना चाहिए.

- खरबूजे के साथ : दही, दूध, मूली के पत्ते, लहसुन और पानी पीने से हमारा स्वास्थ्य बिगड़ सकता है.

( आयुष्मान पत्रिका से साभार )

NS Desk

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