Home Blogs Herbs and Fruits आयुर्वेद के अनुसार अदरक के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ayurveda ke Anusar Adrak ke Fayde aur Nuksan in Hindi

आयुर्वेद के अनुसार अदरक के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ayurveda ke Anusar Adrak ke Fayde aur Nuksan in Hindi

By NS Desk | Herbs and Fruits | Posted on :   24-Mar-2021

अदरक का परिचय - Introduction of Ginger in Hindi

अदरक एक लोकप्रिय भारतीय मसाला है जिसका प्रयोग भारतीय व्यंजनों को एक खास किस्म की लज्जत देने के लिए किया जाता है। अदरक एक औषधीय मसाला है और इसमें अनेक औषधीय गुण विद्यमान पाए जाते हैं। अपने आयुर्वेदिक गुणों के कारण यह अनेक रोगों के उपचार में काम आती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व सूर्य के हानिकारक अल्ट्रा वायलेट अथवा यू वी विकिरण से होने वाली कोशिकाओं की क्षति से बचाव करते हैं और  ह्रदय संवहनी संबंधित रोगों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। अदरक के पानी का उपभोग पाचन तंत्र में सुधार लाता है जिससे उपापचय  बेहतर स्थिति में काम करता है। अदरक के पानी या इसकी चाय के सेवन के कुछ और भी फायदे हैं, जैसे कि ये यात्रा के दौरान मतली या उलटी से बचाते हैं। यह भारतीय मसाला पुरुषों के लिए खास गुणकारी है, क्योंकि यह शरीर में टेस्टोस्टिरोन के लेवल में वृद्धि करके उसकी यौन क्षमता को बढ़ाता है। अदरक के एंटीस्पाजमोडिक तथा  पीड़ाहर गुण महिलाओं के लिए लाभप्रद सिद्ध होते हैं क्योंकि ये मासिक धर्म के निरोध तथा दर्द से राहत प्रदान करते हैं।अदरक के एंटीबैक्टीरियल तथा एंटीफंग्ल गुण त्वचा संबंधित समस्याओं जैसे कि तेलीय त्वचा, मुहांसों, त्वचा संक्रमण आदि के निदान में सहायक होते हैं।

अदरक के गुण - Properties of Ginger in Hindi

अदरक में अनेक ऐसे लाभप्रद गुण मौजूद पाए जाते हैं जो विभिन्न प्रकार के शारीरिक रोगों के उपचार में मदद करते हैं। अदरक के कुछ औषधीय गुण हैं-
• एंटीफंग्ल गुण 
• एंटीबैक्टीरियल गुण 
• एंटीस्पाजमोडिक गुण 
• अनलजेसिक गुण 
• एंटीऑक्सीडेंट गुण 
• एंटीइनफ्लेमेट्री गुण 
• एंटीकैंसर गुण 
• एंटीइमेटिक गुण 
• वात को संतुलित करने वाला गुण 
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अदरक के ऐतिहासिक उपयोग - Historical Uses of Ginger in Hindi

अदरक औषधीय गुणों से भरपूर होती है और यह सालों से विविध रोगों के उपचार के लिए एक घरेलू औषधि के तौर पर उपयोग की जाती रही है। इसके अलावा इसका उपयोग खाद्य-पदार्थों या व्यंजनों में सुगंध तथा लज्जत देने के लिए किया जाता है। नीचे दिए गए कुछ रोगों के उपचार हेतु अदरक का उपयोग सैकडों सालों से होता आया है।
• खांसी-जुकाम 
• कैंसर का उपचार 
• पाचन प्रणाली में सुधार 
• मतली 
• उलटी
• वज़न का नियंत्रण 
• त्वचा से संबंधित समस्याएं 
• बालों का झड़ना 
• प्रदाह 
उपरोक्त ऐसे रोग या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं जिनके उपचार के लिए अदरक में समस्त औषधीय गुण मौजूद पाए जाते हैं। अदरक में उपस्थित वे गुण हैं- एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीइनफ्लेमेट्री, एंटीकैंसर, एंटीफंग्ल तथा अन्य औषधीय गुण। अदरक के ये सभी गुण अनेक रोगों के उपचार में मदद करते हैं।

औषधीय उपचार में अदरक के उपयोग के लाभ - Benefits of using Ginger in Medicinal Treatment in Hindi

अदरक एक भारतीय मसाला है जिसका बहुत अधिक औषधीय महत्व है। यह अपने अनूठे उपचारात्मक गुणों के लिए जानी जाती है। आइए अदरक के उपर्युक्त औषधीय गुणों के बारे में जानें।

1. मार्निग सिक्नेस (गर्भ धारण की अवस्था में उलटी या मतली) के उपचार में मदद 
आधुनिक विज्ञान के अध्ययन के मुताबिक अदरक में एंटीइमेटिक गुण मौजूद पाया जाता है जो गर्भावस्था के दौरान मार्निंग सिक्नेस नामक समस्या के उपचार में मदद करता है। अदरक के सेवन से मार्निंग सिक्नेस के लक्षणों, जैसे कि मतली या उलटी से राहत मिलती है।

मार्निंग सिक्नेस के मामले में अदरक के उपभोग हेतु आयुर्वेदिक टिप्स 
गर्भावस्था के दौरान यदि आप मार्निंग सिक्नेस के रोग से ग्रस्त हैं तो उसके उपचार के लिए निम्न उपचारात्मक टिप्स इस्तेमाल कीजिए।
1. अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा ले तथा उस पर एक चुटकी सेंधा नमक डालें।
2. अब अदरक के इस सेंधा नमक वाले टुकड़े को चबाने से गर्भावस्था के दौरान होने वाली मार्निंग सिक्नेस की बीमारी से राहत मिलेगी।

2. शल्यक्रिया के बाद की मतली या उलटी के उपचार में मदद 
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक में दीपन, रेचना तथा पाचन गुण पाए जाते हैं जो शल्यक्रिया के बाद की उलटी या मतली के मामले में काफ़ी लाभप्रद सिद्ध होते हैं।

शल्यक्रिया के बाद की मतली व उलटी के उपचार हेतु अदरक के उपभोग संबंधी टिप्स 
अगर आप शल्यक्रिया के उपरांत मतली या उलटी की परेशानी झेल रहे हैं तो निम्न उपचारात्मक टिप्स का पालन कीजिए।
क. अदरक का एक टुकड़ा लीजिए और उस पर चुटकी भर सेंधा नमक छिड़क लें।
ख. अब मतली व उलटी से निजात पाने के लिए उसे नमक सहित चबा लीजिए।

मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द के उपचार में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक के वात को संतुलित करने वाले गुण मासिक धर्म के दर्द तथा निरोध से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। आयुर्वेद में मासिक धर्म के दर्द तथा निरोध को कृच्छार्तव या डाइसमेनोरिया कहते हैं जिसका इलाज अदरक के सेवन से संभव हो सकता है।
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक में अनलजेसिक गुण मौजूद पाए जाते हैं जो मासिक धर्म के दौरान दर्द तथा निरोध से राहत दिलाने में सहायक होते हैं। अदरक का सेवन कैल्शियम के अवरुद्ध चैनल को खोलने में मदद करता है तथा गर्भाशय की मांसपेशियों को संकुचन से बचाती है।

मासिक धर्म के दर्द के उपचार हेतु अदरक के उपभोग से संबंधित आयुर्वेदिक टिप्स 
यदि आप मासिक धर्म से संबंधित दर्द या निरोध से ग्रस्त हैं तो आपको अदरक का उपभोग निम्न प्रकार सेकरना चाहिए।
क. आप अदरक के कुछ टुकड़े लेकर उन्हें पीस लें
ख. कूटने के उपरांत उन्हें किसी बरतन में डालकर दो कप पानी मिला लें।
ग. अब दो कप पानी में डाले गए इन अदरक के टुकड़ों को 10-15 मिनट तक पानी में उबाल लें।
घ. अब  इसे छानकर चाय की तरह पिएं।
ङ. आप इसमें स्वाद के लिए चीनी या शहद भी डाल सकते हैं।
च. आप मासिक धर्म से संबंधित दर्द या निरोध से छुटकारा पाने के लिए इसे दिन में एक या दो बार पी सकते हैं।

4. कीमोथेरेपी के उपरांत मतली तथा उलटी के इलाज में मदद 
अदरक में एंटीइमेटिक तथा कृमिनेटिव गुण मौजूद पाए जाते हैं जो कीमोथेरेपी के कारण उत्पन्न मतली एवं उलटी की समस्या का निवारण करने में मदद करते हैं। इसीलिए अदरक का सेवन जठरीय समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है तथा इसी कारण जठरीय ग्रासनली प्रतिवाह यानी गेस्ट्रो-ओएसोफगियल रिफलक्स के जोखिम को कम करता है।

5. वजन को नियंत्रित करने के लिए अच्छा 
अदरक के दीपन तथा पाचन गुण शरीर का वजन कम करने में सहायक होते हैं, क्योंकि ये शरीर से आम को हटाते हैं जो कि एक प्रकार का विषैला अपशिष्ट होता है। शरीर में आम अस्वास्थ्यकर भोजन खाने से जमा होता है तथा मोटापे का कारण बनता है। अदरक शरीर में मेदाधातु को संतुलित करके मोटापे या वजन को नियंत्रित करने में मदद करती है।

शारीरिक वज़न को नियंत्रित करने के उद्देश्य अदरक के उपभोग का आयुर्वेदिक तरीका
यदि आप अपना वजन नियंत्रित करना चाहते हैं अथवा मोटापे से राहत पाना चाहते हैं तो आपको अदरक का उपभोग निम्न प्रकार से करना चाहिए।
क. अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े लेकर अच्छी तरह से पीस लें।
ख. अदरक के टुकड़ों को पीसने के बाद इन्हें एक बरतन में डालकर दो कप पानी मिला दें।
ग. अब इन्हें 10-15 मिनट तक उबालें तथा ताकि अदरक की लज्जत पानी में मिल जाए।
घ. अब 10-15 मिनट तक उबालने के बाद इसे छानकर चाय की तरह  से पी सकते हैं।
ङ. आप इसे और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें चीनी या शहद भी मिला सकते हैं।
च. आप अपने वजन को कम करने या मोटापे को घटाने के लिए इस प्रक्रिया को दिन में एक या दो बार दोहरा सकते हैं।

6. उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद 
आयुर्वेद- आयुर्वेद के अनुसार अदरक की दीपन तथा पाचन प्रकृति कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद करती है। अदरक पाचक अग्नि को संतुलित करती है जो कि उच्च कोलेस्ट्रॉल का सबसे खास कारण होता है। अदरक का सेवन शरीर में जमा आम या टोक्सिन नामक विषैले अपशिष्ट से छुटकारा दिलाता है। आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफ़ी कारगर सिद्ध होती है।

उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए अदरक के सेवन का आयुर्वेदिक तरीका 
यदि आप उच्च कोलेस्ट्रॉल की समस्या से पीड़ित हैं और उससे छुटकारा पाने के लिए अदरक का उपभोग करना चाहते हैं तो निम्न विधि का पालन कीजिए।
क. अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर उन्हें पीस लीजिए।
ख. उन्हें अच्छी तरह से पीसने के बाद एक बरतन में दो कप पानी लेकर उसमें डाल दें।
ग. अब इसे 10-15 मिनट तक उबालें ताकि अदरक की लज्जत पानी में समा जाए।
घ. इसे 10-15 मिनट तक उबालने के बाद छान लें और चाय की तरह पी लें।
ङ. आप इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चीनी या शहद भी मिला सकते हैं।
च. उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए आप इस चाय को दिन में 2-3 बार पी सकते हैं।

7. अस्थि संधि शोथ के उपचार में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक में वात को संतुलित करने का गुण पाया जाता है जो कि अस्थि संधि शोथ के इलाज में मदद करता है, क्योंकि यह रोग वात की गड़बड़ी का ही परिणाम होता है। अतः अदरक का सेवन अस्थि संधि शोथ के उपचार में सहायता कर सकता है। ये शरीर में सूजन तथा प्रदाह को कम करने में भी योग देते हैं।

अस्थि संधि शोथ के उपचार हेतु अदरक के उपभोग का आयुर्वेदिक तरीका 
यदि आप अस्थि संधि शोथ नामक रोग से पीड़ित हैं और अदरक के सेवन से उसका उपचार करना चाह रहे हैं तो अदरक का सेवन निम्न प्रकार से करें।
क. अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े लेकर उन्हें अच्छी तरह से पीस लें।
ख. अब उन्हें किसी बरतन में डालकर दो कप पानी मिला लें।
ग. उसके उपरांत 10-15 मिनट तक उबालें ताकि अदरक की लज्जत पानी में समा जाए।
घ. 10-15 मिनट तक उबालने के बाद इसे एक कप में छान लें और चाय की तरह पी लें।
ङ. इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चीनी या शहद भी मिला सकते हैं।
च. आप इस चाय को दिन में दो या तीन बार पी सकते हैं।
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8. उच्च रक्तचाप के उपचार में मदद 
अदरक हाइपोटेंसिव होती है तथा इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं और इसी कारण यह उच्च रक्तचाप के मामले में काफी फायदेमंद साबित होती है। अतः अदरक का सेवन आपके रक्तचाप को नियंत्रित कर सकता है।

9. क्रोनिक ओब्सट्रक्टिव पल्मोनरी रोग के उपचार में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक अपने उपचारात्मक गुणों के लिए जानी जाती है। यह शरीर में व्याप्त कफ एवं वात की गड़बड़ी को ठीक करती है और इसी कारण फेफड़ों के रोग, क्रोनिक ओब्सट्रक्टिव पल्मोनरी रोग के उपचार में  मदद देती है। अतः अदरक का रोज सेवन करने से फेफड़ों को आराम मिलता है। ये वायु के मार्ग की प्रदाह को कम करके श्वसन में राहत प्रदान करते हैं।

क्रोनिक ओब्सट्रक्टिव पल्मोनरी रोग के उपचार हेतु अदरक के उपभोग संबधी आयुर्वेदिक टिप्स 
यदि आप क्रोनिक ओब्सट्रक्टिव पल्मोनरी रोग से ग्रस्त हैं और उसका उपचार अदरक के उपभोग द्वारा करना चाहते हैं तो अदरक के सेवन का निम्न तरीका अपनाएं।
क. एक या दो चम्मच अदरक का ताजा जूस लें।
ख. अब चाहें तो इसमें शहद भी मिला सकते हैं।
ग. इसमें शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें और क्रोनिक ओब्सट्रक्टिव पल्मोनरी रोग के उपचार हेतु इसका दिन में दो बार सेवन करें।

10. मधुमेह के उपचार में मदद 
आयुर्वेद-
आयुर्वेद के अनुसार अदरक में दीपन तथा पाचन संबंधी गुण मौजूद पाए जाते हैं जो मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। यह शरीर में व्याप्त वात की गड़बड़ी को ठीक करके पाचन तंत्र  को सुधारती है। अदरक का सेवन शरीर में जमा टोक्सिन या जीव विष को शरीर से हटाने में मदद करता है।
इससे इंसुलिन के लेवल वृद्धि होने के साथ-साथ शरीर में उसके प्रतिरोध में कमी आती है।

मधुमेह के रोग के उपचार हेतु अदरक के उपभोग के लिए आयुर्वेदिक टिप्स
यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं और उसका अदरक के उपभोग से इलाज करने के इच्छुक हैं तो अदरक का सेवन निम्न प्रकार से करें।
क. अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े लेकर उन्हें अच्छी तरह से पीस लें।
ख. अब उन्हें एक बरतन में डालकर दो कप पानी मिला लें।
ग. इसके उपरान्त 10-15 मिनट तक उबालें ताकि अदरक की लज्जत पानी में समा जाए।
घ. इसे 10-15 मिनट तक उबालने के बाद एक कप में छान लें और चाय की तरह पी लें।
ङ. इसका स्वाद बढ़ाने के लिए आप इसमें चीनी या शहद मिला सकते हैं।
च. यदि आप इसका दिन में दो या तीन बार सेवन करेंगे तो रक्त शर्करा के स्तर में कमी आएगी।

इरिटेबल बावेल सिंड्रोम के उपचार में मदद 
इरिटेबल बावेल सिंड्रोम का कारण शरीर में उत्पन्न पाचक अग्नि का असंतुलन होता है। अदरक में दीपन तथा पाचन गुण मौजूद पाए जाते हैं जो पाचक अग्नि को संतुलित करके इस रोग को नियंत्रित करती है। अतः यदि आप अदरक के टुकड़े पर सेंधा नमक डालकर उसे चबाएंगे तो इरिटेबल बावेल सिंड्रोम से अवश्य राहत प्राप्त होगी।

चिकित्सक द्वारा निर्देशित अदरक की उपयुक्त खुराक या मात्रा 
चिकित्सक द्वारा निर्देशित अदरक की उपयुक्त मात्रा इस प्रकार है:
• अदरक का चूर्ण- आप अदरक के आधा या एक चम्मच चूर्ण का सेवन दिन में दो बार कर सकते हैं।
• अदरक कैपसूल- आपको दिन में दो बार इसका एक-एक कैपसूल लेना चाहिए।
• अदरक की गोलियां- आप इसकी एक या दो गोलियां दिन में दो बार ले सकते हैं।
• अदरक का रस या जूस- आप अदरक के जूस का एक या दो चम्मच की मात्रा में सेवन कर सकते हैं।
• अदरक का पाउडर- आपको अदरक के पाउडर का एक-चौथाई या आधा चम्मच की मात्रा में सेवन करना चाहिए या फिर चिकित्सक की सलाहनुसार उपभोग करना चाहिए।
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चिकित्सकीय उपचार में अदरक के उपयोग - Ginger use in Medical Treatment in Hindi

अदरक का इस्तेमाल चिकित्सकीय उपचार में किया जा सकता है। आइए जाने कि आप इसका उपयोग कैसे कर सकते हैं।

1. अदरक की चाय 
अगर आप खांसी-जुकाम से पीड़ित हैं तो निम्न विधि का पालन करते हुए इसकी चाय बनाकर पी सकते हैं।
क. अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े लेकर उन्हें अच्छी तरह से पीस लें ।
ख. अब एक बरतन में दो कप पानी लें और अदरक को इसमें डाल लें।
ग. उसके उपरांत इसे 10-15 मिनट के लिए उबालें ताकि अदरक की लज्जत पानी में समा जाए।
घ. दस से पंद्रह मिनट तक उबालने के पश्चात इसे एक कप में छान लें।
ङ. आप इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चीनी या शहद भी मिला सकते हैं।
च. अब इसमें थोड़ा नींबू निचोड़ कर इसे पी लें।
छ. दिन में दो-तीन बार अदरक की चाय पीने से सरदी-खांसी में अच्छा आराम मिलेगा।

2. अदरक के पानी के गरारे 
यदि आप गले की दाह या प्रदाह से पीड़ित हैं तो आपको अदरक के पानी के गरारे करने चाहिए। आइए जाने कि गरारे करने हेतु अदरक का पानी कैसे तैयार करें।
क. एक साबुत अदरक लेकर पीस लें।
ख. अब एक या दो चम्मच पिसी हुई अदरक को एक बरतन में डालकर उसमें एक कप पानी मिला लें।
ग. उसके उपरांत 8-10 मिनट तक उबालें।
घ. इस तरह उबिलने के बाद उसे एक कप में छान लें और उसमें काली मिर्च डालें।
ङ. अब आप इस अदरक के पानी से गरारे कर सकते हैं। दिन मे एक या दो बार गरारे करने से गले की दाह से राहत मिल जाएगी।

3. अदरक का स्किन टोनर के रूप में उपयोग 
यदि आपको स्वस्थ एवं कांतिमय त्वचा चाहिए तो आप निम्न प्रकार से स्किन टोनर तैयार कर सकते हैं।
क. एक कटोरे में आधा या एक चम्मच अदरक का पाउडर या पिसी हुई अदरक लें।
ख. अब अदरक के पाउडर या पिसी हुई अदरक में शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं और 10-15 मिनट तक इसी प्रकार लगा रहने दें।
घ. उसके उपरांत इसे ठंडे पानी से धो लें।
ङ. चमकदार और स्वस्थ त्वचा पाने के लिए इस उपाय को दिन में एक बार अपनाएं।

4. अदरक की स्लाइस
यदि आप खांसी से  परेशान हैं तो इसके उपचार के लिए निम्न उपचारात्मक टिप्स अपनाइए।
क. एक साबुत अदरक लेकर चाकू से इसकी स्लाइस या फांकें काट लीजिए।
ख. इन स्लाइस को तब तक भूनिए जब तक ये कुरकुरी तथा ठोस न हो जाएं।
ग. आप इन स्लाइस पर अपने स्वाद के अनुसार नमक लगाकर खा सकते हैं।
घ. आप सूखी खांसी के उपचार के लिए अदरक की इन स्लाइस का दिनभर में एक या दो बार सेवन कर सकते हैं।

5. अदरक की कैंडी
यदि आप मोशन सिक्नेस या मतली से परेशान हैं तो अदरक की मदद से उसका उपचार निम्न प्रकार से कर सकते हैं।
क. एक साबुत अदरक लेकर उसको छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
ख. अब इनको किसी कांच के बरतन में डालकर 8-10 दिनों तक धूप में रख दें। ऐसा करने से अदरक के टुकड़े बाहर से थोड़ा सूख जाएंगे।
ग. चौथे या पांचवें दिन इसमें एक कप चीनी तथा नमक मिला कर बाकी दिनों तक ऐसे ही रखा रहने दें।
घ. इसकी समयावधि पूरी हो जाने पर इन अदरक की कैंडी का सेवन मोशन सिक्नेस या मतली के उपचार के लिए कर सकते हैं।

6. अदरक का जूस
अगर आप मांसपेशियों की ऐंठन यानी मस्ल क्रेंप्स से परेशान हैं तो उसके उपचार हेतु निम्न प्रकार से अदरक का जूस तैयार करके पी सकते हैं।
क. अदरक का 1-2 चम्मच जूस निकाल कर एक बाल्टी में डाल लें।
ख. अब इस बाल्टी को गुनगुने पानी से भर लें और इस पानी में स्नान करें।
ग. इस पानी में स्नान करने से मांसपेशियों की ऐंठन तथा दर्द में आराम मिलेगा।

7. अदरक के चूर्ण का दूध या शहद में सेवन
आप अदरक के चूर्ण का दूध में निम्न प्रकार से सेवन कर सकते हैं।
क. एक गिलास में  एक-चौथाई या आधा चम्मच अदरक का पाउडर लें।
ख. आप इसमें 1-2 चम्मच शहद या फिर गुनगुना दूध मिला लें।
ग. आप अदरक के चूर्ण का शहद या दूध में दिन में दो बार सेवन कर सकते हैं।

8. अदरक के कैपसूल का दूध या पानी से सेवन
आप अदरक के कैपसूल का सेवन दूध या पानी के साथ निम्न विधि से कर सकते हैं।
क. आप अदरक के एक या दो कैपसूल का सेवन कर सकते हैं।
ख. आप इन कैपसूल का सेवन दूध या पानी के साथ कर सकते हैं।
ग. आप बेहतर परिणाम के लिए दिन में दो इसके कैपसूल का सेवन कर सकते हैं।

9. अदरक की गोलियों का दूध या पानी से सेवन
आप अदरक की गोलियों का सेवन दूध या पानी के साथ निम्न प्रकार से कर सकते हैं।
क. आप अदरक की एक या दो गोलियों सेवन कर सकते हैं।
ख. आप इसकी गोलियों को गुनगुने दूध या पानी के साथ निगल सकते हैं।
ग. आप बेहतर परिणाम के लिए इनका दिन में दो बार सेवन कर सकते हैं।

10. अदरक की ताजा जड़ 
आप अदरक की जड़ का सेवन निम्न प्रकार से कर सकते हैं।
क. अदरक की 1-2 इंच लंबी जड़ लें।
ख. आप इसका सेवन अपनी इच्छा अनुसार पका कर भी कर सकते हैं और बिना पकाए भी।
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अदरक के दुष्प्रभाव - Side Effects of Ginger in Hindi

अदरक के उपभोग के कुछ दुष्प्रभाव भी देखे जाते हैं जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं।
• ह्रदय दाह या अम्ल शूल
• बलेंचिंग

अदरक के सेवन से संबंधित सावधानियां - Precautions Related to Consumption of Ginger in Hindi

अदरक के सेवन से पूर्व कुछ सावधानियां रखना अनिवार्य है। आइए जानें कि कौन-कौन सी सावधानियां रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों की सलाह 
विशेषज्ञों के अनुसार आपको नीचे दी गयी कुछ सावधानियां रखनी चाहिए।
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक आपको निम्न सावधानियां रखनी चाहिए:
1. अदरक की प्रकृति बहुत गरम होती है इसीलिए इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह डायरिया,  ह्रदय दाह तथा पेट की अन्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
2. यदि आप रक्त स्राव या पित्त की गड़बड़ी के शिकार हैं तो आपको अदरक का सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए।

ह्रदय रोगियों के लिए 
यदि आप ह्रदय रोगी हैं तथा उच्च रक्तचाप की दवाइयां खा रहे हैं तो  आपको अदरक के सेवन के दौरान अपना रक्तचाप नियमित रूप से चैक कराना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं के लिए 
गर्भवती महिलाओं को गर्भकाल के दौरान अदरक का सेवन न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसके सेवन से गर्भपात का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

एलर्जी के रोगियों के लिए 
ऐसे लोग जिन्हें एलर्जी है या जिन्हें एलर्जी का खतरा बना रहता है उन्हें अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए।

मधुमेह के रोगियों के लिए 
आयुर्वेद- वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक यदि व्यक्ति मधुमेह रोधी दवाइयों का सेवन कर रहा हो तो अदरक के सेवन के उपरांत उसे अपने रक्त शर्करा के स्तर की जांच अवश्य करानी चाहिए। मधुमेह की दवाइयों के साथ-साथ अदरक का सेवन रक्त शर्करा के स्तर को कम कर सकता है। अतः मधुमेह के रोगियों को सलाह दी जाती है कि अदरक का सेवन करें तो अपने रक्त शर्करा के स्तर की नियमित जांच कराते रहें।

अन्य चिकित्सकीय अंतःक्रिया 
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक यदि आप रक्त स्राव या पित्त की गड़बड़ी से पीड़ित हैं तो आपको अदरक का उपभोग बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए। यदि आप कोई प्रत्यम्ल औषधि या पीपीआई का सेवन कर रहे हैं तो आपको अदरक का उपभोग करने से पूर्व चिकित्सक का परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से पेट में अम्ल बनने की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
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अदरक से संबंधित प्रश्नोत्तर - Ginger Related FAQ's in Hindi

प्र. क्या अदरक के छिलकों का सेवन करना उचित रहता है?
उ.
अदरक के छिलकों का सेवन करना हानिकारक नहीं है मगर फिर भी इसके उपभोग से पूर्व छिलका उतार लेना सही रहता है।

प्र. क्या किडनी पर अदरक के सेवन का कोई दुष्प्रभाव पड़ता है?
उ.
ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद नहीं है जो यह साबित करे कि अदरक किडनी से संबंधित किसी रोग के उपचार में मदद करती है। इसके अतिरिक्त यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है और साथ ही मतली या उलटी से राहत देती है।

प्र. क्या अदरक की चाय पीने का कोई लाभ या फिर दुष्प्रभाव है?
उ.
अदरक की चाय पीने के कई फायदे हैं, जैसे कि यह यात्रा के दौरान मतली या उलटी से राहत देती है। 

प्र. क्या अदरक के सेवन से खांसी में राहत मिलती है?
उ.
अदरक में मौजूद एंटी-टयूसिव तथा एंटीइनफ्लेमेट्री गुण खांसी में आराम देते हैं।

प्र. क्या अदरक का जूस स्वास्थ्यवर्धक होता है?
उ.
आइए, इस बारे में वैज्ञानिक तथा आयुर्वेदिक दोनों तरह के मत जानते हैं।
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक में  वात- कफ को संतुलित करनेवाले दीपन व पाचन गुण मौजूद पाए जाते हैं जो मधुमेह तथा मांसपेशियों की ऐंठन से राहत देकर हमारी सेहत में सुधार लाते हैं। इसके अलावा अदरक हमारे पाचन तंत्र को मजबूत करती है तथा साथ ही उपापचय में सुधार लाती है।

स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अदरक के जूस के उपभोग से संबंधित आयुर्वेदिक टिप्स 
यदि आप अपनी संपूर्ण सेहत में सुधार लाने के उद्देश्य से अदरक के जूस का सेवन करना चाहते हैं तो निम्न टिप्स का पालन करें।
क. एक गिलास में  1-2 चम्मच अदरक का जूस लें।
ख. इसमें गुनगुना पानी डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. अच्छी सेहत पाने के लिए अदरक के जूस को गुनगुने पानी में नियमित रूप से पिएं ।

प्र. क्या पुरुषों के लिए अदरक के सेवन का कोई लाभ है?
उ.
आइए, इस बारे में विज्ञान तथा आयुर्वेद दोनों के मत जानें।
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक में वात को संतुलित करने वाले गुण मौजूद पाए जाते हैं जो पुरुषों में शुक्राणुओं की वृद्धि करते हैं और पुरुष हार्मोन की कार्यप्रणाली में सुधार लाते हैं। अतः अदरक का सेवन पुरुषों की यौन गतिविधियों में सुधार लाता है।
अदरक में एफ्रोडिसियाक गुण मौजूद पाए जाते हैं जो पुरुषों के लिए गुणकारी होते हैं क्योंकि ये वीर्य की गुणवत्ता में वृद्धि करते हैं तथा यौन गतिविधियों में सुधार लाते हैं। अदरक में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट वीर्य को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाते हैं। अतः इस तरह अदरक का सेवन पुरुषों के लिए बेहतर है और यह उनकी जननक्षमता को बढ़ाती है।

प्र. क्या अदरक के पानी के सेवन का कोई फायदा मिलता है?
उ.
आइए, अदरक के पानी के सेवन के बारे में विज्ञान तथा आयुर्वेद दोनों के मत जानें।
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक का पानी अपने दीपन, पाचन तथा वात को संतुलित करने वाले गुणों के कारण यह वात की गड़बड़ी को ठीक करके शरीर को टोक्सिन या आम से छुटकारा दिलाती है। अतः अदरक के पानी का नियमित रूप से सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत बनता है और बेहतर सेहत का सुख भोगने को मिलता है। अदरक के पानी में अनेक औषधीय गुण विद्यमान पाए जाते हैं जो शरीर को कई तरह के लाभ पहुंचाते हैं, जैसे कि शारीरिक दर्द से राहत देना, भूख बढ़ाना,  मतली से राहत देना आदि।

प्र. क्या कच्ची अदरक खाने से कोई फायदा मिलता है?
उ.
अदरक में एंटीऑक्सीडेंट तत्व मौजूद पाए जाते हैं जो शरीर से टोक्सिन या जीव विष को हटाकर कोशिकाओं की क्षति से बचाव करते हैं। कच्ची अदरक के सेवन से कोई हानि नहीं होती है बल्कि कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। अदरक में निहित एंटीबैक्टीरियल तथा एंटीमाइक्रोबियल तत्व शरीर को संक्रमण व अन्य कई प्रकार के रोगों से बचाते हैं। अतः कच्ची अदरक का सेवन समस्त सेहत के लिए फायदेमंद होता है। इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल एवं रक्त शर्करा का लेवल नियंत्रित लहता है।

प्र. क्या अदरक बालों के गिरने या उनकी वृद्धि में कोई मदद करती है?
उ.
भारत में बालों की हानि से बचने तथा उनकी वृद्धि के लिए अदरक का घरेलू औषधि के तौर पर सालों से इस्तेमाल होता आया है। अदरक बालों का झड़ना नियंत्रित करती है और उनकी वृद्धि में मदद करती है। फिर भी इस विषय में कोई खास साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।

प्र. क्या अदरक प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए फायदेमंद होती है?
उ.
आइए, इस विषय में वैज्ञानिक तथा आयुर्वेदिक दोनों प्रकार के मतों के बारे में जानते हैं।
आयुर्वेद- आयुर्वेदिक अध्ययन के मुताबिक अदरक में मौजूद रासायनिक गुण प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं और संक्रामक  रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। इसके अलावा अदरक के एंटीऑक्सीडेंट तथा एंटीबैक्टीरियल गुण भी प्रतिरक्षा प्रणाली की मजबूती में योग देते हैं।
अदरक में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले गुण मौजूद पाए जाते हैं जो प्रतिरोधी शक्ति में वृद्धि करते हैं और जीवाणुओं की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं।

प्र. क्या अदरक का त्वचा के लिए कोई फायदा है?
उ.
अदरक का कफ को संतुलित करने वाला गुण त्वचा से संबंधित कई समस्याओं जैसे कि मुहांसों, अत्यधिक तेलीय त्वचा या शुष्क त्वचा आदि के उपचार में मदद करता है। अदरक त्वचा के कफ को संतुलित करके स्वस्थ तथा सेहतमंद त्वचा प्रदान करती है। फिल भी अदरक के जूस का त्वचा पर इस्तेमाल करने से पूर्व पैच टेस्ट कराना उचित रहता है।

स्वस्थ त्वचा के लिए अदरक के जूस के उपयोग से संबंधित टिप्स
यदि आप  मुहांसों या त्वचा के अत्यधिक तेलीय होने से परेशान हैं और अदरक के जूस से इस समस्या का उपचार चाहते हैं तो निम्न विधि का पालन कीजिए।
क. एक कटोरे में 1-2 चम्मच अदरक का जूस लें।
ख. अब इसमें 1-2 चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें।
ग. इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं और फिर 15-20 मिनट तक लगा रहने दें।
घ. 15-20 मिनट के बाद इसे ठंडे पानी से धो लें।
ङ. मुहांसों से छुटकारा पाने के लिए आप इस प्रक्रिया को सप्ताह में दो- तीन दोहरा सकते हैं।

संदर्भ:

http://www.ayurveda.hu/api/API-Vol-1.pdf
https://www.researchgate.net/publication/262001210_An_Overview_on_Ajwain_Trachyspermum_ammi_Pharmacological_Effects_Modern_and_Traditional 
http://www.paulinamedicalclinic.com/wp-content/uploads/2014/06/ginger-review.pdf
https://www.semanticscholar.org/paper/Medicinal-uses-of-ginger-%28Zingiber-officinale-and-Shakya/8adb56da6ae183598a263df9b3471d2e73e7a103?p2df
https://books.google.co.in/books?id=7pNGS_voFrsC&pg=PA30&dq=ginger+juice+benefits&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjYxaqz0MLiAhX-7nMBHSI6ALgQ6AEIKDAA#v=onepage&q=ginger%20juice%20benefits&f=false
https://www.researchgate.net/publication/264146811_Zingiber_officinale_Rosc_A_traditional_herb_with_medicinal_properties
https://www.tandfonline.com/doi/abs/10.1080/14786419.2017.1367779

NS Desk

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