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अश्वगंधा के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ashwagandha Ke Fayde Aur Nuksan In Hindi

By NS Desk | Herbs and Fruits | Posted on :   19-Dec-2020

अश्वगंधा के फायदे और नुकसान हिंदी में - Ashwagandha Ke Fayde Aur Nuksan In Hindi

अश्वगंधा क्या है? (What is Ashwagandha?) | Ashwagandha Kya Hai

भारतीय औषधियों के सरताज के रूप में विख्यात अश्वगंधा अपने औषधीय गुणों खासतौर से व्यक्ति को तनाव एवं चिंता से मुक्ति दिलाने के रूप में लोकप्रिय है। यह औषधि मुख्यतः भारत, मध्य-पूर्व और अफ्रीका के कुछ भागों में उगाई जाती है। शताब्दियों से इसका प्रयोग स्वास्थ्य से संबंधित अनेक समस्याओं अथवा रोगों के इलाज के लिए किया जाता रहा है और इसी कारण यह आयुर्वेद उपचार तंत्र की खास औषधियों में से एक है। साक्ष्यों के मुताबिक अश्वगंधा का प्रयोग प्राचीन काल में भी होता था और यह लगभग 3000 साल पुरानी औषधि है।

अश्वगंधा शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई? (How did the word Ashwagandha originate?) | Ashwagandha Shabad Ki Utpatti Kaise Hui

अश्वगंधा एक संस्कृत शब्द है जिसमें सम्मिलित अश्व का अर्थ 'घोड़ा' तथा गंध का अर्थ 'महक' होता है। इसे यह नाम इसकी जड़ों से आने वाली अश्व जैसी तीव्र गंध के कारण मिला है। यह औषधि 'भारतीय जिनसेंग' और 'विंटर चेरी' के रूप में भी लोकप्रिय है।

अश्वगंधा के ऐतिहासिक उपयोग (Historical Uses of Ashwagandha) | Ashwagandha Ke Aitihasik Upyog

ऐतिहासिक काल या अतीत में इस चिकित्सीय औषधि का उपयोग जिन प्रमुख रोगों या स्वास्थ्य-समस्याओं के उपचार के लिए होता था, वे हैं- तनाव, चिंता के कारण पड़ने वाला दौरा, अनिद्रा, आर्थ्राइटिस या संधिशोथ, मधुमेह, यादाश्त की कमज़ोरी, ज्वर, जठरांत्र की गड़बड़ी, कब्ज, त्वचा संबंधित समस्याएं, सर्पदंश आदि।

इस औषधि की जड़ों में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण तत्व मौजूद पाए जाते हैं जो वृद्ध और नौजवान दोनों के स्वास्थ्य के लिए समान रूप से फ़ायदेमंद होते हैं। साथ ही इसकी पत्तियों, बीजों और फलों का अतीत एवं वर्तमान दोनों में ही आयुर्वेदिक दवा के रूप में इस्तेमाल होता आया है।

इन सब लाभों के साथ-साथ अश्वगंधा को केवल अतीत में ही नहीं बल्कि वर्तमान में भी एक ऐसे 'रसायन' अर्थात् जादुई रूप से उत्प्रेरित ऐसी औषधि के तौर पर जाना जाता है जिसमें उम्र-रोधी अथवा बुढ़ापे के संकेतों को रोकने के सब गुण मौजूद पाए जाते हैं और जो व्यक्ति को मानसिक व शारीरिक तौर पर युवा बनाए रखने में मदद करती है।

आयुर्वेदिक उपचार में अश्वगंधा के उपयोग के लाभ (Benefits Of Using Ashwagandha In Ayurvedic Treatment) | Ayurvedic Upchar Mein Ashwagandha Ke Upyog Ke Labh 

अब तक अनेक ऐसे अध्ययन किए जा चुके हैं जो अश्वगंधा के विभिन्न प्रकार से होने वाले लाभकारी प्रभावों को दर्शाते हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर अध्ययन जानवरों पर किए गए हैं और जो मनुष्य पर इसके प्रभावों को ज्यादा विस्तार से स्पष्ट नहीं करते । लेकिन फिर भी कोई यह नहीं कह सकता कि चिकित्सकीय औषधियां भारतीय आयुर्वेदिक उपचार तंत्र का एक अत्यंत विश्वसनीय और लोकप्रिय स्रोत नहीं हैं।

बीमारियाँ कम घातक हों या अधिक अश्वगंधा सभी के उपचार में एक उत्प्रेरक के तौर पर काम करती है। इसे एक 'एडाप्टोजेन' (एक ऐसी औषधि जो शरीर को सामान्य तथा नियंत्रित रखती है।) के रूप में भी वर्गीकृत किया गया है जो तनाव,अवसाद और चिंता के रोगियों की शारीरिक क्रिया प्रणाली में सुधार करके उन्हें अच्छी राहत प्रदान करती है। यह ब्लड शुगर व कार्टिसोल लेवल को दुरुस्त बनाकर रखने, संज्ञानात्मक क्षमताओं को बढ़ाने के अतिरिक्त और भी बहुत सारे  फायदे पहुँचाती  है। 

अश्वगंधा के 7 फायदे ( 7 Benefits of Ashwagandha)रोगों/ स्वास्थ्य-समस्याओं के उपचार में अश्वगंधा का प्रयोग (Use Of Ashwagandha In The Treatment Of Diseases / Health Problems) | Ashwagandha Ke Fayde In Hindi

यहां हम रोगों के उपचार के विभिन्न तरीकों में अश्वगंधा के उपयोग के संबंध में वैज्ञानिक एवं आयुर्वेदिक दृष्टि से चर्चा करेंगे।

तनाव संबंधित समस्या (Stress Related Problem)

विज्ञान
 अनेक वैज्ञानिक शोधों द्वारा यह साबित हो चुका है कि अश्वगंधा किसी व्यक्ति के तनाव -स्तर को कम करने में काफ़ी मददगार है। अश्वगंधा का चूर्ण कार्टिसोल स्तर जो कि एक 'तनाव हार्मोन' है उसको प्रभावी ढंग से कम करता है और  इस तरह रोगी को किसी भी प्रकार के तनाव जैसे भय, चिड़चिड़ाहट आदि से राहत मिलती है।

आयुर्वेद
वात दोष का घटना-बढ़ना व्यक्ति में तनाव का कारण बनता है। अश्वगंधा की जड़ से तैयार चूर्ण का सेवन चिंता, भय, चिड़चिड़ाहट या यूं कहिए कि समग्र तनाव को कम करने में सहायक होता है। इसका सेवन चाय, जड़ चूर्ण से तैयार क्वाथ, उबले पानी,अदरक या शहद आदि के साथ किया जा सकता है।

चिंता संबंधित दिक्कतें (Anxiety Related Issues)

विज्ञान
तनाव की तरह चिंता का इलाज भी अश्वगंधा की मदद से सफलतापूर्वक  किया जा सकता है। यह कार्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करके रोगी की चिंता को कम करने में मदद करती है।

आयुर्वेद 
असंतुलित या अत्यधिक वात दोष व्यक्ति में  तनाव उत्पत्ति का कारण बनता है। इसे अश्वगंधा की मदद से कम किया जा सकता है।यह शरीर में वात को संतुलित करने में मदद करती है और इसी कारण व्यक्ति चिंता के दौरे आदि की समस्याओं से राहत महसूस करता है।

उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)

विज्ञान
मनुष्य शरीर में जब रक्त का दबाव बढ़ जाता है तो उच्च रक्तचाप की समस्या पैदा हो जाती है।अश्वगंधा शरीर में कार्टिसोल के स्तर को कम करके उच्च रक्तचाप को कम करने में सहायक होती है। साथ ही इससे जुड़ी समस्याओं जैसे तनाव, चिंता आदि से भी राहत प्रदान करती है। इस समस्या से पीड़ित मनुष्य अश्वगंधा की जड़ के चूर्ण को चाय के रूप में या फिर पानी के साथ ग्रहण कर सकता है।

आयुर्वेद 
आयुर्वेद में उच्च रक्तचाप या रक्तगत वात व्यक्ति में उच्च दबाव या चिंता जैसी समस्या के सामान्य परिणाम हैं। अश्वगंधा उच्च रक्तचाप के कुछ मूल कारणों जैसे कि तनाव एवं चिंता को कम करके उसे नियंत्रित कर सकती है और शरीर में सामान्य रक्तचाप बनाए रखने में मदद कर सकती है।

मधुमेह मेलिटस (टाइप 1 तथा टाइप 2) (Diabetes Mellitus (Type 1 And Type 2) )

विज्ञान
अश्वगंधा मधुमेह से पीड़ित मनुष्य के शरीर में इंसुलिन के उत्पादन को प्रेरित करती है तथा उसकी सुग्राहिता यानी ग्रहणशीलता में भी वृद्धि करती है जिससे शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।यह इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं का संवर्धन कर शरीर में इंसुलिन के स्राव को बढ़ाती भी है। शोध यह भी साबित कर चुके हैं कि यह औषधि कोशिकाओं को कम इंसुलिन रोधी बनाती है व साथ ही शरीर की  कोशिकाओं को इस काबिल भी बनाती है कि वे  ग्लूकोज लेवल का पूर्ण रूप से उपयोग कर सकें।

आयुर्वेद 
आयुर्वेद में मधुमेह के उपचार को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है- अपतृपण एवं संतृपण। अपतृपण या कुपोषण एक ऐसी थेरेपी है जिसका प्रयोग कफ ग्रस्त या मोटापे की वजह से मधुमेह का शिकार लोगों पर किया जाता है। 
जबकि संतृपण या संपूर्ति वह थैरेपी है  जिसको मधुमेह के उन दुबले-पतले रोगियों पर आज़माया जाता है जिनका शरीर वात या पित्त से ग्रस्त होता है।
औषधि वात एवं कफ दोनों प्रकार के दोषों को दूर करके मधुमेह में फायदा पहुँचाती है।

पुरुष बांझपन (Male Infertility)

विज्ञान
बांझपन के कारण तनाव का शिकार पुरुष अश्वगंधा की मदद ले सकते हैं क्योंकि अश्वगंधा एक जाना-पहचाना कामोद्दीपक है। यह औषधि अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण शरीर में टेस्टोस्टिरोन के लेवल में सुधार लाती है व किसी भी कारण से होने वाली शुक्र की क्षति को रोकती है। फलतः पुरुष  बांझपन से उत्पन्न तनाव में राहत मिलती है।

आयुर्वेद 
अश्वगंधा शरीर में अत्यंत प्रभावी ढंग से वात को  संतुलित कर पुरुष बांझपन का सफलतापूर्वक समाधान करने में पूर्णतः सक्षम औषधि है। अश्वगंधा शुक्र की गुणवत्ता तथा उसकी मात्रा दोनों में  वृद्धि करती है और इस तरह शरीर को यौन रूप से स्वस्थ  व मजबूत बनाती है।

आर्थ्राइटिस (Arthritis)

विज्ञान
विभिन्न अध्ययनों के जरिए यह स्पष्ट हो चुका है कि अश्वगंधा में ऐसे पीड़ाहारक औषधीय गुण मौजूद पाए जाते हैं जो आर्थ्राइटिस या संधिशोथ के दर्द को कम कर करते हैं। अश्वगंधा की जड़ों तथा पत्तियों से प्रोस्टाग्लैंडीन जैसा दर्दनिवारक बनाया जाता है। यह आर्थ्राइटिस से उत्पन्न प्रदाह एवं दर्द को कम करती है।

आयुर्वेद 
आयुर्वेद में ऐसा माना जाता है कि मनुष्य में  गंभीर  वात दोष उत्पन्न होने पर वह आर्थ्राइटिस की समस्या से ग्रस्त हो जाता है। इसे संधिवात भी कहते हैं। अश्वगंधा में  वात को संतुलित या शांत करने के सब गुण मौजूद होते हैं इसीलिए इसके चूर्ण का सेवन   जोड़ों व हड्डियों के दर्द व सूजन से राहत प्रदान करता है।

पार्किंसन की बीमारी (Parkinson's Disease)

विज्ञान
अश्वगंधा किसी रोगी में पार्किंसन्स की बीमारी या अन्य प्रकार की यादाश्त संबंधित क्षति के खतरे को कम करने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है। इसमें उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट गुण तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाने के साथ ही इस बीमारी के जोखिम को कम करने में काफी मददगार साबित होते हैं।

आयुर्वेद 
आयुर्वेद में  पार्किंसन की बीमारी को 'वेपुथ' (कंपकंपी) के समान प्रकृति का रोग माना गया है  जिसके लक्षण इसी के समान होते हैं। यह मुख्यतः  शरीर में वात की गड़बड़ी के कारण पनपता है। इसीलिए अश्वगंधा के सेवन से शरीर में वात को संतुलित करके इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

अश्वगंधा के नुकसान​ / दुष्प्रभाव (Side Effects Of Ashwagandha) | Ashwagandha Ke Nuksan In Hindi

यद्यपि अश्वगंधा में व्यक्ति को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने वाले अनेक चमत्कारी गुण उपस्थित पाए जाते हैं मगर फिर भी इसके कुछ हानिकारक प्रभाव देखे गए हैं। ये विशेषतः किडनी या दिल की समस्याओं से ग्रस्त लोगों , गर्भवती महिलाओं, मधुमेह आदि के रोगियों में देखने को मिलते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक़ अश्वगंधा के कुछ सामान्य दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं:-

• अवसाद 
• मतली
• निम्न रक्तचाप 
• पेट में मरोड़ या दर्द 
• दस्त 
• अल्कोहल के साथ सेवन से गंभीर निद्रालुता

अश्वगंधा के सेवन से जठरांत्र से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं जैसे कि दस्त आदि उत्पन्न हो सकती हैं इसीलिए  विज्ञान और आयुर्वेद दोनों ही तरह के विशेषज्ञ इसके सेवन से पूर्व चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य समझते हैं। सेप्टर अल्सर से पीड़ित व्यक्ति को बिना चिकित्सक के परामर्श के  कभी भी  अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए।

अश्वगंधा का सेवन करते समय कौन-सी सावधानियां रखें? (What Precautions Should Be Taken While Taking Ashwagandha?) |  Ashwagandha Ka Sevan Karte Samay Kon Sa Savdhaniyan Rakhen

मधुमेह रोगी के लिए : (For Diabetic Patient)

-विज्ञान-विशेषज्ञों की राय
विज्ञान विशेषज्ञों के मुताबिक़ अश्वगंधा का सेवन रक्त में ग्लूकोज का लेवल कम कर सकता है। अतः अश्वगंधा या उसके किसी अनुपूरक का सेवन करें तो नियमित तौर पर ब्लड शुगर लेवल की जांच कराते रहें। मधुमेह की दवा खाने वाले लोग इसका सेवन बहुत ही कम मात्रा में करें।


थायराइड के रोगी के लिए : (For Thyroid Patient)

विज्ञान विशेषज्ञों की राय 
थायराइड के रोगी या इससे जुड़ी अन्य समस्याओं से ग्रस्त लोग अश्वगंधा का अधिक मात्रा सेवन न करें।वैज्ञानिक परीक्षणों के मुताबिक़ अश्वगंधा शरीर में थायराइड हार्मोन (टी 4) की वृद्धि का कारण बन सकती है जिससे व्यक्ति में थायराइड का खतरा और अधिक बढ़ सकता है। इसीलिए थायराइड के लेवल की नियमित जांच कराना भी अनिवार्य है। थायराइड अतिक्रियता अथवा थायराइडिज्म से पीड़ित व्यक्ति को इलाज के दौरान अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए।


दिल के रोगियों के लिए : (For Heart Patients)

विज्ञान विशेषज्ञों की राय 
आधुनिक विज्ञान विशेषज्ञों के मुताबिक़ दिल के रोगियों अश्वगंधा का नियंत्रित या बहुत ही सीमित मात्रा में सेवन करना चाहिए क्योंकि यह शरीर में निम्न रक्तचाप का कारण बन सकती है।यदि अश्वगंधा या उसके किसी अनुपूरक का सेवन करें तो रक्तचाप की नियमित जांच अवश्य कराते रहें।


गर्भवती महिलाओं के लिए : (For Pregnant Women)

विज्ञान विशेषज्ञों की राय 
गर्भावस्था के दौरान अश्वगंधा का सेवन गर्भाशय के संकुचन में वृद्धि करके गर्भपात का खतरा पैदा कर सकता है। अतः इन महीनों में अश्वगंधा का सेवन न करें।

-आयुर्वेद विशेषज्ञों की राय 
गर्भवती स्त्री को चिकित्सक की सलाह लेकर ही अश्वगंधा का सेवन करना चाहिए।अपनी मर्जी से किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।


स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए : (For Lactating Women)

-विज्ञान विशेषज्ञों की राय 
अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है जो यह सिद्ध करता हो कि स्तनपान के महीनों के दौरान अश्वगंधा का सेवन कोई फायदा पहुँचाता है। अतः गर्भावस्था तथा स्तनपान के दौरान अश्वगंधा का सेवन  न करना ही अच्छा है।

-आयुर्वेद विशेषज्ञों की राय 
शिशु को स्तनपान कराने वाली स्त्रियों को अश्वगंधा का सेवन करने से पूर्व चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य है। अतः अपनी मर्जी से किसी भी दवा का सेवन न करें।


किडनी से संबंधित रोगियों के लिए : (For Kidney Related Patients)

-विज्ञान विशेषज्ञों की राय 

किडनी से संबंधित रोगियों को अश्वगंधा के सेवन से परहेज करना ही बेहतर है, क्योंकि अश्वगंधा में मूत्रवर्धक गुण पाया जाता है। इसका सेवन किडनी में  घाव उत्पन्न कर सकता है तथा इस तरह स्थिति और भी बिगड़ सकती है। ऐसे व्यक्ति जिन्हें अतीत में किडनी से संबंधित रोग हुआ हो उन्हें भी अश्वगंधा के सेवन से पूर्व चिकित्सक का परामर्श लेना अनिवार्य है।

आयुर्वेदानुसार अश्वगंधा की उचित मात्रा/खुराक: (Proper Dose Of Ashwagandha According To Ayurveda)

आयुर्वेदिक उपचार में अश्वगंधा का प्रयोग मुख्यतः  गोलियों, चूर्ण (पाउडर) या कैपसूल के रूप में किया जाता है। अश्वगंधा के इन विविध रूपों का प्रयोग निर्देशित मात्रानुसार टाॅनिक, चाय या फिर मिल्कशेक आदि बनाने के लिए करते हैं।
यदि आप अपने चिकित्सक से परामर्श लेकर अश्वगंधा का प्रयोग कर पाने में असमर्थ हैं तो फिर निम्न प्रकार से भी इसका सेवन कर सकते हैं। 

अश्वगंधा की गोलियां: दिन में दो बार दोपहर एवं रात के भोजन के उपरांत 1-1 गोली का सेवन करें।
अश्वगंधा चूर्ण:  एक चौथाई या फिर आधा चम्मच चूर्ण का सेवन दिन में दो बार दोपहर एवं रात के भोजन के उपरांत करें।
अश्वगंधा कैपसूल: दिन में दो बार दोपहर एवं रात के भोजन के बाद 1-1 कैप्सूल का सेवन करें।

अगर आप किसी चिकित्सक से संपर्क करते हैं तो फिर औषधि की मात्रा उनके परामर्श के अनुसार ही लें।

अश्वगंधा से संबंधित आयुर्वेदिक केयर (परिचर्या) के प्रकार: (Types Of Ayurvedic Care Related To Ashwagandha)

1) अश्वगंधा चूर्ण 
अश्वगंधा की जड़ से तैयार चूर्ण भी मिलता है जिसके सेवन से तनाव, चिंता, उच्च रक्तचाप, मधुमेह मेलिटस, पार्किंसन की बीमारी आदि के लक्षणों में  काफ़ी फायदा मिलता है।

टिप्स:
-अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार आप अश्वगंधा की जड़ से तैयार चूर्ण का सेवन दूध या गरम पानी से कर सकते हैं। आप अश्वगंधा चूर्ण से चाय, लड्डू या श्रीखंड आदि बनाकर भी उसका सेवन कर सकते हैं।

क) अश्वगंधा चाय
अश्वगंधा की जड़ों या उसके चूर्ण से बनी चाय का सेवन तनाव, मधुमेह मेलिटस, उच्च रक्तचाप आदि में काफ़ी राहत पहुँचाता है।

टिप्स:
- किसी बरतन में 2 कप पानी लें।
- उसमें 1 चम्मच अश्वगंधा की जड़ से तैयार चूर्ण मिलाएँ।
- उसे अच्छी तरह से पानी में घुलने दें।
- आप अपनी चाय का स्वाद बढ़ाने के लिए उसमें कुछ मात्रा में दूध( उच्च शुगर लेवल वाले लोग इससे परहेज करें) शहद,अदरक आदि मिला सकते हैं।
- इसे गरम-गरम पिएं।
- प्रतिदिन 1 कप अश्वगंधा चाय पी सकते हैं।

ख) अश्वगंधा मिल्कशेक 
साधारण मिल्कशेक की जगह अश्वगंधा के मेल से बने विशेष मिल्कशेक को पीने से आप कई तरह के स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आप अपने स्वाद से समझौता किए बिना ही एक स्वस्थ जीवन-शैली को अपना सकते हैं।

टिप्स: 
- किसी बरतन में 1चम्मच घी लेकर उसमें 4 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को भून लें।
- आप इसमें शहद भी मिला सकते हैं, किंतु मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए।
- इस मिश्रण को गरम दूध में मिलाएँ।
- ठंडा दूध मिलाकर आप इसका मिल्कशेक भी तैयार कर सकते हैं।
- भावी उपयोग हेतु आप इसे फ्रिज में भी  सुरक्षित रख सकते हैं।

ग) अश्वगंधा के लड्डू 
अश्वगंधा का चूर्ण या गोलियों के बजाय उसकी मिठाई तैयार करके सेवन करना काफ़ी मजेदार तरीका साबित हो सकता है।

टिप्स:
- 1 चम्मच गुड़ तथा 2 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को अच्छी तरह से मिला लें।
- आप इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें नमक, काली मिर्च ( ब्लड शुगर की परेशानी हो तो ऐसा करने से परहेज करें) तथा  शहद भी मिला सकते हैं।
- इस मिश्रण को अच्छी तरह से गूंथ कर लोइयां तैयार कर लें। 
- फिर इस मिश्रण से छोटी गेंद के आकार के गोल-गोल लड्डू बना लें।
- अब चाहें तो इन्हें 4 दिनों के लिए भंडारित करके रख लें या फिर उनका उसी समय उपभोग कर लें।

घ) अश्वगंधा श्रीखंड
अश्वगंधा से श्रीखंड बनाकर भी इसका सेवन करके स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

टिप्स:
- 250 ग्राम गाढ़ी दही लें तथा उसे मलमल या सूती कपड़े में बाँधकर लटका दें ताकि उसका सारा पानी बह जाए।
- अब उस दही को चार भागों में बांट लें ।
-अब दही में अश्वगंधा चूर्ण तथा अपनी इच्छानुसार शहद/गुड़/शक्कर/मेवे आदि मिला लें।
- इस मिश्रण को गूंथकर नरम लोइयां तैयार कर लें और उन्हें भावी उपभोग के लिए फ्रिज में भंडारित करके रख लें।

ङ) अश्वगंधा की गोलियां 
ऊपर वर्णित स्वास्थ्य से संबंधित इन समस्याओं के निदान हेतु अश्वगंधा की गोलियां भी आती हैं।

टिप्स:
- अश्वगंधा की एक-एक गोली दिन में दो बार गरम पानी या दूध के साथ लें या फिर इसका सेवन  चिकित्सक के परामर्शानुसार करें।

च) अश्वगंधा कैप्सूल 

अश्वगंधा कैप्सूल के रूप में भी उपलब्ध है। अतः आप प्रतिदिन दोपहर और रात के भोजन के उपरांत एक-एक कैप्सूल गरम पानी या दूध के साथ ले सकते हैं।

टिप्स: 
- गरम पानी या दूध में मिश्रित करें। आप अपने स्वाद के अनुसार इसमें शहद, अदरक आदि भी मिला सकते हैं।  दिन भर में 2 से अधिक कैप्सूल का सेवन कभी न करें । आप इस बारे में अपने चिकित्सक का परामर्श भी ले सकते हैं।

अश्वगंधा के बारे में सामान्य प्रश्नोत्तर

क्या अश्वगंधा कैंसर का इलाज कर सकती है ? (Can Ashwagandha Cure Cancer?)

विज्ञान विशेषज्ञों के मुताबिक़ अश्वगंधा कैंसर का इलाज या इसकी रोकथाम कर सकती है, क्योंकि इसमें कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने के समस्त गुण  मौजूद पाए जाते हैं। यह कीमोथैरेपी से होने वाली हानि को भी कम कर सकती है।

अश्वगंधा-तेल का इस्तेमाल कैसे करें ? (How To Use Ashwagandha-Oil?)

अश्वगंधा का तेल व्यक्ति को कफ एवं वात दोनों प्रकार की समस्याओं से छुटकारा दिलाता है और बड़े ही  प्रभावशाली ढंग से पित्त के लेवल को बढ़ाता है। व्यक्ति अश्वगंधा-तेल का लेप या मालिश पूरे शरीर या उसके कुछ निर्धारित भागों पर कर सकता है।

टिप्स:
- तेल की कुछ बूंदें लें तथा शरीर के निर्धारित भाग पर हल्के से मालिश करें।
- उस भाग को तौलिए या कंबल से ढक लें।
- तेल को शरीर की कोशिकाओं में समाने या उतरने दें।
- मालिश के तुरंत बाद बाहर न निकलें। सर्दी के मौसम में इस बात पर विशेष ध्यान दें।

क्या शल्यक्रिया या सर्जरी से पूर्व अश्वगंधा का सेवन करना सुरक्षित है? (Is It Safe To Consume Ashwagandha Before Surgery Or Surgery?)

विज्ञान विशेषज्ञों के मुताबिक़ शल्यक्रिया या सर्जरी से पूर्व अश्वगंधा का सेवन कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि शरीर पर इसके हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं। अश्वगंधा व्यक्ति के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को धीमा कर सकती है और इसी कारण शल्यक्रिया से पूर्व व उसके उपरांत इसका सेवन भविष्य में भी इस तंत्र की धीमी गति का कारण बन सकता है। अतः इसी कारण  शल्यक्रिया के 2 सप्ताह पहले या बाद तक अश्वगंधा के सेवन की सलाह नहीं दी जाती है।

अश्वगंधा पुरुषों के लिए कैसे फ़ायदेमंद है? (How Is Ashwagandha Beneficial For Men?)

- विज्ञान विशेषज्ञ
विज्ञान विशेषज्ञ प्रमाणित कर चुके हैं कि अश्वगंधा तनाव प्रबंधन, चिंता व उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ पुरुषों की ताकत या उनके स्टेमिना को बढ़ाने का काम बखूबी करती है।

- आयुर्वेदिक विशेषज्ञ 
आयुर्वेदिक विशेषज्ञ अश्वगंधा के निम्न गुणों को सूचीबद्ध करते हुए इसे पुरुषों के लिए फ़ायदेमंद बताते हैं ,जैसे कि:
क) यह वाजीकरण या यौन इच्छा को बढ़ाती है।
ख) पुरुष के तन-मन को पुनर्योवन प्रदान करने वाली   रसायन औषधि मानी जाती है।
ग) शरीर के (बल) ताकत को बढ़ाती है।
घ) शुक्र धातु ( वीर्य) की गुणवत्ता तथा मात्रा दोनों में  वृद्धि करती है।
ङ) तनाव (दबाव) कम करती है।

क्या अश्वगंधा वज़न कम करने में सहायक है ? (Is Ashwagandha Helpful In Losing Weight?​)

- विज्ञान विशेषज्ञ
हां, अश्वगंधा कार्टिसोल लेवल को व्यवस्थित करके शारीरिक वज़न को कम करने में मदद करती है। शरीर में कार्टिसोल का लेवल कम होने से अतिरिक्त भोजन की जरूरत नहीं होती। फलतः शरीर का वज़न कम होता है।

- आयुर्वेद विशेषज्ञ 
व्यक्ति के शरीर में  'आम' (एक तरह का अपचित भोजन) एकत्र होने के कारण ही वज़न बढ़ता है अश्वगंधा की पत्तियां 'आम' मतलब मोटापे के लेवल को कम करने व उपापचय में वृद्धि करने में मदद करती हैं। यह मैदा धातु को भी संतुलित करती हैं जिससे मोटापे की दिक्कत से राहत मिलती है।

क्या अश्वगंधा बालों का गिरना रोक सकती है? (Can Ashwagandha Stop Hair Fall?)

-विज्ञान विशेषज्ञ
हां,  अश्वगंधा बालों की हानि से जुड़ी तनाव जनित समस्याओं का सफलतापूर्वक निराकरण कर सकती है। जब व्यक्ति तनाव का शिकार होता है तो एसीटीएच हार्मोन (adrenocorticotropic hormone) के स्राव की मात्रा बढ़ जाती है जिससे कार्टिसोल लेवल गंभीर रूप से बिगड़ जाता है
अश्वगंधा को एडाप्टोजेन के रूप में जाना जाता है जो तनाव जनित समस्याओं जैसे कि बालों का गिरना आदि के निदान हेतु प्रभावशाली मानी जाती है।

-आयुर्वेद विशेषज्ञ 
तनाव व्यक्ति के शरीर में वात दोष उत्पन्न करता है तथा अश्वगंधा इस वात दोष को संतुलित करके तनाव से मुक्ति दिलाती है। इस चिकित्सकीय औषधि के प्रयोग से परिशोधित ( स्निग्ध गुणों वाले) तेल को तैयार कर सकते हैं जो बालों से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का समाधान कर सकता है जैसे कि बालों का गिरना, बालों के सिरों का शुष्क होना आदि।

टिप्स: छह माह तक सप्ताह में 3 बार अश्वगंधा तेल की हल्की मालिश करें।

क्या अश्वगंधा अनिद्रा रोग की रोकथाम कर सकती है? (Can Ashwagandha Prevent Insomnia Disease?)

-विज्ञान विशेषज्ञ
हां,अश्वगंधा व्यक्ति के निद्रा संबंधित व्यवहार में  काफी सुधार ला सकती है एवं साथ ही उससे जुड़ी समस्याओं जैसे अनिद्रा आदि के समाधान में  सहायक सिद्ध हो सकती है। एक एडाप्टोजेनिक औषधि होने के कारण अश्वगंधा तनाव जनित अनिद्रा  रोग का सफलतापूर्वक इलाज कर सकती है। यह रोगी की तंत्रिकाओं को शांत कर रोगी को गहरी नींद देती है।
अश्वगंधा को शरीर में एसीटीएच हार्मोन को कम करके कार्टिसोल लेवल को कम करने के लिए जाना जाता है और  इसीलिए यह तनाव जनित समस्याओं का बखूबी इलाज करती है। इसमें अनिद्रा रोग भी सम्मिलित है।

- आयुर्वेद विशेषज्ञ 
आयुर्वेद के अनुसार अनिद्रा रोग शरीर में वात दोष उत्पत्ति के कारण होता है। इस औषधि में तंत्रिका कोशिकाओं को शांत या सहज करने के सब गुण मौजूद होते हैं। इसी कारण यह वात को संतुलित करके व्यक्ति को गहरी नींद प्रदान करती है।

अश्वगंधा मतली का कारण कब बन सकती है? (When Can Ashwagandha Cause Nausea?)

-विज्ञान विशेषज्ञ
निर्देशित या चिकित्सक के परामर्श से ज्यादा मात्रा में  किया गया अश्वगंधा का सेवन मतली या कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य- समस्याओं का कारण बन सकता है।

-आयुर्वेद विशेषज्ञ 
जब किसी व्यक्ति द्वारा अश्वगंधा के चूर्ण का सेवन किया जाता है तो मतली का अनुभव सामान्य बात है। 
यह समस्या सामान्यतः पाचक अग्नि के अभाव वाले लोगों में देखी जाती है।

टिप्स:
यदि आप अश्वगंधा का पहली बार सेवन करने जा रहे हैं तो इसका सेवन गोली या कैप्सूल के रूप में ही शुरू करें और  फिर धीरे-धीरे इसके चूर्ण के इस्तेमाल के बारे में सोचें।

संदर्भ:

http://www.ayurveda.hu/api/API-Vol-1.pdf
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/22754076/
https://rfppl.co.in/view_abstract.php?jid=1&art_id=2463
https://www.semanticscholar.org/paper/Hypoglycemic%2C-diuretic-and-hypocholesterolemic-of-Andallu-Radhika/e446878b7811c969a9b63e7dec6920137140bb35
https://www.researchgate.net/publication/341320413_An_Ayurvedic_Drug_for_true_integration_therapeutic_benefits_of_Ashwagandha_and_current_state-of-the-art
https://ksm66ashwagandhaa.com/resources/white-papers/
https://www.ayujournal.org/article.asp?issn=0974-8520;year=2015;volume=36;issue=1;spage=63;epage=68;aulast=Choudhary

 

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डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।