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आयुर्वेद से करे स्वाइन फ्लू का इलाज

By Dr Abhishek Gupta | Disease and Treatment | Posted on :   17-Mar-2020

स्वाइन फ्लू का इलाज

Swine Flu ka upchar in Hindi : कोरोनावायरस के खौफ के बीच अब एक बार फिर से स्वाइन फ्लू ने भी दस्तक दे दी है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के 5 जज इस बीमारी से ग्रस्त पाए गए जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट में साफ़ - सफाई और एहतियाती कदम उठाने के लिए गाइडलाइन जारी करना पडा. इससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. हवा के माध्यम से फैलने वाली यह संक्रामक बीमारी यूँ तो काफी खतरनाक है लेकिन साफ़ - सफाई और आयुर्वेद में वर्णित बातों को अपनाकर इससे बचा जा सकता है. आइये जानते हैं कि स्वाइन फ्लू को लेकर आयुर्वेद क्या कहता है!

स्वाइन फ्लू का आयुर्वेद में वर्णन
आयुर्वेद में स्वाइन फ्लू रोग का जिक्र मिलता है. आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में इसकी पहचान भले अब की गयी हो, लेकिन आयुर्वेद में इसके बारे में लगभग 5000 वर्ष ही वर्णन कर दिया है, वहाँ इसका नाम 'वात्श्लेष्मिक ज्वर' दिया गया है. आयुर्वेद के अनुसार यह एक संक्रमण जन्य रोग है और जिससे श्वसन तंत्र में विकार उत्पन्न हो जाता है.

आयुर्वेद के अनुसार स्वाइन फ्लू की चिकित्सा 
आयुर्वेद में 'वात्श्लेष्मिक ज्वर' यानी स्वाइन फ्लू की चिकित्सा की व्यवस्था दी गयी है. आइये जानते हैं कि स्वाइन फ्लू से बचाव व उपचार के लिए क्या - क्या आयुर्वेदिक उपाय और औषधियों को प्रयोग में लाया जा सकता है.  

गिलोय,  तुलसी, आंवला आदि का रस
आयुर्वेद के अनुसार स्वाइन फ्लू  से पीड़ित व्यक्ति व्यक्ति को गिलोय,  तुलसी, आंवला, काली मिर्च, चिरायता,  लहसुन एवं नीम की पत्तियों का रस या चूर्ण शहद के साथ लेना चाहिए. लेकिन यदि पीड़ित व्यक्ति मधुमेह से पीड़ित है तो फिर शहद का प्रयोग नहीं करना चाहिए.  इनके सेवन से रोग प्रतिरोध क्षमता बढती है और संक्रमण का खतरा कम रहता है. 

घर में औषधीय धुंआ
घर में वातावरण शुद्ध करने के लिए नीम, कपूर, गाय का घी, हल्दी का धुंआ करना चाहिए. ऐसा करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है तथा संक्रमण दूर होता है.

विटामिन - सी
इस रोग में मरीज को विटामिन सी की कमी हो जाती है जिसको पूरा करने के लिए त्रिफला या ताजे आमले के जूस का प्रयोग करना चाहिए.

आयुर्वेदिक औषधियां
आयुर्वेद की कुछ औषधियों जैसे - त्रिभुवन कीर्ति रस, संजीवनी वटी, गोदन्ती भस्म, अभ्रक भस्म, मंडूर भस्म, कस्तूरी भैरव रस, जयमंगल रस, कफकेतु रस, लक्ष्मी विलास रस, तालीसादि चूर्ण, अमृतारिष्ट आदि औषधियों का प्रयोग करने से इस रोग में तेजी से लाभ मिलता है. चुकी हरेक कि प्रकृति अलग - अलग तरह की होती है, इसलिए इनका सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही किया जाना चाहिए. 

(डॉ. अभिषेक गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, निरोगस्ट्रीट)

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Co-Founder - Nirog Street, Consultant Physician and Surgeon Ex Advisor - Apollo Pharmacy, Editor- Brahm Ayurved Magazine

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