Home Blogs CoronaVirus News गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कोविड मामले बढ़ने पर 3 पूर्वोत्तर राज्यों के विचार मांगे

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कोविड मामले बढ़ने पर 3 पूर्वोत्तर राज्यों के विचार मांगे

By NS Desk | CoronaVirus News | Posted on :   21-Jul-2021

गुवाहाटी/ईटानगर, 21 जुलाई (आईएएनएस)। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में कोविड-19 मामलों की संख्या में खतरनाक वृद्धि का स्वत: संज्ञान लिया है और इस पर तीन पूर्वोत्तर राज्यों से विचार मांगे हैं।

एक अन्य विकास में, गुवाहाटी उच्च न्यायालय की ईटानगर पीठ ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के 30 जून के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि यह आदेश राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यो के लिए अस्थायी परमिट जारी करने के लिए टीकाकरण और गैर-टीकाकरण वाले व्यक्तियों के बीच भेदभाव करता है। राज्य में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में।

मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया, न्यायमूर्ति एन. कोटेश्वर सिंह और न्यायमूर्ति मनश रंजन पाठक की गुवाहाटी उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ ने कहा, हम कोविड-19 महामारी की खतरनाक स्थिति का स्वत: संज्ञान लेते हैं, जो अपनी दूसरी लहर में है, नगालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश राज्यों में, जहां संक्रमण दर बहुत अधिक है।

अदालत ने तीनों राज्यों के महाधिवक्ता को सुनवाई की अगली तारीख 23 जुलाई को उपस्थित रहने को कहा।

सोमवार को पारित आदेश में कहा गया है, अदालत को वर्तमान कोविड-19 स्थिति और संबंधित राज्य सरकारों द्वारा संकट से निपटने के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में अपने-अपने राज्यों में सही तस्वीर प्राप्त करने में उनकी (एडवोकेट जनरलों की) सहायता की आवश्यकता होगी।

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नगालैंड में कोविड संक्रमण दर क्रमश: 7.73 प्रतिशत, 10.85 प्रतिशत और 6.51 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय दैनिक संक्रमण दर 1.68 प्रतिशत और साप्ताहिक संक्रमण दर 2.06 प्रतिशत है।

इस बीच, गुवाहाटी उच्च न्यायालय की ईटानगर पीठ के न्यायमूर्ति नानी तगिया ने एक आदेश में कहा कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के 30 जून के आदेश में उन व्यक्तियों का वर्गीकरण किया गया है, जिन्हें कोविड-19 का टीका लगाया गया है और जिन्हें टीका नहीं लगाया गया है। राज्य में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए अस्थायी परमिट जारी करने का उद्देश्य।

नौ पृष्ठ के आदेश में कहा गया है, आदेश भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19 (1) (डी) और 21 का उल्लंघन करता है, मामले में अंतरिम आदेश की मांग करता है। तदनुसार, वापसी योग्य तिथि तक, मुख्य सचिव द्वारा जारी आदेश टीकाकरण व्यक्तियों के बीच भेदभाव करता है और राज्य में सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए अस्थायी परमिट जारी करने के लिए गैर-टीकाकरण वाले व्यक्तियों को रोक दिया जाएगा।

पीठ ने सुनवाई की अगली तारीख 28 जुलाई तय की।

--आईएएनएस

एसजीके/एसजीके

NS Desk

Are you an Ayurveda doctor? Download our App from Google PlayStore now!

Download NirogStreet App for Ayurveda Doctors. Discuss cases with other doctors, share insights and experiences, read research papers and case studies. Get Free Consultation 9625991603 | 9625991607 | 8595299366

डिस्क्लेमर - लेख का उद्देश्य आपतक सिर्फ सूचना पहुँचाना है. किसी भी औषधि,थेरेपी,जड़ी-बूटी या फल का चिकित्सकीय उपयोग कृपया योग्य आयुर्वेद चिकित्सक के दिशा निर्देश में ही करें।