Home Blogs CoronaVirus News कोविड-19 मधुमेह की एक नई लहर ला सकता है : शोध

कोविड-19 मधुमेह की एक नई लहर ला सकता है : शोध

By NS Desk | CoronaVirus News | Posted on :   24-Jul-2021

न्यूयॉर्क, 24 जुलाई (आईएएनएस)। जहां मधुमेह को गंभीर कोविड परिणामों के लिए एक जोखिम कारक के रूप में जाना जाता है, वहीं शोधकर्ता अब कोविड-19 के साथ अस्पताल में भर्ती मरीजों में हाइपरग्लाइसेमिया पनपने का अंदेशा जता रहे हैं, जिसमें रक्त शर्करा का उच्च स्तर महीनों बाद तक बना रहता है।

बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं ने मार्च से मई 2020 तक इटली में कोविड-19 के लिए अस्पताल में भर्ती 551 लोगों के स्वास्थ्य का आकलन किया।

शोधपत्र के प्रमुख लेखक व नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ पाओलो फिओरिना ने कहा कि मधुमेह के इतिहास के बिना लगभग आधे रोगियों (46 प्रतिशत) में नए हाइपरग्लेसेमिया पाए गए। एक अनुवर्ती से पता चला है कि अधिकांश मामलों का समाधान किया गया था, जबकि नए हाइपरग्लाइसेमिक रोगियों में से लगभग 35 प्रतिशत संक्रमण के कम से कम छह महीने बाद भी बने रहे।

ग्लूकोज असामान्यताओं के कोई लक्षण वाले रोगियों की तुलना में, हाइपरग्लाइसेमिक रोगियों के इलाज में भी ऑक्सीजन की अधिक आवश्यकता, वेंटिलेशन और गहन देखभाल की जरूरत पड़ती है।

यह शोधपत्र नेचर मेटाबॉलिज्म जर्नल में प्रकाशित हुआ था। टीम ने यह भी पाया कि हाइपरग्लाइसेमिक रोगियों में असामान्य हार्मोनल स्तर थे।

फियोरिना ने कहा, हमने पाया कि वे गंभीर रूप से हाइपरिन्सुलिनमिक थे। उनके शरीर में बहुत अधिक इंसुलिन का उत्पादन हुआ।

उनके पास प्रो-इंसुलिन के असामान्य स्तर, इंसुलिन के अग्रदूत और बिगड़ा हुआ आइलेट बीटा सेल फंक्शन के मार्कर भी थे। आइलेट बीटा कोशिकाएं इंसुलिन बनाती और स्रावित करती हैं।

फियोरिना ने कहा, मूल रूप से, हार्मोनल प्रोफाइल से पता चलता है कि कोविड-19 के साथ उन रोगियों में अंत:स्रावी अग्नाशयी कार्य असामान्य है और यह ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक बना रहता है।

हाइपरग्लाइसेमिक रोगियों में आईएल-6 और अन्य सहित भड़काऊ साइटोकिन्स की मात्रा में गंभीर असामान्यताएं थीं। जबकि कुछ रोगियों में ग्लूकोमेटाबोलिक असामान्यताएं समय के साथ कम हो गईं, विशेष रूप से कोविड-19 संक्रमण के बाद। ग्लूकोज का स्तर और असामान्य अग्नाशय हार्मोन का रिसाव भी कोविड के बाद की अवधि में बना रहा।

फियोरिना ने कहा, यह अध्ययन सबसे पहले दिखाता है कि कोविड-19 का अग्न्याशय पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यह इंगित करता है कि अग्न्याशय वायरस का एक और लक्ष्य है जो न केवल अस्पताल में भर्ती होने के दौरान तीव्र चरण को प्रभावित करता है, बल्कि संभावित रूप से इन रोगियों का दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।

इस शोध ने कोविड-19 के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती रोगियों में अग्नाशय के कार्य के मूल्यांकन के महत्व की ओर इशारा किया है।

--आईएएनएस

एसजीके/एएनएम

NS Desk

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