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प्रो. माधव सिंह बघेल का निधन,आयुर्वेद जगत में शोक की लहर

By NS Desk | Ayurveda Street | Posted on :   11-Jan-2021

Professor Madhaw Singh Baghel

गुजरात आयुर्वेद विश्व विद्यालय के पूर्व डायरेक्टर ( Institute for Post Graduate Teaching & Research in Ayurveda, Gujarat Ayurveda University, Jamnagar) प्रोफेसर माधव सिंह बघेल (Professor Madhaw Singh Baghel) का निधन हो गया है. वे 68 वर्ष के थे. उनका जन्म मध्यप्रदेश के रीवा में हुआ था. आयुर्वेद (Ayurveda) के शिक्षण और अध्यापन में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है. उनके निधन पर आयुर्वेद जगत में शोक की लहर फ़ैल गयी. उनके निधन पर आयुर्वेद जगत के वैद्यजनों ने अलग-अलग तरह से अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की है जिसमें उनके व्यक्तित्व और आयुर्वेद के क्षेत्र में किये उनके काम की भी झलक मिलती है. इनमें से कुछेक श्रद्धांजलि संदेश - 
 
वैद्य योगेश कुमार पाण्डेय (Yogesh Kumar Pandey)
प्रोफेसर माधव सिंह बघेल जी   का चले जाना आयुर्वेद के लिए अपूरणीय क्षति है। यह 'सिंह' हम सबके लिए सदैव माधव बनकर ही रहा। सबके साथ, सबमें, फिर भी सबसे अलग। मैंने उन्हें हमेशा  किसी भी ढांचे और खांचे से मुक्त पाया। एक ऐसा व्यक्ति जिसने जाने अनजाने कितने व्यक्तित्व गढ़े , गिनती ही नहीं। आप उनसे मिले और अलग होते समय उनके चरणों में नतमस्तक हो आशीर्वाद लेकर सदैव के लिए उनके शिष्य न बन जाए ऐसा शायद ही किसी के साथ हुआ हो। उनकी अकादमिक यात्रा मेरे लिए  प्रेरणा है और सदैव रहेगी। वह BHU और NIA, Jaipur जैसी किसी स्थापित परम्परा के स्नातक और परास्नातक तो नहीं थे पर IPGTRA जैसी परम्परा रची गढ़ी। पर कभी उस पहचान के प्रति भी आसक्त नहीं दिखे। जब भी दिखे निर्मानमोह दिखे, सङ्गदोष से मुक्त, विनिवृत्तकाम। सर्वारम्भपरित्यागी होना क्या होता है, उन्हे देखकर ही जाना । उनकी शतायु हमारे लिए प्रभु का आशीर्वाद होती, फिलहाल..........वह हम सबमें रच बस गये हैं।
 
विजय बेरीवाल (Vijay Beriwal)
आज आयुर्वेद के एक आधुनिक महर्षि श्री माधव सिंह बघेल हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनके द्वारा किए गए अनुसंधान व कार्य हमारे बीच उनकी य़ादे बनकर सदा रहेंगे !वैद्य महर्षि आपको समस्त आयुर्वेद जगत की ओर से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि वैद्य विजय बेरीवाल 
 
आशुतोष द्विवेदी (Ashutosh Dwivedi)
आयुर्वेद जगत के पितामह , वैश्विक व्यक्तित्व, IPGTRA जामनगर के पूर्व निदेशक, गुजरात आयुर्वेद विश्व विद्यालय के पूर्व कुलपति, श्रद्धेय माधव सिंह बघेल सर Madhaw Baghel के हमें छोड़कर चले जाने का समाचार पीड़ादाई एवम् स्तब्ध करने वाला है। आपका मार्गदर्शन , स्नेह, आशीर्वाद हमारे लिए संबल था। आपसे प्रेरणा पाकर आज पीढ़ियां आयुर्वेद ध्वजा को थामें खड़ी हैं। मुझे याद आता है जामनगर में आपके पिता जी श्रद्धेय दाऊ साहब जी ने मुझे आपसे मिलाया, तबसे ही आपने सदा वात्सल्य से अपने इस रिमहा शिष्य के सिर पर हांथ रखा। आपकी कमी आयुर्वेद जगत में और हमारे जीवन में कोई पूरी नहीं कर सकता। दुख की इस घड़ी में ईश्वर परिवार जनों, आपकी शिष्य परंपरा को ,हमें संबल प्रदान करे और आपको अपने श्री चरणों में स्थान दे। कोटि कोटि नमन, विनम्र एवम् अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि ॐ शांति 
 
युवराज कुमार त्यागी (Yuvraj Kumar Tyagi)
अत्यंत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरे घानिष्ठ मित्र एवं  आधुनिक काल के आयुर्वेद पुरोधा एवं कुशल प्रशासक प्रो माधव सिंह बघेल, पूर्व डाइरेक्टर, आई पी जी टी एण्ड आर ए, गुजरात आयुर्वेद विश्व विद्यालय,  जामनगर हमारे बीच नहीं रहे । आयुर्वेद जगत को यह एक अपूरणीय क्षति है । मैं व्यक्तिगत रूप से इस समाचार से अत्यन्त व्यथित हूँ । प्रभु श्री  पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान देकर चिरशांति प्रदान करें एवं शोक संतप्त आत्मीय जनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें । 
ॐ शांति: शांति: शांति: ॐ 
 
राकेश श्रीवास्तव (Rakesh Srivasatav)
सादर विनम्र श्रद्धांजलि ... ॐ शान्ति शान्ति शान्ति
  • प्रोफेसर (वैद्य) माधव सिंह बघेल सर से मेरी प्रथम मुलाकात 2006 में हुयी थी, जब मै Ipgtra Jamnagar में एम.डी. प्रवेश के लिये गया था, वो उस समय डायरेक्टर थे...
  • मेरा नाम जामनगर एम.डी. प्रवेश में प्रतीक्षा सूची में था, इसलिये मुझे अहमदाबाद सेंटर में एम.डी. के लिये बुलाया गया था ... उस समय मै रीवा (मध्य प्रदेश) से एम.डी. कर रहा था, मैने अहमदाबाद सेंटर में प्रवेश लेना उचित नही समझा ... 
  • इसलिये किसी और ने मेरे स्थान पर प्रवेश कर लिया ... परन्तु एक-दो महीने के अंदर ही जामनगर से एक विद्यार्थी ने home sickness के कारण अपनी सीट छोड़ दी ... फिर वहां पढ़ रहे मेरे कुछ सीनियर ने मुझे जामनगर में प्रवेश हेतु बुलाया ...
  • आयुर्वेद के क्षेत्र में जामनगर की ख्याति AIIMS जैसे संस्थान जैसी थी, मै बिना देर किये जामनगर पहुंचा और बघेल सर से मिला...
  • बघेल सर ने संस्थान के नियम बताते हुये मुझे प्रवेश देने में असमर्थता दिखायी, बोलो नियमानुसार अब उसी विद्यार्थी का प्रवेश होगा जिसने अहमदाबाद सेंटर में प्रवेश लिया है ... 
  • मैं बहुत उदास हो गया, परन्तु हिम्मत नही हारी ... वहीं एक गेस्ट हाउस में कमरा किराया पर ले लिया और प्रतिदिन बघेल सर से मिलने पहुंच जाता था ... तंग आकर बघेल सर ने बाद में मुझसे मिलने पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया ...
  • जामनगर सेंटर के पास ही बगल में बाल हनुमान मंदिर था, अब प्रतिदिन सुबह-शाम वहीं जाकर अपनी उदासी को कम करने की कोशिश करने लगा ...
  • एक दिन चमत्कार हो गया ... शाम में बाल हनुमान के ध्यान में मगन था, तभी पीछे से आवाज आयी ... राकेश ! तुम अभी भी जामनगर में ही हो ... मैने पलटकर देखा तो बघेल सर फूल लिये हुये दिखे, मैने चरण-स्पर्श करते हुये कहा ... सर, मैने जामनगर के अलावा और कोई सपना देखा ही नही, अब तो आपने भी साथ छोड़ दिया है तो भगवान की शरण में आया हूं ...
  • मेरे कटिबद्धता को देखकर वो अति प्रसन्न हुये और बोले एक काम करो मै तुम्हारा प्रवेश करा दूंगा ... मैने बोला सर, आदेश दे ... उन्होंने कहा कि किसी तरह ये साबित कर दो कि तुम्हारे पास admission letter ही देर से पहुंचा इसलिये तुम अहमदाबाद में प्रवेश नही ले पाये ... अब जामनगर का पता चला इसलिये आये हो ...
  • मै तुरन्त गेस्ट हाउस पहुंचा और admission letter को देखा तो दंग रह गया, डाक घर की लापरवाही से वह लेटर admission date से चार दिन बाद मेरे घर पहुंचा था ... मै वह लेटर लेकर अगले दिन ही बघेल सर से मिलने office पहुंच गया, इस बार मुझको बघेल सर से मिलने से किसी ने नही रोका ... सर ने letter देखा और बोला तुरन्त admission ले लो नही तो वो विद्यार्थी भी बहुत दबाव डाल रहा है, तुम पी.के. प्रजापति सर से मिलो, मैने तुम्हारी मदद के लिये उनको बोल दिया है ...
  • मै प्रजापति सर से मिला तो उन्होंने admission process में कुल 7-8 हजार का खर्च तुरन्त जमा करने को बोला, मेरे पास मुश्किल से 2-3 हजार ही बचे थे ... प्रजापति सर बोले कि एक दिन भी समय व्यर्थ गया तो मै कुछ नही कर पाऊंगा, मै सोच में डूब गया ... उन्होंने तुरन्त अपनी जेब से 10,000 रुपये निकालते हुये बोले कि बघेल सर ने कहा था कि वो हजारो किमी दूर बिहार से आया है, इसलिये उसकी मदद कर देना, पता नही कैसे रह रहा होगा ...
  • उसी जोश में मैने बघेल सर को call लगाया, पर बघेल सर ने ऐसा कहा कि मेरा सारा जोश छूमन्तर हो गया ... 
  • बघेल सर बोले - राकेश, ये दोनों Gold medal विश्व के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित विश्विद्यालय के है, ये इतने भारी है कि इनका वजन ढ़ोने के लिये अब तुम्हें और मजबूत होना होगा ... इन medals की प्रतिष्ठा अब तुम्हारे हाथों में है ... Medals तो पा लिये हो, अब इसको चमकाते रहना ...
  • तब से लेकर आजतक बघेल सर की इन बातों को गांठ बांधकर उस ओर प्रयासरत हूं ... 
  • 20-25 दिन पहले ही बघेल सर को Call किया था ... वो बोले - और वैद्य जी !!! खूब तहलका मचा रहे हो !!!
  • वो मुझे राकेश बोलते थे, मै समझ गया, मैने नाम के आगे डाॅक्टर हटाकर वैद्य लिखा, शायद उससे वो काफी प्रफुल्लित थे।
  • मैने कहा सर ये IMA वाले लगातार आयुर्वेद पर प्रहार कर रहे है, आपलोग एक देशव्यापी आयुर्वेदिक संगठन बनाये ताकि इन्हें जवाब दिया जा सके।
  • वो बोले - वैद्य जी, जो आपलोग कर रहे हो इसी को और जोर-शोर से करना शुरु करो, सोशल मीडिया पर आयुर्वेद को इसी तरह रखते रहो, यहीं उनका जवाब बनेगा ... और उसी समय से मैने अपने रोगियों का documentation करना शुरु कर दिया ...
  • गुरु जी, आप एक अभिभावक थे, आपकी दी हुयी सीख हमेशा याद रहेगी ... ईश्वर आपकी आत्मा को शान्ति दे  ... ॐ शान्ति शान्ति शान्ति 
अतुल वार्ष्णेय (Atul Varshney)
  • आयुर्वेद जगत के निर्विवाद मार्गदर्शक ,माधव सिंह बघेल सर ,माधवकर के बाद रोग   निदान के आधुनिक माधव ,मेरे जैसे हजारों आयुर्वेद शिक्षकों के पथ प्रदर्शक ,हर व्यक्ति को मुस्कराते हुए रास्ता बताने वाले ,नहीं रहे  यह सुनकर विश्वास ही नहीं हो रहा।
  • ग्वालियर से BAMS करने के बाद ,State Ayurved college लखनऊ से ही उन्होंने MD(Ay) काय चिकित्सा से की। वहाँ मेरे MD(Ay) करते समय जब वह मेरे External  Examiner बनकर आये तभी उनसे पहला परिचय हुआ और वहीं उनके विचारों से प्रभावित होकर मैं उन्हें अपना पथ प्रदर्शक मानने लगा।
  • उन्होंने जब PG थीसिस के Data कलेक्शन का ऐतिहासिक कार्य किया तब पीलीभीत के MD द्रव्यगुण  विषय  का सारा डेटा जब मैंने उन्हें दिया तब से लगातार पत्राचार व फोन वार्ता भी होती रही,और अब हमारी Academy of Rog Nidan बनाने में कदम कदम पर उनका मार्गदर्शन मिला,अभी2020 के कोरोना काल मे अपनी  2 वेबिनारों में भी उनके मार्गदर्शन का भी  अवसर हम सबको मिला।यह दाढ़ी वाला फ़ोटो तभी का है ,मैने कहा था बहुत अच्छी लगती है सर यह दाढ़ी आप पर माधवकर,चरक की तरह।
  • CCRAS की Governing Body तथा वित्त समिति में सर  मेरे साथ अभी तक हर मीटिंग में रहे, मुझे उनका साथ ही नहीं सलाह भी मिलती रही, हर कदम पर सलाह देने के अलावा मेरे व्यक्तित्व को निखारने में उनका योगदान मैं कभी नहीं भूल सकता,आयुर्वेद की हर कमेटी में उनकी अमूल्य सलाह अभी तक ली जाती रही है।IPGTRA जामनगर को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने व आधुनिक रूप देने में उनका ऐतिहासिक योगदान तो है ही मेरे जैसे हजारों अध्यापकों को आगे बढ़ाने में भी उनका अत्यधिक योगदान है,अभी कोरोना काल से ठीक पहले 28 Feb 2020 को बरेली सेमिनार में भी सबको उनका मार्गदर्शन मिला।
सादर नमन
विनम्र श्रद्धांजलि
 
सदानंद प्रसाद सिन्हा (Sadanand Prasad Sinha)
मुझे आज पता चला कि सचमुच सफलता आसानी से नहीं मिलती और अगर मिल गई तो उसे सभी पचा नहीं पाते।
सोने को खरा होने के लिए आग में तपना पड़ता है और सुन्दर अलंकार में परिवर्तित होने के लिए सुघड़ सुनार के हाथों छेनी हथौड़ी की चोट सहनी पड़ती है।
श्रीमन बघेल जी आपके लिए वैसे ही सुनार बने।उनकी प्रतिष्ठा को बढ़ाकर आप उन्हें सही श्रद्धांजलि दे पायेंगे और हमें पूर्ण विश्वास है कि आप हमेशा सफल होंगे।
गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागूं पाय
बलिहारी गुरु आपनो जिन गोविंद दियो बताया।
ऊं श्रीं गुरूवै नमः

प्रोफेसर माधव सिंह बघेल का परिचय और आयुर्वेद जगत में उनका योगदान - 

Professor Madhaw Singh Baghel -
Former Chairman, Ayurveda Chair, Department of Pharmacology & Phytotherapy, Medical School, University of Debrecen, 4032 Debrecen, Hungary & Former Director, Institute for Post Graduate Teaching & Research in Ayurveda, Gujarat Ayurveda University, Jamnagar- 361 008 Gujarat, India.
 
Prof. Madhaw Singh Baghel was born in 1953 in Rewa, Madhya Pradesh, India. He has pursued in graduate education in Ayurveda from State Ayurveda College, Lucknow and later doctor of medicine in Ayurveda and obtained doctoral degree in Ayurveda from prestigious Gujarat Ayurved University, Jamnagar.
 
He is teacher par excellence with more than 33 years of postgradate and doctoral teaching at different various capcacities as lecturer, reader and professor. His areas of specialization are general medicine (Kayachikitsa), Pancakarma and Ayurveda pathology (Rogavijnana). Prof. M S. Baghel has served as Chairman, Ayurveda Chair at Department of Pharmacology & Phytotherapy, Medical School, University of Debrecen, 4032 Debrecen, Hungary during 2014-15. Chair is instituted by Ministry of AYUSH, GoI, New Delhi.
 
Research Expertise :
Dr Baghel has supervised  21 doctoral researches (Ph D) and 71 doctorate thesis works. He has published 135 research papers in various national journals/ souvenirs. He is editor / member of editoral board / reviewer in several journals such as AYU (a peer Review Journal), IJAR, JAIM and JREIM. He has authored 6 books and monographs especially a book by name Vikriti Evam Roga Vijnana is special one to be mentioned.
 
Current website was first published as Directory by name “Researches in Ayurveda (A Classified Directory of all India P.G & Ph.D. Theses)” in 1997 and second edition in 2005. This unique work is widely appreciated and accepted in Ayurvedic academic circle.
 
Extension Activities :
He has delivered >71 extension lectures, guest speeches, key note addresses and plenary talks. He has attended 107 international, national and regional seminars. He has contributed in several prestigious projects and national issues as he was nominated by CSIR as member of Advisory Board of Institute of Genomics & Integrative Biology, New Delhi from January 2013. He is member of Governing Body of CCRAS, New Delhi and Morarji Desai Institute of Yoga Research, New Delhi since August 2012.
 
Adminstrative Experience:
He is a very efficient adminstrator who has served as Director for 12 years at IPGT&RA (August 2006 to Dec, 2014), GAU, Jamnagar; Vice Chancellor (I/c), Gujarat Ayurveda University,  (March 2008 to Jan 2010);  Director, WHO Collaborating Centre for Traditional medicine. Director of National Resource Centre of Pharmacoviglance of ASU Drugs of dept of AYUSH, at IPGTRA, G A U, Jamnagar in 2008; Director, International Centre of Ayurvedic Studies, Gujarat Ayurved University (June, 2001- August, 2006).
 
Leadership Qualities:
His laudable leadership has lead to designation of the Institute for Post Graduate Teaching & Research in Ayurveda, Jamnagar as WHO Collaborating Centre for Traditional medicine during his tenure of Director. Besides this, grading of IPGT & RA as best academic Institution Dept of AYUSH in its internal survey.
 
Foreign Visits:
Dr Baghel has visited several countries to spread Ayurveda, namely - Kandy, Srilanka (2014), Kunming, China (2014), Beijing, China (2012), Switzerland (2010), Berlin Germany (2010), Normandy, France (2010), Seoul, South Korea (2009), St Petersburg, Russia (2008), Budapest, Hungary (2007) Birstien, Germany (2005), Milan, Italy (2006), Pyongyang, DPR Korea (2005). He has visited China and South Korea under the award of WHO Fellowship to study the clinical research in 1991.
 
Awards and Accolades:
Dr MS Baghel is recipient of several awards and accolades namely - Ayurveda Martanda by All India Ayurvedic Specialist (PG) Association New Delhi September 2010; Vishva Ayurveda Ratna (India) awarded by International Academy of Ayurvedic Physicians at Udupi in 2008; Ayurveda Bhushana award by All India PG (Specialist) Association in 2005 at Chandigarh in lieu of publication of book Researches in Ayurveda; Ram Narayan Sharma Best Teacher Award for the Year 2003 by All India Ayurveda Teachers Association of India in 2004.
 
After retirement, Dr Baghel is busy in putting his expertise in the form of scholarly books and he is the Chief Editor of this website, which is helping postgraduate and doctorate scholars alike.
(स्रोत - www.researches-in-ayurveda.co.in)
 
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NS Desk

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